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2 आदिवासियों ने झारखंड का बढ़ाया मान, यूनेस्को में बने को-चेयरमैन

Updated at : 09 Aug 2025 7:20 AM (IST)
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डॉ सोना झरिया मिंज और डॉ एनाबेल बेंजामिन लकड़ा.

World Tribal Day 2025: सिदो कान्हू मुर्मू विवि दुमका की पूर्व कुलपति रह चुकी हैं. उनकी विशेषज्ञता गणित और कंप्यूटर साइंस में हैं. डॉ सोना झरिया मिंज आदिवासी ज्ञान, परंपरा, देशज अधिकार, संस्कृति, विरासत और भाषा पर शोध करेंगी. डॉ एनाबेल बेंजामिन बारा को यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय भाषा दशक (2022-2032) के लिए गठित आदिवासी भाषाओं के ग्लोबल टास्क फोर्स का सह अध्यक्ष बनाया गया है.

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World Tribal Day 2025| रांची, प्रवीण मुंडा : झारखंड की उपलब्धियों की सूची में नया अध्याय जुड़ गया है. पहली बार यहां के आदिवासी समुदाय के दो लोगों को यूनेस्को में अलग-अलग विषयों के लिए को-चेयर (सह अध्यक्ष) चुना गया है. इनमें पहली डॉ सोना झरिया मिंज हैं. उन्हें यूनेस्को के आदिवासी संबंधी शोध के लिए को-चेयर नियुक्त किया गया है. वहीं दूसरे व्यक्ति डॉ एनाबेल बेंजामिन बारा हैं.

जेएनयू में कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर हैं डॉ सोना

डॉ सोना झरिया मिंज को जून में आदिवासी संबंधी शोध के लिए सह अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी. वह साइमन फ्रेजर विश्वविद्यालय कनाडा की डॉ एमी पैरेंट के साथ आदिवासी संबंधी शोध के लिए यूनेस्को की को-चेयर चुनी गयी हैं. डॉ सोनाझरिया मिंज फिलहाल जवाहरलाल नेहरू विवि, नयी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर हैं.

सिदो कान्हू मुर्मू विवि दुमका की पूर्व कुलपति हैं सोना

सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका की पूर्व कुलपति रह चुकी हैं. उनकी विशेषज्ञता गणित और कंप्यूटर साइंस में हैं. डॉ सोना झरिया मिंज आदिवासी ज्ञान, परंपरा, देशज अधिकार, संस्कृति, विरासत और भाषा पर शोध करेंगी. उन्होंने कहा कि चूंकि वह कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर हैं, तो वे शोध में आधुनिक तकनीक और एआइ को भी शामिल करेंगी. इस शोध से आदिवासी समुदाय के मुद्दों और उनके आत्मनिर्णय के अधिकारों को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

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डॉ एनाबेल बेंजामिन का कार्यकाल 2027 तक होगा

दूसरे व्यक्ति गुमला के डॉ एनाबेल बेंजामिन बारा हैं. उन्हें यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय भाषा दशक (2022-2032) के लिए गठित आदिवासी भाषाओं के ग्लोबल टास्क फोर्स का सह अध्यक्ष बनाया गया है. उनका कार्यकाल वर्ष 2027 तक होगा.

लगातार दूसरी बार चुने गये डॉ एनाबेल बेंजामिन बारा

खास बात यह है कि डॉ बारा लगातार दूसरी बार यूनेस्को में सह अध्यक्ष चुने गये हैं. उनका पहला कार्यकाल 2022 से 2024 तक था. अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न देशों में आदिवासी भाषा को लेकर बनने वाले टास्क फोर्स के गठन में मदद की थी.

भाषाओं के डिजिटलीकरण पर भी करेंगे काम

इस बार वे भाषाओं के डिजिटलीकरण को लेकर भी काम करेंगे. इससे पहले डॉ बारा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा, संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन, संयुक्त राष्ट्र आदिवासी मुद्दों पर स्थायी मंच, आदिवासी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ तंत्र और आदिवासी लोगों का प्रतिनिधित्व किया है.

पहले कार्यकाल में डॉ बारा ने किया था ये काम

साथ ही आदिवासी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक के साथ बैठकें भी की हैं. अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने आदिवासी भाषाओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से पहल की.

World Tribal Day 2025: दिल्ली विवि में पढ़ाते हैं डॉ बारा

डॉ बारा ने भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में अतिरिक्त निजी सचिव और नयी दिल्ली में इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट में सामाजिक वैज्ञानिक के रूप में काम किया है. वे शिक्षक भी हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में बिजनेस एथिक्स, बिजनेस सस्टेनेबिलिटी, बिजनेस लॉ और उद्यमिता जैसे विषय पढ़ाते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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