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झारखंड के लिए गर्व का कारण बना नालांदा विश्वविद्यालय, मेकॉन ने दिया अहम योगदान

Updated at : 19 Jun 2024 10:18 PM (IST)
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झारखंड के लिए गर्व का कारण बना नालांदा विश्वविद्यालय, मेकॉन ने दिया अहम योगदान

पीएम मोदी द्वारा बुधवार को बिहार में नालांदा विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया गया. नालांदा विश्वविद्यालय के निर्माण में रांची स्थित मेकॉन ने अहम योगदान दिए हैं.

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बिहार में पीएम मोदी ने नालांदा विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया. इस दौरान उनके साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे. इस अवसर पर मेकॉन के अधिकारी भी उपस्थित रहे. आपको बता दें कि इस नए विश्वविद्यालय से झारखंड के रांची स्थित मेकॉन लिमिटेड (भारत सरकार का उपक्रम) का बड़ा योगदान है.

मेकॉन लिमिटेड ने दिया अहम योगदान

मेकॉन लिमिटेड ने मार्च 2015 (चरण-I) से राजगीर, बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय के परिसर के विकास के लिए परियोजना प्रबंधन परामर्शी (पीएमसी) सेवाएं प्रदान की तथा अब अप्रैल 2023 से मेकॉन वर्तमान और भविष्य की सुविधाओं (चरण-II) दोनों के लिए इंजीनियरिंग और पीएमसी सेवाएं प्रदान करना जारी रखे हुए है. अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए मेकॉन के रांची कार्यालय के साथ-साथ राजगीर/ नालंदा में स्थित स्थानीय कार्यालय के इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम ने अहम योगदान दिया है.

बेहद विशाल और भव्य होगा नालांदा विश्वविद्यालय का परिसर

परिसर और इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास 455 एकड़ अधिग्रहित भूमि पर किया जा रहा है, जिसका क्षेत्रफल 20,00,000 वर्ग फीट है. इस विशाल “नेट जीरो कैंपस” में 84 शैक्षणिक, प्रशासनिक और यूटिलिटि भवन, 113 आवासीय भवन हैं जिनमें छात्रावास और कर्मचारी आवास शामिल हैं, 40 हेक्टेयर जल निकाय और लगभग 300 एकड़ हरित पट्टी है. इसमें छात्रों के लिए एक विशाल खेल परिसर, योग भवन, पुस्तकालय, सभागार और कैफेटेरिया भी है.

विश्वविद्यालय के लिए आवंटित 1750 करोड़ रुपये

परिसर के लिए आवंटित कुल बजट रु. 1750 करोड़ है. परिसर ने वर्ष 2021 से काम करना शुरू कर दिया है. परिसर के अंदर पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और अत्यंत आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया गया है जैसे ऑन-ग्रिड सोलर पीवी कैप्टिव पावर प्लांट, बायोगैस संचालित संयुक्त हीट एंड पावर (सीएचपी) इंजन, एससीएडीए (स्काडा) स्मार्ट ग्रिड, जलवायु के अनुकूल लैंडस्केप डिज़ाइन, इमारतों को गर्म/ ठंडा करने के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग, स्मार्ट एलईडी लाइटिंग, विकेन्द्रीकृत जल (डीईडब्ल्यूएटी) प्रबंधन प्रणाली और कुशल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली है.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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