JSSC CGL रद्द होने के बाद प्रोजेक्ट भवन का दरवाजा बंद, सड़क पर उतरे कर्मचारी
CGL परीक्षा रद्द होने के बाद प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे अभ्यर्थी : प्रभात खबर
JSSC CGL परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों ने सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले का विरोध करते हुए सड़क पर प्रदर्शन किया है. उनका कहना है कि बिना उनका पक्ष सुने परीक्षा रद्द कर दी गई है, जिससे उनके सामने नौकरी और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है.
धर्मेंद्र गिरी की रिपोर्ट
रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर मंगलवार को JSSC CGL परीक्षा पास कर नियुक्त हुए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे हैं. सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद इन अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि कल तक वे सचिवालय में कर्मचारी के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन हेमंंत सोरेन सरकार द्वारा सीजीएल रद्द करने के फैसले के बाद वे बेरोजगार हो गए हैं. उनका कहना है कि उन्होंने केंद्र सहित अन्य विभाग की नौकरी तक छोड़कर अपने राज्य में काम करने का फैसला लिया था.
अभ्यर्थियों ने सरकार पर लगाया आरोप कहा-बिना उनका पक्ष सुने ही परीक्षा रद्द कर दी गई
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार ने बिना उनका पक्ष सुने ही पूरी परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. उन्होंने चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति पाई और इसके बाद अपने पद पर काम कर रहे थे. अब परीक्षा रद्द होने से उनके सामने नौकरी और भविष्य दोनों का संकट खड़ा हो गया है.
यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए : आंदोलनरत अभ्यर्थी
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. लेकिन कथित गड़बड़ी के लिए पूरी परीक्षा और उससे नियुक्त हुए सभी अभ्यर्थियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. अभ्यर्थियों ने सरकार से अपना पक्ष रखने का मौका देने और नियुक्तियों पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
क्यों हो रहा है पूरा विवाद?
दरअसल, झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. यह फैसला भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन और जांच के बीच आया है. सरकार ने CGL के साथ आउटसोर्स एजेंसी TDPL के माध्यम से वर्ष 2014 से आयोजित परीक्षाओं की भी जांच कराने की बात कही है. इस फैसले के बाद एक ओर परीक्षा रद्द कराने की मांग कर रहे छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, वहीं दूसरी ओर JSSC CGL पास कर नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थी विरोध में उतर आए हैं. उनका कहना है कि परीक्षा में अगर किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी सजा दोषियों को मिलनी चाहिए, उन अभ्यर्थियों को नहीं जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की और नियुक्ति के बाद काम कर रहे हैं.
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