डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन, राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज, सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी सेवा बाधित

Updated at : 12 Dec 2020 10:31 AM (IST)
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डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन, राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज, सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी सेवा बाधित

छह माह का प्रशिक्षण लेकर सर्जरी की अनुमति देने पर शुक्रवार को राज्य के डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया.

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रांची : आयुर्वेद डाॅक्टरों को छह माह का प्रशिक्षण लेकर सर्जरी की अनुमति देने पर शुक्रवार को राज्य के डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया. राष्ट्रीय आइएमए के आह्वान पर झारखंड के भी सभी सरकारी व निजी अस्पताल के डॉक्टरोें ने कार्य बहिष्कार किया. इससे ओपीडी सेवा बाधित रही. डॉक्टर अस्पताल तो आये, लेकिन ओपीडी में मरीजों काे परामर्श नहीं दिया.

रिम्स सहित राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व पीएचसी-सीएचसी में ओपीडी सेवा बंद रही. दूर दराज से आये मरीजों को कार्य बहिष्कार की जानकारी नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ा. अाइएमए के प्रतिनिधिमंडल ने रिम्स व सदर अस्पताल में जम कर नारेबाजी की और विरोध जताया. आइएमए के राज्य सचिव डॉ प्रदीप सिंह व झासा के राज्य सचिव डॉ विमलेश सिंह ने राज्य के कार्य बहिष्कार को पूरी तरह सफल बताया है.

डॉ प्रदीप सिंह ने कहा कि हड़ताल को राज्य के सभी डॉक्टरों का समर्थन मिला है. हम सभी डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हैं. राज्य के 13,000 से ज्यादा डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार किया, लेकिन इमरजेंसी सेवाएं बहाल रहीं. डॉ बिमलेश सिंह ने कहा कि यह ऑटो ड्राइवर प्लेन का पायलट बनाने जैसा फैसला है.

नहीं मिला परामर्श, ऑपरेशन टला

आइएमए के राज्य सचिव डॉ प्रदीप सिंह व आइएमए के जिला सचिव डॉ शंभू प्रसाद शुक्रवार की सुबह 10 बजे ही रिम्स पहुंच गये थे. तब रिम्स की ओपीडी सामान्य दिनों की तरह संचालित थी. पदाधिकारियों ने घूम-घूम कर ओपीडी बंद करायी. कार्डियोलॉजी ओपीडी को बंद कराने के बाद पेइंग वार्ड के सामने नारेबाजी भी की. इससे रिम्स में इलाज कराने आये रांची, चतरा, लातेहार, गुमला, पलामू व पुरुलिया के मरीजों व उनके परिजनों को निराशा हाथ लगी.

मरीजों को परामर्श नहीं मिल पाया. काफी देर बाद निराश होकर रांची व आसपास से आये मरीज वापस तो लौट गये, लेकिन बाहर के मरीज शनिवार को ओपीडी में परामर्श लेने के लिए वहीं रूक गये. जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को 400 से ज्यादा मरीजों को परामर्श नहीं मिलने के कारण लौटना पड़ा.

दूसरी ओर, प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के समर्थन में रिम्स में रूटीन ऑपरेशन नहीं हुआ. करीब 13 मेजर ऑपरेशन को टाल दिया गया, हालांकि इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया. कोरोना से संबंधित कार्य व लेबर रूम में सभी कार्य संपन्न हुए. आइएमए की तरफ से डॉ अजीत कुमार सहित कई डॉक्टर शामिल थे.

ओपीडी का किया बहिष्कार मरीज रहे परेशान

सदर अस्पताल रांची में डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला. इमरजेंसी, लेबर रूम के अलावा ओपीडी कार्य का डॉक्टरों ने बहिष्कार किया. डॉक्टर अस्पताल में आने के बाद उपस्थिति दर्ज कराने के बाद डॉक्टर लॉज में आकर बैठ गये. ओपीडी का दरवाजा खुला होने पर मरीज लंबी कतार में खड़े हो गये. घंटों खड़े होने के बाद कर्मचारियों द्वारा बताया कि आज डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठेंगे.

शनिवार को ही डॉक्टर मिल पायेेंगे. इमरजेंसी सेवाएं ही चल रही हैं. हालांकि कुछ मरीजों को इमरजेंसी में डॉक्टरों ने देख कर दवाएं दीं. कार्य बहिष्कार से रेडियालाॅजी व ब्लड जांच भी प्रभावित हुई. जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल में सामान्य दिनों में 600 से ज्यादा मरीज ओपीडी में परामर्श लेते हैं. इस कारण शुक्रवार को सैकड़ों मरीज के लौटने का अनुमान है.

शाम छह बजे के बाद किया काम

आइएमए के आह्वान का राज्य के निजी अस्पताल के डाॅक्टरों ने भी समर्थन किया. राजधानी के निजी अस्पतालों की ओपीडी भी बंद रही. मरीज परामर्श के लिए पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने शाम छह बजे के बाद आने को कहा. रांची के मरीजों को शाम छह बजे के बाद का समय दिया गया. वहीं, बाहर से आये मरीजों को इमरजेंसी में परामर्श लेने की सलाह दी गयी. इधर, एएचपीआइ सहित निजी अस्पताल एसोसिएशन ने भी डॉक्टरों के आंदोलन का समर्थन किया, जिससे चिकित्सीय सेवाएं प्रभावित रहीं.

मरीजों ने रिम्स में ही गुजारी रात

शुक्रवार को अपने बच्चे का इलाज कराने मुरी से रिम्स आयी संगीता देवी ने कहा- मेरा छोटा बेटा थैलेसिमिया से पीड़ित है. हर माह खून चढ़ाना पड़ता है, इसलिए बच्चे को खून चढ़ाने रिम्स लायी हूं. मैं सुबह 10 बजे रिम्स पहुंच गयी थी, लेकिन डॉक्टरों ने ओपीडी बंद करा दी. इससे बच्चे को डॉक्टर से दिखा नहीं पायी. अब शनिवार को डॉक्टर से दिखाऊंगी. मेरे साथ में बड़ा बेटा भी आया है. लौट कर जाने और दोबारा आने का कोई मतलब नहीं है. किसी तरह रिम्स में ही रात काट लूंगी.

अपनी आंखों का इलाज कराने बुंडू से आये धरम महतो ने कहा- मुझे आंखों से कुछ भी नहीं दिखता है. मोतियाबिंद हो गया है, इसका ऑपरेशन कराना है. शुक्रवार को ओपीडी में दिखाने आया था, लेकिन हड़ताल के कारण डॉक्टरों ने देखा ही नहीं. अस्पताल के कर्मचारी ने बताया कि शनिवार को डॉक्टर देखेंगे. घर लौट कर जाने में भी काफी परेशानी है, फिर शनिवार को आना ही पड़ेगा. इसलिए रातभर रिम्स में रह जायेेंगे और शनिवार को डॉक्टर से दिखायेंगे.

posted by : sameer oraon

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