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10 लाख के इनामी नक्सली रवि गंझू को पुलिस ने पकड़ा, भेजा जेल

Updated at : 10 Jun 2024 12:14 AM (IST)
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10 लाख के इनामी नक्सली रवि गंझू को पुलिस ने पकड़ा, भेजा जेल

घाघरा थाना क्षेत्र के दीरगांव स्थित झलकापाठ कारासिली जंगल से किया गिरफ्तार

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रांची/गुमला़ गुमला पुलिस ने भाकपा माओवादी के 10 लाख रुपये के इनामी सबजोनल कमांडर शंभु गंझू उर्फ रवि गंझू को गिरफ्तार कर रविवार को जेल भेज दिया. रवि गंझू का घर चतरा जिला के टंडवा थाना स्थित हुम्बी सराढ़ू गांव में है. पुलिस ने उसे घाघरा थाना क्षेत्र के दीरगांव स्थित झलकापाठ कारासिली जंगल से गिरफ्तार किया है. उसके ऊपर चतरा, लातेहार, गुमला में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. वर्ष 2013 से पुलिस उसे खोज रही थी. वह भाकपा माओवादी के सैक सदस्य छोटू खेरवार के दस्ते के साथ घूमता था. साथ ही सैक सदस्य बिरसाइ उर्फ साकेत का बॉडीगार्ड भी रह चुका है. इधर, गुमला जिला में भाकपा माओवादी संगठन के कमजोर होने के बाद रवि गंझू को गुमला जिला में संगठन को मजबूत करने और विस्तार करने की जिम्मेवारी मिली थी. इसलिए वह कई दिनों से घाघरा, बिशुनपुर व चैनपुर के गांवों में घूम रहा था. जो पुराने कैडर के सदस्य हैं और जिन्होंने संगठन छोड़ दिया है, ऐसे लोगों को रवि गंझू खोजकर पुन: संगठन में शामिल होने के लिए दबाव बना रहा था. लेकिन उससे पहले पुलिस ने उसे घाघरा थाना क्षेत्र के दीरगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया. उसके पास से एक थैला मिला है, जिसमें साबुन, टूथ ब्रश, कोलगेट पेस्ट, कपड़ा और भाकपा माओवादी का प्रिंटेड पर्चा था. गुमला एसपी शंभु कुमार सिंह ने बताया कि रवि गंझू के दस्ते में कुल आठ सदस्य हैं. उसके अन्य साथी बूढ़ापहाड़ इलाके में हैं. वह अकेले इस क्षेत्र में आया था. खुद रवि गंझू लातेहार जिला के बूढ़ा पहाड़ में ही रहता था. लेकिन माओवादी के शीर्ष नेताओं के आदेश पर वह गुमला आया और पकड़ा गया. चैनपुर में हुए मुठभेड़ में था शामिल : वर्ष 2013 में चैनपुर प्रखंड के सिविल जंगल में झारखंड पुलिस व भाकपा माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. दो दिनों तक लगातार मुठभेड़ चला था. इसमें पुलिस का जवान शहीद हुआ था. जबकि भाकपा माओवादी का एरिया कमांडर रामचंद्र परहिया मारा गया था. उस समय नक्सली अपने साथी रामचंद्र के शव को उठाकर ले गये थे और कुरूमगढ़ इलाके में कहीं दफना दिया था. उस मुठभेड़ में भाकपा माओवादी के सभी बड़े नेताओं के साथ रवि गंझू भी शामिल था. रवि गंझू उस समय सैक सदस्य बिरसाइ उर्फ साकेत का बॉडीगार्ड था. पुलिस को भारी पड़ता देख रवि अपने दस्ते के साथ फरार हो गया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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