बोकारो की लापता युवती मामले में सीएफएसएल की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, 25 जून को अगली सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य द्वार.
Jharkhand High Court: बोकारो की 18 वर्षीय लापता युवती मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सीएफएसएल कोलकाता की विशेष रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की गई. कोर्ट ने रिपोर्ट का अवलोकन किया और मामले की अगली सुनवाई 25 जून को तय की. इससे पहले अदालत जांच में देरी पर नाराजगी जता चुकी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court: बोकारो की 18 वर्षीय लापता युवती के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल), कोलकाता की विशेष रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई. कोर्ट ने सीलबंद लिफाफा खोलकर रिपोर्ट का अवलोकन किया. मामले की अगली सुनवाई 25 जून को निर्धारित की गई है. केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (एएसजीआई) प्रशांत पल्लव ने पक्ष रखा.
पहले भी जांच में देरी पर जता चुकी है नाराजगी
इससे पहले 15 अप्रैल 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने जांच में हो रही देरी और कथित लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया था. अदालत ने विशेष रूप से बरामद नरकंकाल की पहचान को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे और पूछा था कि अब तक उसका डीएनए परीक्षण क्यों नहीं कराया गया.
डीजीपी से पूछा था, माता-पिता का सैंपल लिया गया या नहीं
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य के तत्कालीन डीजीपी तदाशा मिश्र से स्पष्ट जवाब मांगा था कि बरामद कंकाल का डीएनए परीक्षण अब तक क्यों नहीं कराया गया. अदालत ने यह भी जानना चाहा था कि युवती के माता-पिता के नमूने लेकर उन्हें फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है या नहीं. कोर्ट ने कहा था कि कंकाल मिलने के तीन-चार दिन बाद भी वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं होना समझ से परे है. खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा था कि क्या जांच एजेंसियां अदालत के आदेश का इंतजार कर रही हैं. अदालत ने जांच अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए थे.
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राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं था कोर्ट
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि बरामद नरकंकाल का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और उसके बाद एफएसएल तथा डीएनए परीक्षण भी कराया जाएगा. हालांकि, हाईकोर्ट इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा था. अदालत ने कहा था कि ऐसे संवेदनशील मामलों में वैज्ञानिक जांच में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए. खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि समय पर डीएनए और फॉरेंसिक जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति संभव है. अब सीएफएसएल कोलकाता की विशेष रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश होने के बाद मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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