रिम्स में मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए अब मरीजों को नहीं खरीदना पड़ेगा लेंस

Updated:
विज्ञापन

Birsa Munda

रिम्स का नेत्र विभाग अमृत फार्मेसी से लेंस खरीदकर मरीजों को मुफ्त में लगायेगा. प्रबंधन ने नेत्र विभाग से कहा : निविदा की प्रक्रिया पूरी होने तक यही व्यवस्था रहेगी.

विज्ञापन

रांची. रिम्स में मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए मरीजों को अब खुद से लेंस नहीं खरीदना पड़ेगा. रिम्स का नेत्र विभाग अमृत फार्मेसी से लेंस खरीदकर मरीजों को मुफ्त में लगायेगा. रिम्स प्रबंधन ने विभाग को निर्देश दिया है कि निविदा की प्रक्रिया पूरी होने तक अमृत फार्मेसी या अन्य सरकारी सप्लायर से लेंस खरीदा जाये. प्रबंधन का कहना है कि अमृत फार्मेसी में लेंस उपलब्ध है, इसके बावजूद मरीजों से लेंस क्यों मंगाया जा रहा है. इसके लिए विभाग से जवाब मांगा गया है.

गौरतलब है कि रिम्स के नेत्र विभाग में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले मरीजों से लेंस खरीदकर मंगवाया जा रहा था. इसके लिए मरीज को 5,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे थे. इससे संबंधित खबर छह जुलाई को प्रभात खबर में प्रमुखता से प्रकाशित की गयी. इसके बाद शनिवार को अधीक्षक डॉ हिरेंद्र बिरुआ ने अमृत फार्मेसी से लेंस की उपलब्धता की जानकारी ली. फार्मेसी द्वारा बताया गया कि लेंस उपलब्ध है, लेकिन रिम्स द्वारा खरीदा नहीं जा रहा है. इधर निदेशक डॉ राजकुमार ने कहा कि रिम्स के सभी विभागों को लगातार निर्देश दिया जा रहा है कि अमृत फार्मेसी और जनऔषधि की दुकानों से दवाएं और सर्जिकल आइटम मंगाये जायें. विभाग अपने स्तर से इस अधिकृत एजेंसी से तत्काल खरीदारी कर सकता है. प्रबंधन इसका भुगतान करेगा. लेकिन, इसका पालन नहीं किया जा रहा है. वहीं, नेत्र विभाग को अमृत फार्मेसी से लेंस खरीदने का आदेश दिया गया है.

सख्ती के बाद नाम बदलकर टेंडर में शामिल होने की तैयारी कर रही एजेंसी

रांची.

राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में अधिकांश मशीनों की खरीदारी में एक ही एजेंसी का दबदबा रहता था. वहीं, रिम्स प्रबंधन ने जब सख्ती की, तो एजेंसी नाम बदलकर रिम्स के टेंडर में शामिल होने को तैयार है. हालांकि, इसकी भनक रिम्स प्रबंधन को हो गयी है और उसे रोकने का प्रयास किया गया है. वहीं, एजेंसी की पूर्व निविदा और उसके कार्य को राज्य स्तरीय कमेटी खंगाल रही है. जांच हो रही है कि मॉड्यूलर ओटी स्थापित करने में किन-किन मानकों को ताक पर रखा गया है. सूत्रों ने बताया कि उक्त एजेंसी को फायदा पहुंचाने के लिए रिम्स के कई विभागों ने निविदा में नियमाें को शिथिल किया. इसमें रिम्स के कई क्लर्क भी शामिल रहे हैं. एजेंसी के कर्मचारी अपने हिसाब से निविदा तैयार कराते थे, जिससे वह अक्सर एल-वन हो जाती थी. इसके अलावा कई मशीनों की खरीदारी भी इनके द्वारा ही करायी जाती थी, जिसकी जांच चल रही है. यहां बता दें कि रिम्स के पूर्व निदेशक डाॅ कामेश्वर प्रसाद ने मामले में टिप्पणी कर चुके हैं.

आपके शहर में

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola