रांची की संस्कार भारती में होली की धूम, सरस्वती वंदना से रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत

होली गीत पर सामूहिक नृत्य पेश करतीं संस्कार भारती की महिला सदस्य.
Ranchi Holi: रांची में संस्कार भारती महानगर की ओर से होली मिलन समारोह धूमधाम से आयोजित हुआ. सरस्वती वंदना, गीत-संगीत, कविता पाठ और भरतनाट्यम नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने माहौल को रंगीन बना दिया. कार्यक्रम में कलाकारों और साहित्यकारों ने अबीर-गुलाल लगाकर सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
Ranchi Holi: रांची में संस्कार भारती महानगर की ओर से चुटिया स्थित अनूप मजूमदार के आवास पर होली मिलन समारोह का आयोजन हर्षोल्लास, आत्मीयता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ किया गया. कार्यक्रम में कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों ने भाग लेकर फागुन के रंगों को जीवंत बना दिया. आयोजन की शुरुआत से ही वातावरण उत्साह और सौहार्द्र से भर उठा. समारोह में आगत अतिथियों का स्वागत गुलाब की कली, अंगवस्त्र और अबीर अर्पित कर किया गया. इस आत्मीय स्वागत ने पूरे कार्यक्रम को एक पारिवारिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया. उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं देते हुए सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया.
ध्येय गीत और सरस्वती वंदना से हुआ शुभारम्भ
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ, जिसकी सुमधुर प्रस्तुति सुजाता मजूमदार ने की. इसके बाद सरस्वती वंदना सुजाता मजूमदार और गणेश वंदना जे.पी. सिंह द्वारा भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत की गई. दीप प्रज्ज्वलन संस्कार भारती झारखंड प्रांत के अध्यक्ष डॉ सुशील अंकन द्वारा किया गया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में सामाजिक समरसता, प्रेम और सौहार्द्र का प्रतीक है. उन्होंने सभी से अपील की कि इस पर्व के माध्यम से समाज में प्रेम और भाईचारे के रंग फैलाएं.
गीत-संगीत से सराबोर हुआ फागुन का माहौल
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शृंखला में सुजाता मजूमदार ने “आज बिरज में होली रे रसिया” गीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को फागुनी रंगों से सराबोर कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने नागपुरी भाषा में भी होली गीत प्रस्तुत कर स्थानीय संस्कृति की छटा बिखेरी. जेपी सिंह ने पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से फागुन की मिठास को जीवंत किया. वहीं आर.एन. सिंह ने भोजपुरी गीत “रंगवा अउरी अबीर, खेलत भिंगेली बदरिया” गाकर माहौल को और भी उल्लासपूर्ण बना दिया. कुमकुम गौड़ ने लोकप्रिय भोजपुरी गीत “अंचरा में भरनी हो अबीर गुलाल…” की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
कविता और नृत्य ने बढ़ाया आयोजन का आकर्षण
कार्यक्रम में काव्य पाठ भी आकर्षण का केंद्र रहा. कवि राकेश रमण ने “फॉगुन की गगरी” कविता के माध्यम से होली की मस्ती को शब्दों में पिरोया. कवि आशुतोष प्रसाद ने “आज हवा में उड़े अबीर, महके गली मोहल्ला…” की पंक्तियों से रंगों की बगिया का सजीव चित्र खींच दिया. वर्षा ऋतुराज ने “होली आई रे…” कविता से उत्सव का उल्लास व्यक्त किया. प्रमिला कपूर ने भी मधुर होली गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया. कार्यक्रम का विशेष आकर्षण भरतनाट्यम की कुशल नृत्यांगना गार्गी शोम की मनोहारी नृत्य प्रस्तुति रही. उनके नृत्य ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और फागुन के उत्सव को और भी रंगीन बना दिया.
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अबीर-गुलाल के साथ समरसता का संदेश
समारोह में अनूप मजूमदार, लिपिका रॉय, जेपी सिंह, लल्लन रॉय, आशुतोष प्रसाद, शशिकला पौराणिक, शिव पूजन पाठक, कुमकुम गौड़, विश्वनाथ प्रसाद, वीना चंद्रा, प्रमिला कपूर, सुजाता मजूमदार, मधुरेश चंद्रा, राकेश रमण, गार्गी शोम और आर.एन. सिंह सहित कई कला-प्रेमी उपस्थित रहे. अंत में सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं. इस तरह प्रेम, सौहार्द्र और सांस्कृतिक एकता के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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