झारखंड हाईकोर्ट का आदेश बरकरार, सहायक टाउन प्लानर की नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिर खारिज की SLP

Supreme Court
नियुक्ति प्रक्रिया के बीच में जेपीएससी को छूट देने का अधिकार नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी चंदन भगत व अन्य ने एसएलपी दायर कर झारखंड हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी.
रांची : जेपीएससी असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रतियोगिता परीक्षा के मामले में झारखंड हाइकोर्ट के आदेश को चुनाैती देनेवाली एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. साथ ही झारखंड हाइकोर्ट के 16 सितंबर 2023 के फैसले को बरकरार रखा. इसी मामले में पूर्व में दायर एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है. गुरुवार को जस्टिस हिमा कोहली व जस्टिस ए अमानुल्लाह की खंडपीठ ने एसएलपी पर सुनवाई के बाद प्रार्थी चंदन भगत व अन्य पांच प्रार्थियों को राहत देने से इनकार कर दिया.
इस मामले में प्रतिवादी स्वपनिल म्यूरेश व विवेक हर्षिल की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन व अधिवक्ता आभास परिमल ने पैरवी की. उन्होंने बताया कि जेपीएससी ने असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रतियोगिता परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2020 के बाद 186 अभ्यर्थियों से इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानिंग (इंडिया) का सर्टिफिकेट जमा करने के लिए छूट प्रदान की थी, जो पूरी तरह से गलत व असंवैधानिक थी. नियुक्ति प्रक्रिया के बीच में जेपीएससी को छूट देने का अधिकार नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी चंदन भगत व अन्य ने एसएलपी दायर कर झारखंड हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी.
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झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस नवनीत कुमार की खंडपीठ ने 16 सितंबर 2023 को फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया था. खंडपीठ ने फैसले में कहा था कि असिस्टेंट टाउन प्लानर प्रतियोगिता परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि के बाद इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानिंग का सर्टिफिकेट जमा करनेवाले 186 अभ्यर्थियों को छोड़ कर संशोधित रिजल्ट जारी किया जाये. राज्य सरकार व जेपीएससी को निर्देश दिया कि नियुक्ति प्रक्रिया दो माह में पूरी की जाये.
जेपीएससी ने अप्रैल 2020 में असिस्टेंट टाउन प्लानर के 77 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. सारी प्रक्रिया पूरी करते हुए जेपीएससी ने मार्च 2021 में परिणाम जारी किया. 43 सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी गयी. सफल होनेवाले अभ्यर्थियों में से 26 ऐसे अभ्यर्थी थे, जिनके पास आवेदन की अंतिम तिथि तक इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर (इंडिया) का सर्टिफिकेट नहीं था. जेपीएससी ने 318 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया था, जिनमें से 186 अभ्यर्थी वैसे थे, जिन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर (इंडिया) का सर्टिफिकेट आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जमा की थी. सर्टिफिकेट जमा करने के लिए जेपीएससी ने छूट प्रदान की थी. बाद में अभ्यर्थी स्वप्निल म्यूरेश, विवेक हर्षल की ओर से रिट याचिका दायर कर रिजल्ट को चुनौती दी गयी. एकल पीठ ने रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसे अपील याचिका दायर कर चुनौती दी गयी थी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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