रांची में पुष्पेंद्र पाल सिंह की स्मृति में सभा सह परिचर्चा, बोले वक्ता- मीडिया पाठ्यक्रमों में बदलाव की जरूरत

आज यह तय करने की जरूरत है कि क्या इन्फॉर्म करना है, कितना इन्फॉर्म करना है और क्या इन्फॉर्म नहीं करना है. उसी तरह क्या एजुकेट करना है, कितना एजुकेट करना है और क्या नहीं करना है, इसके भी मानक तय करने की जरूरत है.
बदलती परिस्थितियों में आज मीडिया पाठ्यक्रमों में बदलाव जरूरी हो गया है. समय की मांग है कि मीडिया के बुनियादी सिद्धांतों को फिर से परिभाषित किया जाये. यह बात रविवार को द रांची प्रेस क्लब में पुष्पेंद्र पाल सिंह ‘पीपी सर’ की स्मृति में आयोजित ‘मीडिया शिक्षण व मीडिया के मानकों की प्रासंगिकता’ पर आयोजित सभा सह परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन ने ये बातें कहीं.
मीडिया की जिम्मेदारी एजुकेट, इन्फॉर्म और एंटरटेन करना भर नहीं : सचिन जैन
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के अध्यापक रहे पुष्पेंद्र पाल सिंह (पीपी सर) की स्मृति में विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों और द रांची प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री जैन ने कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी एजुकेट, इन्फॉर्म और एंटरटेन करना भर नहीं है. आज यह तय करने की जरूरत है कि क्या इन्फॉर्म करना है, कितना इन्फॉर्म करना है और क्या इन्फॉर्म नहीं करना है. उसी तरह क्या एजुकेट करना है, कितना एजुकेट करना है और क्या नहीं करना है, इसके भी मानक तय करने की जरूरत है.
आम लोगों को भी मीडिया के मानकों की जानकारी हो : संजय मिश्र
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सह रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष संजय मिश्र ने कहा कि यह हमारी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी है कि न सिर्फ पत्रकार, बल्कि आम आदमी को भी मीडिया के मानकों की जानकारी होनी चाहिए. आज जब बच्चे भी सोशल मीडिया पर लिखते हैं, शेयर करते हैं, तो उन्हें मानकों की जानकारी न होना घातक सिद्ध हो सकता है. कार्यक्रम में झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष देवव्रत सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में आज न सिर्फ कंटेंट के स्तर पर बल्कि भाषा और काम के वातावरण के स्तर पर भी मानक तय करना जरूरी हो गया है.
पत्रकारों को दी जानी चाहिए नागरिकशास्त्र की शिक्षा : विष्णु राजगढ़िया
वरिष्ठ पत्रकार सह एक्टिविस्ट विष्णु राजगढ़िया ने कहा कि सामान्य नागरिकशास्त्र की शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि देश के संवैधानिक मूल्यों की बुनियादी समझ विकसित हो सके. वरिष्ठ पत्रकार डॉ चंदन शर्मा ने कहा कि मीडिया के छात्रों को सभी प्रकार की विचारधाराओं को समझने का मौका देना चाहिए, ताकि उनमें संतुलन बनाने की क्षमता विकसित हो सके.
पुष्पेंद्र पाल सिंह पर वृत्तचित्र का प्रदर्शन
कार्यक्रम में मीडिया शिक्षक रश्मि वर्मा, कीर्ति सिंह ने भी अपने विचार रखे. संचालन वरिष्ठ पत्रकार एम अखलाक ने और धन्यवाद ज्ञापन रंजीत प्रसाद सिंह ने किया. कार्यक्रम के दौरान माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती विद्यार्थी प्रवीण कुमार, अभिषेक पोद्दार, रूपक दीवान, धर्मेंद्र कुमार, कौस्तुभ गुप्ता, संजीव कुमार, संजय सिंह आदि ने पुष्पेंद्र पाल सिंह से संबंधित यादों को साझा किया. वहीं, पुष्पेंद्र पाल सिंह पर वृत्तचित्र भी दिखाया गया.
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By Mithilesh Jha
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