नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की तिथि से तय होगा वेतनमान, प्रशासनिक देरी के लिए कर्मचारी दोषी नहीं : हाइकोर्ट

Published by : Priya Gupta Updated At : 24 May 2026 1:51 PM

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झारखंड हाईकोर्ट की तस्वीर

Jharkhand News: झारखंड हाइकोर्ट ने कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि वेतनमान और सेवा शर्तें नियुक्ति पत्र की तारीख नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तिथि से तय होंगी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से सतीश कुमार की रिपोर्ट

Jharkhand News: झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों के हक में दूरगामी फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी का वेतनमान और सेवा शर्तें उसके औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी होने की तारीख से नहीं, बल्कि उस विज्ञापन और चयन प्रक्रिया की तारीख से तय होंगी जिसके तहत भर्ती शुरू की गई थी. 

प्रशासनिक देरी का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना पड़ेगा

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दुमका और जामताड़ा जिले के जनसेवकों (ग्राम सेवक) से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि प्रशासनिक देरी या लेती-लतीफी के कारण अगर किसी उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र देर से मिलता है, तो उसे इसके लिए दंडित नहीं किया जा सकता. उम्मीदवारों को एक ही विज्ञापन और एक ही मेधा सूची (पैनल) से चुने जाने के बावजूद सिर्फ अलग-अलग चरणों में नियुक्ति पत्र मिलने के आधार पर दो अलग-अलग वेतनमानों में बांटना पूरी तरह से असंवैधानिक और समानता के अधिकार का उल्लंघन है. 

ग्रेड पे घटाने का आदेश रद्द, सभी लाभ देने का निर्देश

अदालत ने जिला प्रशासन के आदेश (ज्ञापांक 289) को खारिज कर दिया है, जिसके तहत कर्मियों का ग्रेड पे घटाया गया था. अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को 1990 और 1996 में नियुक्त उनके समकक्ष कर्मियों के समान ही 4000-6000 रुपये का प्रतिस्थापन वेतनमान, एरियर, वरिष्ठता और एमएसीपी के तमाम परिणामी लाभ प्रदान किए जाए.

क्या है मामला ? 

यह मामला वर्ष 1987 में जारी विज्ञापन संख्या 26/87 से जुड़ा है, जिसके तहत दुमका समेत अन्य जिलों में जनसेवकों की बहाली के लिए 1988 में मेधा सूची तैयार की गयी थी. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले दो चरणों के उम्मीदवारों को क्रमशः 1990 और 1996 में नियुक्त कर दिया गया. प्रशासनिक कारणों से याचिकाकर्ता विश्वनाथ सिंघा रॉय और संजीत गोराई समेत अन्य को नवंबर 1999 में नियुक्ति पत्र दिया गया. इसी बीच आठ फरवरी 1999 को वित्त विभाग ने संकल्प संख्या 660 जारी कर नए वेतनमान लागू कर दिए थे. जिला प्रशासन ने याचिकाकर्ताओं को नए कर्मी (न्यू रिक्रूट) मानकर उनका वेतनमान 4000-6000 से घटाकर 3200-4900 रुपये कर दिया, जबकि उनके साथ परीक्षा पास करने वाले वरिष्ठ कर्मी पुराना उच्च वेतनमान पाते रहे. बाद में इसी आधार पर उनकी एमएसीपी और ग्रेड पे में भी कटौती कर दी गई.

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Priya Gupta

लेखक के बारे में

By Priya Gupta

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.

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