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सफलता के नये आयाम गढ़ रहीं आदिवासी महिलाएं, स्वरोजगार और हुनर से बनीं मिसाल

Updated at : 09 Aug 2025 1:09 PM (IST)
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World Tribal Day 2025 News Ranchi Jharkhand

विश्व आदिवासी दिवस : स्वावलंबी बन रही झारखंड में महिलाएं. फोटो : प्रभात खबर

World Tribal Day 2025: डिबडीह की सुषमा कुल्लू ने आदिवासी परिधानों और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए घर से ही आदिवासी साड़ियों का काम शुरू किया. मूल रूप से सिमडेगा की निवासी सुषमा के काम को इतनी सराहना मिली कि उन्होंने घर के पास एक छोटा सा बुटिक खोल लिया. यहां वह न केवल झारखंड, बल्कि असम की ट्राइबल साड़ियों को भी प्रमोट करती हैं.

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World Tribal Day 2025| रांची, लता रानी : झारखंड की आदिवासी महिलाएं मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास की बदौलत अपनी अलग पहचान बना रही हैं. स्वरोजगार से जुड़कर ये न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि अपने समुदाय को भी गौरवान्वित कर रही हैं. आदिवासी दिवस पर हम आपको ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं से रू-ब-रू करा रहे हैं. बरियातू की जुबली डारी कुजूर आदिवासियत की जीती-जागती मिसाल हैं. उनका मानना है कि राज्य या प्रांत कोई भी हो, हर आदिवासी को दूसरे आदिवासी को अपना मानना चाहिए, क्योंकि आदिवासियत ही हमारी असली पहचान है.

15 साल से रांची में हैं मणिपुर की जुबली डारी कुजूर

मूल रूप से मणिपुर की मिजोरम जनजाति से आनेवाली जुबली पिछले 15 वर्षों से रांची में रह रही हैं. पति डॉ एमएस कुजूर यूसीआइएल जादूगोड़ा में बतौर मेडिकल ऑफिसर सेवाएं दे रहे हैं. पेशे से स्किन एंड हेयर एनालिसिस एक्सपर्ट रहीं जुबली ने मातृत्व के दौरान करियर में ब्रेक लिया. फिर अपने अनुभव के बल पर रांची में फैमिली सैलून का नया कॉन्सेप्ट शुरू किया.

जुबली के सैलून में सभी कर्मचारी आदिवासी

खास बात यह कि उनके सैलून के सभी कर्मचारी आदिवासी हैं. जुबली को इस बात पर गर्व है और वह मानती हैं कि ब्यूटी सेक्टर में झारखंड के युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं. वह कहती हैं कि बड़े सपने देखें, एक्सपर्ट बनें और अपने राज्य की ताकत बनें. सफलता जरूर मिलेगी.

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सुषमा कुल्लू दे रहीं बुनकरों को नया मंच

डिबडीह की सुषमा कुल्लू ने आदिवासी परिधानों और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए घर से ही आदिवासी साड़ियों का काम शुरू किया. मूल रूप से सिमडेगा की निवासी सुषमा के काम को इतनी सराहना मिली कि उन्होंने घर के पास एक छोटा सा बुटिक खोल लिया. यहां वह न केवल झारखंड, बल्कि असम की ट्राइबल साड़ियों को भी प्रमोट करती हैं. उनकी साड़ियों की खासियत है कि ये सीधे बुनकरों के हाथ से तैयार होती हैं.

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लाल पाढ़ साड़ी की विशेष पहचान बना रहीं सुषमा

सुषमा झारखंड की लाल पाढ़ और सादे पढ़िया साड़ियों की विशेष पहचान बनाने में जुटी हैं. आदिवासी दिवस पर हर साल बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में लगने वाले मेले में उनकी खास मौजूदगी रहती है. उनका कहना है : युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहे, इसलिए मैंने पारंपरिक वस्त्रों के साथ अपनी पहचान बनायी. आदिवासी समाज के लोग भी इस क्षेत्र में आकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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