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शिबू सोरेन ने की थी आदिवासियों को हड़िया-दारू के जाल से निकालने की पहल

Updated at : 04 Aug 2025 4:04 PM (IST)
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शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने पहुंचे पीएम मोदी. इनसेट में शिबू सोरेन की पुरानी तस्वीर.

Shibu Soren: अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन करने वाले और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने आदिवासियों को हड़िया-दारू के चंगुल से मुक्त कराने के लिए पूरे झारखंड में अभियान चलाया था. नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका अभियान धनबाद के टुंडी और संताल परगना तक पहुंचा. इसके बाद ही शिबू सोरेन दिशोम गुरु शिबू सोरेन बने.

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Shibu Soren| रांची, सुनील चौधरी : 27 अगस्त 2008 को जब मुख्यमंत्री के रूप में शिबू सोरेन ने पहली कैबिनेट की बैठक की थी, तब उन्होंने आदिवासियों को हड़िया-दारू के जाल से मुक्त कराने की पहल की थी. उन्होंने कहा था कि इन्हें वैकल्पिक रोजगार दिया जाना चाहिए. आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उसी पहल को आगे बढ़ाते हुए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना शुरू की. इसके तहत सड़क पर हड़िया बेचने वाली महिलाओं को रोजगार के अवसर दिये जा रहे हैं. आज हजारों महिलाएं इस योजना के तहत स्वरोजगार अपना कर बेहतर जीवन-यापन कर रही हैं.

गरीबी मिटाना मुख्य लक्ष्य था

शिबू सोरेन ने पहली कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि गरीबों पर विशेष ध्यान देना चाहते हैं. उन्होंने लाल कार्ड, जनवितरण प्रणाली, सड़क, मनरेगा व पलायन जैसी बुनियादी बातों को दुरुस्त करने की अपनी योजना बतायी. उन्होंने मुख्य सचिव को अपने पहले निर्देश में ही सड़क पर हड़िया-दारू बेचनेवालों को वैकल्पिक रोजगार मुहैया कराने का निर्देश दिया था. उन्होंने कहा कि था कि आदिवासी कहते हैं कि हड़िया-दारू पीना हमारी संस्कृति है. पर भाई पीकर सड़क पर लुढ़क जाना और गाड़ी के नीचे दब जाना कहां की संस्कृति है?

पलायन पर जतायी थी चिंता

शिबू सोरेन ने पलायन पर चिंता जताते हुए कहा था कि इसके लिए ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है. वह सिंचाई पर जोर देते हुए एक ही साल में दो से तीन फसल कैसे उत्पादित हो, इस पर विचार करते थे. वह कहते थे कि गांवों में योजनाओं को लागू करके ही बेरोजगारी दूर की जा सकती है.

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नक्सलवाद का कारण बेरोजगारी

वर्ष 2008 में झारखंड में नक्सल चरम पर था. श्री सोरेन ने कहा था कि बेरोजगारी के कारण ही नक्सलवाद की समस्या है. झारखंड में वह नक्सलियों से बातचीत कर समाधान निकालेंगे.

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टाटा को नैनो कार फैक्ट्री लगाने के लिए दिया था आमंत्रण

शिबू ने मीडिया से कहा था कि उद्योग जगत को भयभीत नहीं होना है. राज्य के विकास के लिए इनका स्वागत है. इनकी सारी बाधाओं को दूर किया जायेगा. शिबू ने टाटा को नैनो कार का प्लांट झारखंड में लगाने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा कि टाटा झारखंडी कंपनी है. इसे दूसरे राज्य में जाने की जरूरत नहीं है.

बिहार बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ एक माह की सैलरी दी थी

वर्ष 2008 में बिहार में बाढ़ से लोग काफी प्रभावित हुए थे. मुख्यमंत्री रहते हुए शिबू सोरेन ने अपनी एक माह की सैलरी दान कर दी तथा राज्य सरकार की ओर से बिहार बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ 10 करोड़ रुपये भी भेजे थे. वहीं, अनाज व वस्त्र से भरे ट्रक को उन्होंने खुद ही झंडी दिखाकर बिहार भेजा था. उन्होंने देशभर में बिहार के लोगों के लिए मदद की मांग की थी. शिबू ने तब कहा था कि हम भले ही अलग राज्य हैं. पर बिहार हमारा भाई रहा है. उसके दुख में एक भाई साथ नहीं देगा, तो कौन देगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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