बनते ही ढह गया था 32 करोड़ का जलमीनार, संवेदक पांच साल के लिए ब्लैक लिस्ट

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पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने जीवन मिशन के तहत मेदिनीनगर में 32 करोड़ की गादी खास-कजरी ग्रामीण जलापूर्ति योजना को लेकर वासू गांव में निर्मित जलमीनार बनते ही ढह जाने के मामले को गंभीरता से लिया है.

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रांची. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने जीवन मिशन के तहत मेदिनीनगर में 32 करोड़ की गादी खास-कजरी ग्रामीण जलापूर्ति योजना को लेकर वासू गांव में निर्मित जलमीनार बनते ही ढह जाने के मामले को गंभीरता से लिया है. विभाग ने इस मामले में ठेकेदार मेसर्स सूरज देव सिंह एंड सन्स के कार्यों को निम्न गुणवत्ता का बताते हुए तत्काल प्रभाव से पांच वर्षों के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया है. साथ ही संवेदक निबंधन नियमावली के तहत संवेदक द्वारा कराये जा रहे सभी कार्यों को निर्गत आदेश की तिथि से बंद करते हुए समस्त कार्यों की जमानत राशि जब्त करने का निर्णय लिया है. साथ ही संवेदक द्वारा कराये जा रहे शेष कार्यों को पूरा करने के लिए संबंधित क्षेत्रीय मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता व कार्यपालक अभियंता को आवश्यकतानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा संवेदक के विभाग में सभी श्रेणी में निबंधन को भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है.

30 मार्च को ढह गया था जलमीनार, अभियंता प्रमुख के पीत पत्र पर हुई कार्रवाई

गादी खास-कजरी ग्रामीण जलापूर्ति योजना को लेकर वासू गांव में निर्मित जलमीनार 30 मार्च 2024 को ढह गया था. इसके बाद 25 अप्रैल को अभियंता प्रमुख व विभागीय सचिव के प्रधान आप्त सचिव ने पीत पत्र लिख कर इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. इसके बाद सीडीओ ने संवेदक से नौ मई 2024 को स्पष्टीकरण मांगा था. संवेदक के स्पष्टीकरण के बाद मुख्य अभियंता स्तर की दो सदस्यीय जांच समिति ने विभाग में प्रतिवेदन सौंप कर बताया था कि सीडीओ द्वारा अनुमोदित डिजाइन व ड्राइंग के अनुरूप कार्य नहीं किया गया है.

संवेदक ने अपने खर्च पर निर्माण करने की दी सूचना, विभाग ने बताया अनुचित

संवेदक ने इस कार्य को राज्यहित व जनहित का बताते हुए अपने खर्च पर तीन माह के अंदर पूरा कराने की सूचना दी थी, जिसे विभाग ने अनुचित बताया था. कहा था कि उनके द्वारा बिना विभागीय आदेश के पुन: निर्माण कराना कदापि अनुचित है. जलमीनार गिरने के बाद विभागीय जांच के लिए कमेटी बनायी गयी. संवेदक का यह कृत्य अपने गलत कार्यों को छिपाने का प्रयास था. समीक्षा क्रम में संवेदक का कार्य निम्न गुणवत्ता का पाया गया.

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