स्वामी विवेकानंद की जयंती पर हुई परिचर्चा

साहिबगंज . शिखर पुरूष स्वामी विवेकानंद की जायंती के मौके पर प्रगति वार्ता पाठक विचार मंच के तत्वावधान में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया. प्रगति भवन के सभागार में आयोजित परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए डॉ रामजन्म मिश्र ने कहा कि स्वामी विवेकानंद वह सेतु है, जिस पर प्राचीन और नवीन भारत परस्पर आलिंगन […]
साहिबगंज . शिखर पुरूष स्वामी विवेकानंद की जायंती के मौके पर प्रगति वार्ता पाठक विचार मंच के तत्वावधान में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया. प्रगति भवन के सभागार में आयोजित परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए डॉ रामजन्म मिश्र ने कहा कि स्वामी विवेकानंद वह सेतु है, जिस पर प्राचीन और नवीन भारत परस्पर आलिंगन बद्ध रहते हैं. विवेकानंद वह समुद्र है, जिसमें धर्म और राजनीति, राष्ट्रीयता और अन्तराष्ट्रीयता तथा उपनिषद और विज्ञान, सबके सब समाहित होते हैं. परिचर्चा में डॉ भोलानाथ ओझा ने कहा कि स्वामी जी ने युवाओं में भारत भक्ति, आत्मा, निर्भरता और स्वाभिमान का युगबोध कराया. प्रगति वार्ता के संपादक सच्चिदानंद ने कहा कि विवेकानंद धर्म, संस्कृति के नेता थे. राजनीति से उनका कोई सरोकार नहीं था. अधिवक्ता नीरज ने भी स्वामी जी के बताये मार्गों पर चलने का आह्वान किया. मौके पर शिव मंगल मिश्र, दीनानाथ पासवान, हेमंत कुमार, विमल मुर्मू, विवेक कुमार ने भी अपने विचार प्रस्तुत किया.
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