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‘राजगीर मॉडल’ पर पलामू में बनेगा झारखंड का पहला टाइगर सफारी

Updated at : 13 Jul 2025 3:49 PM (IST)
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tiger safari in palamu jharkhand

पलामू में पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा. फोटो : प्रभात खबर

Tiger Safari in Jharkhand: झारखंड में भी पर्यटकों को टाइगर सफारी का आनंद मिलेगा. सरकार इसकी तैयारी में जुट गयी है. बिहार के राजगीर मॉडल पर यहां सफारी की शुरुआत की जायेगी. पलामू जिले के पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में इसकी शुरुआत की जायेगी. इसके लिए पीटीआर ने जगह चिह्नित कर ली है. कितने बड़े क्षेत्र में टाइगर सफारी होगा और इस पर कितना खर्च होगा, यहां पढ़ें.

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Tiger Safari in Jharkhand: झारखंड में बिहार के ‘राजगीर मॉडल’ पर टाइगर सफारी शुरू होगा. झारखंड के पहले टाइगर सफारी की शुरुआत पलामू में होगी. इस टाइगर सफारी की स्थापना के लिए बिहार के ‘राजगीर मॉडल’ को अपनाने का निर्णय लिया है. कभी माओवाद से प्रभावित रहे पलामू क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है.

Tiger Safari: पलामू टाइगर रिजर्व में अभी हैं 5 बाघ

एक अधिकारी ने बताया कि पलामू बाघ अभयारण्य (पीटीआर) में फिलहाल 5 बाघ हैं. उन्होंने कहा कि पलामू बाघ अभयारण्य में टाइगर सफारी विकसित करने के लिए राजगीर मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया गया है. प्रस्ताव को पहले राज्य वन्यजीव बोर्ड मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. इसके बाद इसे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को स्वीकृति के लिए भेजा जायेगा.’

150 हेक्टेयर भूमि में बनेगा टाइगर सफारी

पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश जेना ने बताया कि सफारी के लिए कम से कम 150 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी. उन्होंने कहा कि राजगीर सफारी देश के पहले सफल मॉडलों में एक है. वहां कांच का पुल जैसे कई आकर्षण हैं, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई और क्षेत्र को सतत आर्थिक विकास का मॉडल मिला. हम उसी मॉडल को अपनाना चाहते हैं.

टाइगर सफारी की लागत करीब 250 करोड़ रुपए होगी

यह प्रस्ताव शनिवार को झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार की अध्यक्षता में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई बैठक में पेश किया गया. इस परियोजना की लागत करीब 250 करोड़ रुपए आंकी गयी है.

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1129 वर्ग किलोमीटर में फैला है पलामू बाघ अभयारण्य

पलामू बाघ अभ्यारण्य 1,129 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसमें से 414.08 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया और 715.85 वर्ग किलोमीटर बफर जोन है. बफर जोन में से 53 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुला है.

टाइगर रिजर्व के लिए पुटूगढ़ क्षेत्र में चिह्नित हुई है भूमि

जेना ने बताया कि सफारी के लिए भूमि की पहचान रिजर्व के पुटूगढ़ क्षेत्र में की गयी है. यह परियोजना सभी मानकों के पालन के साथ स्थापित की जायेगी. उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र वर्षों से नक्सल प्रभावित और पिछड़ा रहा है, जहां रोजगार के अवसर नगण्य रहे हैं.

पर्यटन के जरिये क्षेत्र को मिलेगी आर्थिक मजबूती – जेना

डिप्टी डायरेक्टर जेना ने कहा कि यह टाइगर सफारी केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन के जरिये क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का जरिया बनेगी. राज्य सरकार ने 400 साल पुराने पलामू किले के पुनरोद्धार और पलामू के पास स्थित कमलदीह झील के सौंदर्यीकरण के लिए एक अलग प्रस्ताव तैयार करने का भी निर्णय लिया है, ताकि क्षेत्र का समग्र विकास किया जा सके.

पर्यटन मंत्री ने एमएस से खेल-पर्यटन विकास पर की चर्चा

पर्यटन, कला, संस्कृति और खेल राज्य मंत्री सुदिव्य कुमार ने शनिवार को पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से मुलाकात की और राज्य में खेल व पर्यटन विकास को लेकर चर्चा की. उन्होंने कहा, ‘धोनी जी का अनुभव झारखंड में खेल और पर्यटन को नयी दिशा और ऊंचाइयों तक ले जा सकता है. राज्य सरकार को पूर्ण विश्वास है कि वह सहयोग करेंगे.’

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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