प्रतिनिधि, नामकुम. टाटीसिलवे के इइएफ मैदान में चल रहे श्रीमदभागवत कथा के सातवें दिन इंद्रेश जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला, रास लीला व उनकी दिव्य महिमा का वर्णन किया. उन्होंने श्रीकृष्ण की महिमा को समझने और उनके जीवन के मूल्यों को अपनाने की बात कही. कहा जीवन में दिशा व दीक्षा शब्द बहुत ही महत्वपूर्ण हैं. जीवन में दिशा का महत्व अपने लक्ष्यों की ओर ले जाने के लिए है. वहीं जीवन में दीक्षा का महत्व हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करना है. इंद्रेश जी महाराज ने कहा कि जीवन में गुरु का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है. वे हमें जीवन के सही रास्ते पर चलने के लिए मार्गदर्शन करते हैं. लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ज्ञान व कौशल प्रदान करते हैं. रास शब्द का अर्थ है प्रेम या प्रेम की लीला. भागवत कथा में रास का उल्लेख भगवान कृष्ण की प्रेम लीलाओं के संदर्भ में किया जाता है. भगवान राम से जुड़ी बातों को बताते हुए शरद पूर्णिमा को भगवान कृष्ण की रास लीला के साथ जोड़कर देखा जाता है, जो भगवान कृष्ण की प्रेम लीलाओं का प्रतीक है. भागवत कथा के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को भगवान कृष्ण ने अपनी रास लीला का आयोजन किया था. जिसमें उन्होंने गोपियों के साथ प्रेम की भावना को व्यक्त किया था. भागवत कथा का समापन शनिवार को होगा. महाराज जी रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाने के बाद भक्तों संग भक्तिमय होली उत्सव मनायेंगे. भक्तों के बीच जाकर पुष्पों की होली खेलेंगे.
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