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रांची के ओरमांझी जू में बाघ, शेर ले रहे हीटर का आनंद, हाथियों के लिए अलाव, कड़ाके की ठंड में पक्षियों के लिए क्या हैं इंतजाम?

Updated at : 11 Jan 2025 5:30 AM (IST)
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ormanjhi zoo ranchi

ormanjhi zoo ranchi

Ormanjhi Zoo: झारखंड में कड़ाके की ठंड के बीच रांची के ओरमांझी जू में पशु-पक्षियों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं. बाघ, शेर जहां हीटर का आनंद ले रहे हैं, वहीं हाथियों के लिए अलाव की व्यवस्था की गयी है.

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Ormanjhi Zoo: ओरमांझी (रांची), रोहित लाल महतो-झारखंड में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. ऐसे में रांची के ओरमांझी जू (भगवान बिरसा जैविक उद्यान) में वन्य प्राणियों के लिए भी खास व्यवस्था की गयी है. बाघ, शेर, भालू के लिए जहां रूम हीटर लगाया गया है, वहीं उद्यान में हाथियों के लिए अलाव जलाया जा रहा है. पक्षियों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं.

उद्यान प्रबंधन ने की है ठंड से बचाव की व्यवस्था


उद्यान प्रबंधन ने ओरमांझी के चकला स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान में वन्य प्राणियों की सुरक्षा और ठंड से बचाव के लिए मुकम्मल व्यवस्था की है. हाथियों को ठंड से बचाने के लिए बाड़े के पास अलाव की व्यवस्था की गयी है, जबकि रात में शेड में बैठने के लिए पुआल बिछाया गया है. इन्हें भोजन के साथ खाने में प्रोटीन और विटामिन दी जा रही है. हिरण, नील गाय, कृष्ण मृग, चीतल, सांभर समेत अन्य को नियमित आहार कुटी और चोकर के अलावा ठंड से बचाव के लिए मिनरल मिक्सचर दिया जा रहा है. हिमालयन और देसी भालू को भी नियमित आहार में दूध, केला, सेव के अलावा मल्टी विटामिन, अंडा और शहद दिया जा रहा है.

इनके लिए है रूम हीटर की व्यवस्था


बाघ, शेर, तेंदुआ और भालू के लिए रात्रि विश्राम शेड में रूम हीटर की व्यवस्था की गयी है. इसके अलावा सभी खिड़कियों और ग्रिल में जुट का पर्दा लगाया गया है, ताकि गर्माहट बनी रहे. इसी तरह हिप्पो को भी नियमित आहार कुटी-चोकर, आलू, पका हुआ केला के अलावा विटामिन्स दिए जा रहे हैं.

दिए जा रहे हैं मल्टी विटामिन्स और कैल्शियम


बाघ, शेर, तेंदुआ और अन्य मांसाहारी वन्य प्राणियों को मल्टी विटामिन्स और कैल्शियम के अलावा अंडा भी दिया जा रहा है. इसी तरह शुतुरमुर्ग, एमु, रंगीन मोर, सफेद मोर, तोता, मैना और विभिन्न प्रकार के तीतर प्रजाति के पक्षियों को नियमित आहार के अलावा मल्टी विटामिन और बी कॉम्प्लेक्स दिया जा रहा है. ठंड से बचाव के लिए बाड़ों में लकड़ी का पटरा बिछा कर उसमें पुआल बिछाया गया है. इसके साथ ही केजों को चटाई देकर घेर दिया गया है.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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