शिबू सोरेन ने की थी आदिवासियों को हड़िया-दारू के जाल से निकालने की पहल

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शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने पहुंचे पीएम मोदी. इनसेट में शिबू सोरेन की पुरानी तस्वीर.

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Shibu Soren: अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन करने वाले और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने आदिवासियों को हड़िया-दारू के चंगुल से मुक्त कराने के लिए पूरे झारखंड में अभियान चलाया था. नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका अभियान धनबाद के टुंडी और संताल परगना तक पहुंचा. इसके बाद ही शिबू सोरेन दिशोम गुरु शिबू सोरेन बने.

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Shibu Soren| रांची, सुनील चौधरी : 27 अगस्त 2008 को जब मुख्यमंत्री के रूप में शिबू सोरेन ने पहली कैबिनेट की बैठक की थी, तब उन्होंने आदिवासियों को हड़िया-दारू के जाल से मुक्त कराने की पहल की थी. उन्होंने कहा था कि इन्हें वैकल्पिक रोजगार दिया जाना चाहिए. आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उसी पहल को आगे बढ़ाते हुए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना शुरू की. इसके तहत सड़क पर हड़िया बेचने वाली महिलाओं को रोजगार के अवसर दिये जा रहे हैं. आज हजारों महिलाएं इस योजना के तहत स्वरोजगार अपना कर बेहतर जीवन-यापन कर रही हैं.

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गरीबी मिटाना मुख्य लक्ष्य था

शिबू सोरेन ने पहली कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि गरीबों पर विशेष ध्यान देना चाहते हैं. उन्होंने लाल कार्ड, जनवितरण प्रणाली, सड़क, मनरेगा व पलायन जैसी बुनियादी बातों को दुरुस्त करने की अपनी योजना बतायी. उन्होंने मुख्य सचिव को अपने पहले निर्देश में ही सड़क पर हड़िया-दारू बेचनेवालों को वैकल्पिक रोजगार मुहैया कराने का निर्देश दिया था. उन्होंने कहा कि था कि आदिवासी कहते हैं कि हड़िया-दारू पीना हमारी संस्कृति है. पर भाई पीकर सड़क पर लुढ़क जाना और गाड़ी के नीचे दब जाना कहां की संस्कृति है?

पलायन पर जतायी थी चिंता

शिबू सोरेन ने पलायन पर चिंता जताते हुए कहा था कि इसके लिए ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है. वह सिंचाई पर जोर देते हुए एक ही साल में दो से तीन फसल कैसे उत्पादित हो, इस पर विचार करते थे. वह कहते थे कि गांवों में योजनाओं को लागू करके ही बेरोजगारी दूर की जा सकती है.

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नक्सलवाद का कारण बेरोजगारी

वर्ष 2008 में झारखंड में नक्सल चरम पर था. श्री सोरेन ने कहा था कि बेरोजगारी के कारण ही नक्सलवाद की समस्या है. झारखंड में वह नक्सलियों से बातचीत कर समाधान निकालेंगे.

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टाटा को नैनो कार फैक्ट्री लगाने के लिए दिया था आमंत्रण

शिबू ने मीडिया से कहा था कि उद्योग जगत को भयभीत नहीं होना है. राज्य के विकास के लिए इनका स्वागत है. इनकी सारी बाधाओं को दूर किया जायेगा. शिबू ने टाटा को नैनो कार का प्लांट झारखंड में लगाने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा कि टाटा झारखंडी कंपनी है. इसे दूसरे राज्य में जाने की जरूरत नहीं है.

बिहार बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ एक माह की सैलरी दी थी

वर्ष 2008 में बिहार में बाढ़ से लोग काफी प्रभावित हुए थे. मुख्यमंत्री रहते हुए शिबू सोरेन ने अपनी एक माह की सैलरी दान कर दी तथा राज्य सरकार की ओर से बिहार बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ 10 करोड़ रुपये भी भेजे थे. वहीं, अनाज व वस्त्र से भरे ट्रक को उन्होंने खुद ही झंडी दिखाकर बिहार भेजा था. उन्होंने देशभर में बिहार के लोगों के लिए मदद की मांग की थी. शिबू ने तब कहा था कि हम भले ही अलग राज्य हैं. पर बिहार हमारा भाई रहा है. उसके दुख में एक भाई साथ नहीं देगा, तो कौन देगा.

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