Ranchi News : छोटानागपुर के पहले गिरजाघर में गूंजा ऐतिहासिक पाइप ऑर्गन

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 23 Dec 2025 6:19 PM

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छोटानागपुर का पहला गिरजाघर क्राइस्ट चर्च है, जिसे जीइएल चर्च के नाम से भी जाना जाता है.

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वर्ष 1851 में स्थापित रांची के क्राइस्ट चर्च में जर्मन मिशन की ओर से प्रदत्त पाइप ऑर्गन से क्रिसमस पर बिखरी सुरीली ध्वनियां

प्रवीण मुंडा, रांची

छोटानागपुर का पहला गिरजाघर क्राइस्ट चर्च है, जिसे जीइएल चर्च के नाम से भी जाना जाता है. इस गिरजाघर की नींव 18 नवंबर 1851 को रखी गयी थी. इसके निर्माण में चार वर्ष लगे और वर्ष 1855 में इसका निर्माण पूरा हुआ. निर्माण पूरा होने के बाद पहली बार 24 दिसंबर 1855 को यहां पुण्यरात (क्रिसमस) की आराधना हुई. हालांकि उस समय गिरजाघर का औपचारिक रूप से संस्कार नहीं हुआ था. जनवरी 1856 में गिरजाघर का विधिवत संस्कार संपन्न हुआ. गिरजाघर में प्रवेश करते ही जो पहला गीत गाया गया था, उसके बोल थे : “ईश्वर को अत्यंत ऊंचे पर हो धन्यवाद-प्रशंसा, कि उसकी कृपा है अपार, हम होंगे न विनाशा.”

ईश्वर की स्तुति के इस गीत के साथ गिरजाघर में लगा पाइप ऑर्गन भी बजा, जिसकी उस समय कीमत तीन हजार रुपये थी. यह छोटानागपुर का पहला पाइप ऑर्गन था. हालांकि 1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान इस पाइप ऑर्गन को तोड़ दिया गया. कुछ वर्ष पहले एक बार फिर गिरजाघर में पाइप ऑर्गन लगाया गया. यह पाइप ऑर्गन जर्मन मिशन की ओर से प्रदान किया गया था और नवंबर 2014 में क्राइस्ट चर्च में स्थापित किया गया. वर्तमान में विशेष अवसरों पर आराधना के दौरान इस पाइप ऑर्गन को बजाया जाता है.

क्यों खास है यह पाइप ऑर्गन

पाइप ऑर्गन एक विशेष वाद्य यंत्र है, जिसे ‘किंग ऑफ इंस्ट्रूमेंट्स’ कहा जाता है. इसका कीबोर्ड पियानो की तरह होता है, जबकि इसमें लगे पाइप एक छोटे कमरे जितनी जगह में लगे होते हैं. कीबोर्ड दबाने पर एक विशेष तकनीक से हवा इन पाइपों से होकर गुजरती है और अत्यंत सुरीली ध्वनि निकलती है. ये पाइप अलग-अलग आकार के होते हैं. सबसे छोटी पाइप 15 सेंटीमीटर की है, जबकि सबसे बड़ी पाइप 16 फीट लंबी है. इन पाइपों से बेहद महीन से लेकर भारी आवाज तक निकल सकती है. जब इसे लय के साथ बजाया जाता है तो इसका संगीत अत्यंत मनमोहक होता है और दूर तक सुनाई देता है.

साफ-सफाई में लगे थे दो सप्ताह

हाल ही में इस पाइप ऑर्गन की साफ-सफाई की गयी. अत्यंत सावधानी के साथ एक-एक पाइप को निकालकर विशेष लिक्विड से साफ किया गया. इस पूरी प्रक्रिया में दो सप्ताह से अधिक समय लगा. अब इस ख्रीस्त जयंती पर एक बार फिर पाइप ऑर्गन की सुरीली ध्वनियों के साथ जन्मपर्व का संगीत गिरजाघर में गूंज रहा है.

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