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सरना धर्मकोड की मांग पर धरना से पहले कांग्रेस ने कहा- केंद्र की मोदी सरकार आदिवासी विरोधी

Updated at : 24 May 2025 6:18 PM (IST)
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प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने से पहले पत्रकारों का जोहार करते सांसद सुखदेव भगत.

Sarna Code: सुखदेव भगत ने कहा कि आदिवासी प्रकृति के पुजारी हैं. पूरे देश में आदिवासियों की जनसंख्या 15 करोड़ है. 40 लाख जैन धर्मावलंबी, 80 लाख बौद्ध धर्मावलंबी, 2 करोड़ सिख समुदाय की आबादी है. ये अल्पसंख्यक हैं. इनके लिए अलग धर्म का कॉलम है, लेकिन विडंबना है कि सरकार ने प्रकृति पूजक आदिवासियों की धार्मिक पहचान, आस्था और परंपरा को गौण कर दिया है.

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Sarna Code: सरना धर्म कोड की मांग पर राजभवन के समक्ष आंदोलन से एक दिन पहले शनिवार को कांग्रेस पार्टी ने इसी मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस अवसर पर लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत और झारखंड विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता राजेश कच्छप ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला. सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि सरकार पशुओं की गणना करती है. बाघ की गणना करती है, लेकिन केंद्र सरकार आदिवासियों को धार्मिक आधार पर पहचान नहीं देना चाहती. सरकार हमारे पाहन, पुजार, धर्मस्थल को महत्व नहीं देना चाहती. आदिवासियों के प्रति घृणा का भाव रखती है.

आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रही केंद्र सरकार – सुखदेव भगत

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुखदेव भगत ने कहा कि केंद्र सरकार आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है. जनगणना लगातार होती रही है, जनगणना फॉर्म के कॉलम में अन्य धर्म का कॉलम था, जिसमें 90 लाख लोगों ने इस विकल्प को चुना था. इसमें 50 लाख ने सरना धर्म लिखा था. लेकिन, सुनियोजित षड्यंत्र के तहत आदिवासियों के धार्मिक अस्तित्व को मिटाने के लिए इस बार अन्य का कॉलम हटा दिया गया है.

आदिवासियों की धार्मिक पहचान, आस्था और परंपरा को कर दिया गौण – कांग्रेस

सुखदेव भगत ने कहा कि आदिवासी प्रकृति के पुजारी हैं. पूरे देश में आदिवासियों की जनसंख्या 15 करोड़ है. 40 लाख जैन धर्मावलंबी, 80 लाख बौद्ध धर्मावलंबी, 2 करोड़ सिख समुदाय की आबादी है. ये अल्पसंख्यक हैं. इनके लिए अलग धर्म का कॉलम है, लेकिन विडंबना है कि सरकार ने प्रकृति पूजक आदिवासियों की धार्मिक पहचान, आस्था और परंपरा को गौण कर दिया है.

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कांग्रेस ने 2014 में किया था सरना कोड देने का वादा

कांग्रेस ने वर्ष 2014 के घोषणा पत्र में सरना धर्म कोड देने का वादा किया था. कांग्रेस इसके लिए संवेदनशील है. सरना धर्मकोड के बारे में झारखंड विधानसभा में उन्होंने प्रश्न किया, तो तत्कालीन भाजपा सरकार खामोश रही. 22 जुलाई 2024 को संसद में सवाल किया, तो सरकार चुप है. सुखदेव भगत ने कहा कि सरकार कुंभकर्णी नींद में सोयी है. सबका साथ सबका विकास की बात करने वाली भाजपा सरकार आदिवासियों का विनाश चाहती है. भाजपा आदिवासी को वनवासी कहती है. सांसद ने कहा कि सरना धर्मकोड के लिए संघर्ष जारी रहेगा.

राहुल गांधी ने भाजपा को जातिगत जनगणना के लिए किया मजबूर – राजेश कच्छप

कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप ने कहा कि देश में जातिगत जनगणना की मांग करने पर भाजपा कहती थी कि जो जाति की बात करेगा, उसे लात मिलेगी, लेकिन कांग्रेस के संघर्ष और राहुल गांधी के अडिग नेतृत्व ने भाजपा सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया. विपक्ष की ताकत के चलते जातिगत जनगणना होगी. अगर देश में जातिगत जनगणना होगी, तो उसके पूर्व आदिवासियों को अलग सरना धर्म कोड आवंटित करना होगा. उन्होंने कहा कि अगर सही से जनगणना होगी, तो देश में आदिवासियों की संख्या 15 करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है.

सोची-समझी साजिश के तहत अन्य कॉलम को हटाया गया – कच्छप

राजेश कच्छप ने कहा कि सोची-समझी साजिश के तहत भाजपा द्वारा कुचक्र चलाया गया और अन्य का कॉलम हटा दिया गया. भाजपा को देश के आदिवासी कभी माफ नहीं करेंगे. झारखंड सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड बिल पास करके केंद्र के पास भेजा है, लेकिन जान-बूझकर केंद्र सरकार इसे लागू नहीं करना चाहती है. उन्होंने कहा कि सरना धर्म कोड के लिए संघर्ष जारी रहेगा. अगर धर्मकोड लागू नहीं हुआ, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक भाजपा नेताओं को बेनकाब करेगी.

वर्षों से जारी है सरना कोड का संघर्ष – जयप्रकाश गुप्ता

पूर्व विधायक जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि सरना धर्मकोड की लड़ाई नयी नहीं है. कई वर्षों से संघर्ष जारी है. सिर्फ झारखंड ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान के आदिवासी अपनी धार्मिक पहचान चाहते हैं. 5 वर्ष से केंद्र सरकार सरना कोड बिल को दबाये बैठी है. सरना कोड लागू करने के लिए किसी प्रकार के संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं है, किसी फंड की आवश्यकता नहीं है. सिर्फ कैबिनेट के निर्णय की आवश्यकता है, फिर भी केंद्र करना नहीं चाहती. आदिवासियों के प्रति उनकी नीयत अच्छी नहीं है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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