रेलवे ने केडीएच साइडिंग को रैक देना किया बंद
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 11 Apr 2024 8:48 PM
रेलवे वे-ब्रिज 16 सितंबर 2023 से है खराब, वे-ब्रिज नहीं बनने से हो रही है परेशानी
रेलवे वे-ब्रिज 16 सितंबर 2023 से है खराब वे-ब्रिज नहीं बनने से हो रही है परेशानी 11 डकरा 01, 15 दिसंबर को प्रभात खबर में छपी खबर प्रतिनिधि, डकरा एनके एरिया के केडीएच परियोजना का रेलवे वे-ब्रिज 16 सितंबर 2023 से खराब है. जिसके कारण रेलवे ने केडीएच साइडिंग को रैक देना बंद कर दिया है. रेलवे के इस निर्णय से सीसीएल, पंजाब इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, मोनेट वाशरी प्रबंधन और साइडिंग से कोयला ले जानेवाली पार्टियों के बीच हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि सीसीएल अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी कार्यशैली के कारण कंपनी के लिए यह अपमान जनक स्थिति बन गयी है. वे-ब्रिज खराब रहने से सीसीएल और कोयला ग्राहकों को प्रतिमाह लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है. केडीएच रेलवे साइडिंग से कोयला लोड कर निकलनेवाले रैक का वजन मैक्लुस्कीगंज या डकरा में कराया जा रहा है. कुछ माह पहले तक डाल्टेनगंज और सोननगर में वजन कराया जा रहा था. रेलवे को इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. सीसीएल पर प्रति रैक जुर्माना भी लगाया जा रहा है. कोयला खरीदारों ने वे-ब्रिज नहीं बनवाने के पीछे सोची-समझी साजिश का आरोप लगाया है. बड़ी संख्या में बेरोजगार होंगे लोग केडीएच रेलवे साइडिंग में ही मोनेट डेनियल कोल वाशरी का भी रेलवे साइडिंग है. उसे भी रैक देना बंद कर दिया गया है. वाशरी के पास वाॅश कोयला रखने की जगह नहीं है और उसने अशोका व मगध का कोयला (प्रति दिन 6000 टन) लाना बंद कर दिया है. यह कोयला अब वहीं पर स्टाॅक होगा, जिससे आग लगने की संभावना बढ़ेगी. पंजाब का कोयला जाना बंद हो गया है. जिससे पीएसइबी के लोगों और कई पाॅवर प्लांट के बीच हड़कंप मच गया है. मोनेट का काम बंद होने से यहां लगभग 400 लोगों के बीच बेरोजगारी का खतरा उत्पन्न हो गया है. साथ ही सीसीएल की साख भी गिर रही है. 15 लाख रुपये खर्च कर बना था वे-ब्रिज 16 सितंबर से वे-ब्रिज खराब है और 15 दिसंबर 2023 को जब प्रभात खबर में खबर छपी तब दिसंबर-जनवरी महीने में 15 लाख रुपये लगाकर काम कराया गया. लेकिन काम कराने के बाद एक भी रैक का वजन नहीं कराया गया. वे-ब्रिज देखने वाले विभाग प्रमुख सुजय चटर्जी ने कहा कि वे-ब्रिज को अपग्रेड किया गया है. इसकी क्षमता 120 टन से 140 टन की गयी है. लेकिन सात अप्रैल को वज्रपात में जल गया. आर्थिक नुकसान का अनुमान कोयला लोड लेकर निकलने वाला रैक का वजन मैक्लुस्कीगंज, डाल्टेनगंज और सोन नगर में कराने से सीसीएल को पिछले सात महीने में बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है. नुकसान का यह आंकड़ा फिलहाल किसी को पता नहीं चल सका है. मामले में रेलवे, सीसीएल और पाॅवर प्लांट के बीच होनेवाली बैठक से नुकसान का आंकड़ा सामने आ जायेगा. इसके बाद जिम्मेदारी भी तय की जायेगी. मुख्यालय के अधिकारी कर रहे हैं बात : पीओ केडीएच पीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि सीसीएल मुख्यालय के अधिकारी रेलवे अधिकारियों से बात कर रहे हैं. जल्द ही रैक मिल जायेगा. मुख्यालय की टीम वे-ब्रिज भी ठीक कराने की प्रक्रिया में लगे हुई है.
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