न तो नियोजन, न ही स्थानीय नीति स्पष्ट, केवल आइवाश एक्शनस्थानीय नीति पर सरकार के खिलाफ झाविमो ने खोला मोरचा, बाबूलाल मरांडी ने कहासंविधान की धारा 16 (खंड तीन) को आधार बना कर 20 वर्ष तक राज्य के लोगों के लिए नौकरी आरक्षित करे – स्थानीयता के नाम पर राज्य के लोगों को थमाया झुनझुना – राज्यभर में 22 व 23 को करेंगे आर्थिक नाकेबंदी – राज्य बनने के बाद मुख्यमंत्री रहते हमने बिहार सरकार द्वारा परिभाषित स्थानीयता के 1982 के सर्कुलर को लागू किया था – प्रेस वार्ता में जेवीएम प्रधान महासचिव सह विधायक प्रदीप यादव, जेवीएम युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष संतोष कुमार थे शामिल संवाददाता 4 गोड्डा सरकार द्वारा स्थानीय नीति को लागू किये जाने के निर्णय के विरोध में शुक्रवार को किसान भवन परिसदन में झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी व विधायक प्रदीप यादव ने संयुक्त प्रेस वार्ता की. श्री मरांडी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि स्थानीय नीति को लागू कर सरकार ने राज्य की जनता का आइवाश किया है. एक तरह से राज्य के लोगों के लिए नीति बनाकर झुनझुना थमाने का काम किया गया. मैंने बिहार की नीति को अपनाया था श्री मरांडी ने कहा कि राज्य में बनी पहली सरकार ने बिहार सरकार द्वारा स्वीकारित कानून 1982 को आधार बनाकर झारखंड में भी लागू किया था. नियम में खतियान में पिता के नाम को आधार बना कर राज्य में रहनेवाले थर्ड व फोर्थ ग्रेड में नौकरी देने की नीति बनी थी. मगर उच्च न्यायालय में मामला जाने के बाद सरकार ने शपथ-पत्र में इस बात की जिक्र किया कि वैसे व्यक्ति जो भूमिहीन है, उसके लिए गांव के लोगों द्वारा प्रमाणित किये जाने के बाद उसे नौकरी मिलेगी. मुख्यमंत्री की कुरसी से उतर जाने के बाद सरकार को मैंने कई बार इस बात के लिए लिखा. मगर सरकार ने इसका जवाब नहीं दिया. गत महीनों राज्य में नियोजन की शुरुआत के साथ स्थानीयता का मामला तूल पकड़ा. आंदोलन तथा विरोध हुआ. इसको लेकर सरकार दबाव में आकर अपना बचाव करते हुए आंदोलन को भटकाने के लिये ऐसा निर्णय लिया है. अधिसूचित क्षेत्र में आउटसोर्सिंग से हो रहा काम राज्य सरकार का कहना है कि अधिसूचित क्षेत्र के लिये थर्ड व फोर्थ ग्रेड के लिये स्थानीय लोगों को लेना है. सच है कि सभी कार्यालयों से चपरासी की नौकरी की नियुक्ति रद्द कर आउटसोर्सिंग से काम ली जा रही है. राज्य का आधा ही हिस्सा अधिसूचित क्षेत्र में है. जबकि थर्ड ग्रेट में प्राथमिक शिक्षक पद की बहाली है, जाे मात्र 5 से 10 प्रतिशत ही है. जबकि राज्य के अंदर पुलिस पदाधिकारी, वन सेवा, सचिवालय, बीडीओ, सीओ, स्वास्थ्य सेवा, काॅलेज कर्मी तथा हाइ स्कूल में ही सर्वाधिक बहाली है, जो स्थानीयता के आरक्षण से बाहर है. सरकार केवल लेमनचूस देने का काम किया है. 53 फीसदी की हो आरक्षण श्री मरांडी ने कहा कि उनके सरकार के समय राज्य का आरक्षण 73 प्रतिशत किया गया था. मांग है कि अन्य राज्यों की तरह एससी, एसटी तथा ओबीसी के लिये कुल 50 प्रतिशत से बढाकर 53 प्रतिशत किया जाए. करेंगे आर्थिक नाकेबंदी श्री मरांडी ने कहा कि राज्य में स्थानीयता एवं नियोजन नीति के मुद्दे पर 22 व 23 अप्रैल को आर्थिक नाकेबंदी की जायेगी. राज्य भर में जोरदार आंदोलन चलाया जायेगा. तसवीर-01
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Prabhat Khabar Digital Desk
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