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Education News समय से प्रोन्नति नहीं मिलने पर झारखंड छोड़ रहे हैं विवि शिक्षक

Updated at : 01 Jan 2025 12:31 AM (IST)
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Education News समय से प्रोन्नति नहीं मिलने पर झारखंड छोड़ रहे हैं विवि शिक्षक

झारखंड में छात्रों के पलायन के साथ-साथ अब विवि व महाविद्यालय के शिक्षक भी पलायन कर रहे हैं. ये शिक्षक वर्षों से प्रोन्नति नहीं मिलने के कारण राज्य के बाहर के विवि में योगदान कर वहां प्रोन्नत हो रहे हैं.

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रांची (संजीव सिंह). झारखंड में छात्रों के पलायन के साथ-साथ अब विवि व महाविद्यालय के शिक्षक भी पलायन कर रहे हैं. ये शिक्षक वर्षों से प्रोन्नति नहीं मिलने के कारण राज्य के बाहर के विवि में योगदान कर वहां प्रोन्नत हो रहे हैं. स्थिति यह हो गयी है कि झारखंड के विवि व महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर योगदान करने के बाद शिक्षक इसी पद से ही सेवानिवृत्त हो जा रहे हैं. वर्ष 1996 बैच के कई शिक्षक प्रोन्नति की आस देख रहे हैं, तो वर्ष 2008 में नियुक्त शिक्षक भी अब तक प्रोन्नति नहीं मिलने से क्षुब्ध हैं. वर्ष 2008 में नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर को स्टेज वन, स्टेज टू पार करने के बाद एसोसिएट प्रोफेसर बनना है, लेकिन अब तक ये शिक्षक स्टेज वन भी पार नहीं कर पाये हैं. शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए यूजीसी एक्ट 2009 को झारखंड में लागू करने में लगभग 12 साल लग गये हैं. इसी प्रकार यूजीसी एक्ट 2018 को भी लागू कराने में लगभग चार साल लग गये, लेकिन शिक्षकों को अब तक फायदा नहीं हो रहा है. विवि से प्रोन्नति के लिए शिक्षकों के नाम झारखंड लोक सेवा आयोग को भेजे कई साल हो गये, लेकिन प्रोन्नति नहीं मिल पायी. शिक्षक राज्य सरकार, विवि, जेपीएससी से लेकर कुलाधिपति तक गुहार लगा आये, लेकिन स्थिति जस की तस है. जेपीएससी ने सीबीआइ से क्लियरेंस लेने की आस में 2008 बैच के शिक्षकों की प्रोन्नति रोक रखी है.

2008 में असिस्टेंट प्रोफेसर थे, दूसरे विवि जाने पर प्रोफेसर बन गये

राज्य के विवि के कई ऐसे शिक्षक हैं, जो 2008 में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में योगदान दिये, लेकिन प्रोन्नति नहीं मिलने पर राज्य से बाहर अन्य विवि में इंटरव्यू देकर चले गये. आज वे वहां एसोसिएट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर तक बन गये हैं. जबकि समान बैच के शिक्षक यहां अभी असिस्टेंट प्रोफेसर ही हैं. जो शिक्षक अन्य विवि में गये उनमें रत्नेश विश्वकसेन (सीयूजे), वीरेंद्र कुमार व अनुराग त्रिपाठी (इलाहाबाद विवि), धर्मेंद्र कुमार पाठक, रवींद्र पाठक, रवींद्र कुमार सिंह व सुमित कुमार (सेंट्रल विवि बिहार), शिखा सिंह व अश्विनी कुमार सिंह (बनारस हिंदू विवि), प्रसून दत्त सिंह (महात्मा गांधी सेंट्रल विवि), स्मृति सिंह (आइआइटी पटना) व गुलाम सरवर खान (अलीगढ़ विवि) शामिल हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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