कब तक मरते रहेंगे सड़क पर हम!

Updated at : 18 Nov 2017 4:39 AM (IST)
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कब तक मरते रहेंगे सड़क पर हम!

बेलगाम गाड़ियां. रफ्तार पर लगाम नहीं, हादसों पर विराम नहीं साहिबगंज : साहिबगंज की सड़क पर वाहन लेकर चलने वाले रफ्तार पर लगाम नहीं लगा रहे. जिसका परिणाम यह है कि हादसों पर विराम नहीं लग पा रहा. लोग इस बेलगाम रफ्तार के असमय काल के गाल में समा रहे हैं. आये दिन सड़का हादसों […]

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बेलगाम गाड़ियां. रफ्तार पर लगाम नहीं, हादसों पर विराम नहीं

साहिबगंज : साहिबगंज की सड़क पर वाहन लेकर चलने वाले रफ्तार पर लगाम नहीं लगा रहे. जिसका परिणाम यह है कि हादसों पर विराम नहीं लग पा रहा. लोग इस बेलगाम रफ्तार के असमय काल के गाल में समा रहे हैं. आये दिन सड़का हादसों में मरने वालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. थोड़ी गलती प्रशासन की भी है. कहीं भी यातायात पुलिस की तैनाती नहीं की गयी है. इस कारण तेज रफ्तार वाले बेखौफ चलते हैं. जिले में हर दिन औसतन एक व्यक्ति की मौत सड़क हादसे में हो रही है. मौत के बाद जाम लगाते हैं. लेकिन मौत के पहले हादसों पर विराम लगाने के बाबत ना तो लोग पहल करते ना ही प्रशासन.

हेलमेट नहीं पहनने की आदत

खासकर युवा चालक बाइक चलाते समय हेलमेट का उपयोग नहीं करते हैं. अपने फैशन के चलते बिना हेलमेट पहन कर वाहन चलाकर जान गंवाना पसंद करते हैं लेकिन हेलमेट पहनना पसंद नहीं करते. शायद अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते.

क्या कहते हैं एसपी

जिला के तमाम मुख्य सड़क व हाइवे पर पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था नहीं की गयी है. पिंक पेट्रोलिंग, सिटी पेट्रोलिंग की व्यवस्था जारी है. वहीं 100 डायल भी सुचारु रूप से संचालित है.

पी मुरूगन, एसपी, साहिबगंज.

शो रूम में मांगने वालों को मिलता है हेलमेट

बता दें कि जिले में जितने भी बाइक शोरूम हैं उसमें बाइक खरीदने वालों को हेलमेट देना अनिवार्य नहीं किया गया है. जो खरीदना चाहते हैं उसे ही हेलमेट दिया जाता है. जबकि परिवहन विभाग ने मानक तय किया है कि बाइक खरीदते समय हेलमेट अनिवार्य किया जाये. हीरो शो रूम के मैनेजर राकेश कुमार ने बताया कि हमारे यहां जो भी बाइक बिक्री की जाती है यथा संभव सभी को हेलमेट लेने की सलाह दी जाती है. वहीं यमाहा शो रूम के मालिक जयंत कुमार ने बताया कि यहां यह व्यवस्था है कि जो भी लोग मोटरसाइकिल खरीदते हैं उन्हें एक हेलमेट दिया ही जाता है.

ट्रैक्टरों ने बिगाड़ दिया यातायात

जिले में सैकड़ों ट्रैक्टर होंगे जिसे चलाने वाले ड्राइवर नहीं होते. ना तो उनके पास लाइसेंस होता है ना ही ट्रैक्टर पर सामान ढोने का रजिस्ट्रेशन. कृषि काम में उपयोग आने वाले ट्रैक्टर सामान ढोने में काम आ रहे और शहर के बीचों बीच इसका परिचालन होता है. जो सुगम यातायात के लिए बड़ा बाधक है.

वाहन चेकिंग का भी खौफ नहीं

एसपी के निर्देश पर जिला के तमाम थाना क्षेत्रों में वाहन चेकिंग किया जाता है. वाहन जब्त कर उनसे जुर्माना वसूल कर छोड़ दिया जाता है. लेकिन इस चेकिंग का डर लोगों में तनिक भी नहीं. पुलिस के लिये यह लोहे का चने चबाने के बराबर है.

एक माह में चार लोगों की मौत

जिला में सड़क हादसा पर लगाम लगाने में यातायात पुलिस फेल दिख रही है. बताया जाता है कि एक माह के अंदर करीब चार लोगो की मौत हादसा में हो चुकी है. सड़क हादसे में तो लोगों की जान तो चली जाती है लेकिन पुलिसिया व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर जाता है.

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