Political news : झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला, सीबीआइ जांच हो : बाबूलाल

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Political news : झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला, सीबीआइ जांच हो : बाबूलाल

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर साधा निशाना. कहा : सुनियोजित तरीके से हुआ घोटाला, सीएम भी शामिल.

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रांची. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शराब घोटाले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री मरांडी ने कहा: शराब घोटाले की परत जिस प्रकार से रोज खुल रही रही है, उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला हुआ है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनके द्वारा पत्र लिख कर आगाह किये जाने के बावजूद कार्रवाई से बचते रहे, उससे यह स्पष्ट हो रहा कि यह घोटाला हुआ नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से कराया गया है. इसमें मुख्यमंत्री स्वयं शामिल हैं. यह मामला दो राज्यों से जुड़ा है, इसलिए इसकी सीबीआइ जांच होनी चाहिए.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सवाल उठता है कि 2022 में पत्र लिख कर आगाह करने के बाद भी 2025 तक मुख्यमंत्री ने क्यों लूट होने दी, क्यों कार्रवाई नहीं की? मुख्यमंत्री की नींद, तब खुली, जब 27 सितंबर 2024 को अखबार में खबर छपी कि शराब घोटाले में छत्तीसगढ़ में झारखंड के आइएएस अधिकारी विनय चौबे पर मुकदमा दर्ज हुआ है. इसके बाद सत्ता में बैठे लोगों के कान खड़े हुए. जांच का भय सताने लगा. इसलिए आनन-फानन में अक्टूबर 2024 में प्राइमरी इन्क्वायरी सेटअप की गयी, लेकिन इस समय भी एफआइआर दर्ज नहीं हुआ. इससे स्पष्ट है कि घोटाले पर पर्दा डालने और बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की कार्रवाई के बाद हड़बड़ी ने जांच प्रारंभ हुई, जो पूरी तरह से सोची समझी साजिश है. यह ध्यान देने वाली बात है कि मंगलवार को ही एसीबी ने विनय चौबे पर एफआईआर दर्ज किया और उसी दिन गिरफ्तार कर लिया.

अवैध डीजीपी रखना भी साजिश का हिस्सा

श्री मरांडी ने कहा कि अब यह स्पष्ट हो रहा कि अवैध तरीके से क्यों डीजीपी को रखा गया है. उन्होंने कहा कि संवैधानिक रूप में विगत 21 दिनों से झारखंड डीजीपी विहीन है, लेकिन एक योजना के तहत अवैध डीजीपी से अवैध काम लिया जा रहा है. इस घोटाले के पहले भी राज्य के दो अंचलाधिकारी मनोज कुमार और शैलेश एक घोटाले में इडी के गवाह हैं. एसीबी ने मुकदमा दर्ज किया. छापेमारी की, ताकि मामले को लटकाया जा सके. अब गवाहों को धमकी दी जा रही कि गवाही से मुकर जाओ, नहीं तो कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि राज्य में एक जमीन से जुड़ा बड़ा मामला है, जिसमें तीन लोग उमेश टोप्पो, राज लकड़ा, प्रवीण जायसवाल प्रमुख गवाह हैं. इन पर भी बयानों से मुकरने के लिए दबाव डाला गया और ऐसा नहीं करने पर इन्हें जेल भेज दिया गया. इससे स्पष्ट है कि ये लोग बोल देंगे, तो कई बड़ी मछलियां फंस जायेंगी.

दो प्लेसमेंट एजेंसियों ने फर्जी बैंक गारंटी दी, नहीं हुई एफआइआर

उन्होंने कहा कि शराब घोटाले से जुड़ा एक और मामला है, जिसमें दो प्लेसमेंट एजेंसियों ने फर्जी बैंक गारंटी जमा की. कोर्ट में भी फर्जी ही जमा किया, लेकिन अभी तक विभाग ने न तो एफआईआर दर्ज किया, न कोई कार्रवाई की. कंपनी ने बिना टेंडर के दुकानें बांट दिये. इससे स्पष्ट है कि सभी मिले हुए हैं.

चौबे को गिरफ्तार कर भ्रम फैलाना चाहती है सरकार

उन्होंने कहा कि विनय चौबे को गिरफ्तार कर सरकार यह भ्रम फैलाना चाहती है कि वह घोटाले में शामिल नहीं है, जबकि घोटाले के तार मुख्यमंत्री तक जुड़े हैं. श्री मरांडी ने विनय चौबे की अस्वस्थता पर भी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से उनकी चिकित्सा एवं सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की.

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Rajiv Kumar

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