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चाचा के साथ धुर्वा बाजार गया नामकुम का अजय टोप्पो कैसे पहुंचा बांग्लादेश? 11 साल बाद घर लौटा

Updated at : 25 Jun 2025 10:07 PM (IST)
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Ranchi News: Namkoms Ajay Toppo Returns After 11 Years

नामकुम थाना के बाहर परिजनों के साथ अजय टोप्पो.

Ranchi News: वर्ष 2014 में अजय अपने चाचा के साथ धुर्वा बाजार गया था. यहीं वह भटककर बॉर्डर पार बांग्लादेश पहुंच गया. थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि विशेष शाखा की सूचना पर छानबीन की गयी, तो पता चला कि वर्ष 2014 से अजय लापता है. उसके माता-पिता का देहांत हो चुका है. फोटो व अन्य साक्ष्य लेकर झारखंड पुलिस परिजनों को लेकर बंगाल गयी और वहां से अजय को लेकर आयी.

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Ranchi News | नामकुम (रांची), राजेश वर्मा : ग्यारह (11) साल पहले चाचा के साथ धुर्वा बाजार गया था. चाचा से बिछड़ गया और वह न जाने किस तरह बांग्लादेश पहुंच गया. परिवार के लोग इधर-उधर तलाशते रहे, लेकिन वह नहीं मिला. 11 साल बाद जब वह अपने घर लौटा, तो परिवार के लोगों के चेहरे खिल उठे. ये कहानी है नामकुम के राजाउलातू पंचायत के सिंजु सेरेंग गांव के अजय टोप्पो की.

करीब 10 साल बाद बांग्लादेश के जेल से बाहर आया अजय

मानसिक रूप से कमजोर अजय टोप्पो भटककर बांग्लादेश पहुंच गया. वहां बंगलादेश की पुलिस ने पकड़कर जेल में डाल दिया. 9-10 साल तक जेल में रहने के बाद वहां की अदालत ने उसे रिहा कर दिया. वर्ष 2024 में उसकी रिहाई हुई. इसके बाद अजय और एक अन्य युवक को बांग्लादेश की पुलिस ने पश्चिम बंगाल के 24 परगना बॉर्डर के पास छोड़ दिया.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की चिट्ठी मिलने के बाद सक्रिय हुई झारखंड पुलिस

रिहाई के बाद अजय टोप्पो जहां-तहां भटकता रहा. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पत्र मिलने के बाद झारखंड पुलिस सक्रिय हुई. स्पेशल ब्रांच की टीम के निर्देश पर नामकुम पुलिस पश्चिम बंगाल गयी, जहां से अजय टोप्पो को लेकर वापस रांची लौटी. 25 जून 2025 को नामकुम थाना में पुलिस ने अजय टोप्पो को उसके परिजनों को सौंप दिया.

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ये है अजय टोप्पो के लापता होने और लौटने की कहानी

अजय से मिलने के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है. अजय भी अपने घर वालों से मिलकर बेहद खुश है. वर्ष 2014 में अजय अपने चाचा के साथ धुर्वा बाजार गया था. यहीं वह भटककर बॉर्डर पार बांग्लादेश पहुंच गया. थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि विशेष शाखा की सूचना पर छानबीन की गयी, तो पता चला कि वर्ष 2014 से अजय लापता है. उसके माता-पिता का देहांत हो चुका है. फोटो व अन्य साक्ष्य लेकर झारखंड पुलिस परिजनों को लेकर बंगाल गयी और वहां से अजय को लेकर आयी.

बेटे से मिलने की आस लिये 2 महीने पहले चल बसी मां

अजय टोप्पो की मां बेटे से मिलने की आस लगाये बैठी थी. 11 साल से लापता बेटे को मृत मान चुकी थी. बेटे के लिए पल-पल तड़पती रही. दिसंबर 2024 में बेटे के जीवित होने की जानकारी मिली. वीडियो कॉल पर बेटे को देखा, तो मन को थोड़ा चैन मिला. मानो उसे नयी जिंदगी मिल गयी. दिसंबर से मां बेटे से मिलना चाहती थी. एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया था. मां हर दिन बेटे के आने की राह ताकती, लेकिन बेटा नहीं आया. बेटा जब घर पहुंचा, तो पता चला कि 2 महीने पहले उसकी मां इस दुनिया से चल बसी.

अजय ने अपनी बुआ और दादी को पहचाना

अजय टोप्पो ने अपनी बुआ और दादी को पहचान लिया. अभी भी उसकी मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं है. अजय ने बताया कि वह बांग्लादेश कैसे पहुंचा, उसे नहीं पता. उसे सिर्फ इतना याद है कि वह चाचा के साथ बाजार गया था. उसने बताया कि उसके साथ आये बिहार के युवक को भी रांची लाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों से मना कर दिया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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