झारखंड : आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री की होगी जांच, छह माह में रिपोर्ट देंगे आयुक्त

झारखंड विधानसभा
आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री और लीज पर दिये जाने के मामले की जांच झारखंड सरकार करायेगी. विधायक लोबिन हेंब्रम ने सदन में यह मुद्दा उठायी थी.
रांची: सीएनटी-एसपीटी और पेसा एक्ट का उल्लंघन कर छोटानागपुर और संताल परगना में जमीन की खरीद-बिक्री और लीज पर दिये जाने के मामले की जांच राज्य सरकार करायेगी. छोटानागपुर और संताल परगना के आयुक्त को जांच का जिम्मा दिया गया है. शनिवार को सदन के आखिरी दिन लोबिन हेंब्रम ने सीएनटी-एसपीटी का उल्लंघन कर इन क्षेत्रों में जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के खिलाफ गैर सरकारी संकल्प लाया था. भू राजस्व मंत्री रामेश्वर उरांव ने सदन में सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि यह गंभीर मामला है. आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री हुई है. राज्य सरकार इन दोनों प्रमंडल को आयुक्तों से ऐसे नियम विरुद्ध खरीद-बिक्री की जांच करायेगी.
45 दिनों को अंदर आयुक्तों को जांच शुरू करनी है और छह महीने के अंदर इसकी रिपोर्ट देनी है. झामुमो विधायक लोबिन हेंब्रम ने गैर सरकारी संकल्प के तहत मामला उठाते हुए कहा कि ऐसा कानून रहने के बावजूद आदिवासियों का हक मारा गया है. उन्होंने कहा, पेसा – 1996 एक सशक्त केंद्रीय कानून है. जो अनुसूचित क्षेत्रों की पांचवीं अनुसूची के राज्यों को लिए रक्षा कवच है. यह कानून 24 दिसंबर 1996 को ही संसद में पारित किया है. इस कानून को तत्कालीन बिहार सरकार ने दक्षिण बिहार के अनुसूचित क्षेत्रों में छह मार्च 1998 को लागू कर दिया था. लेकिन इसका भी उल्लंघन जारी है. केंद्रीय कानून के उल्लंघन की जांच जरूरी है.
श्री हेंब्रम ने गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से मांग किया कि तीनों केंद्रीय कानून को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने आदिवासी-मूलवासी को बचाने की मांग की. विधायक श्री हेंब्रम ने बताया कि भुइंहरी डाली कतारी सरना दोन की जमीन लूटी जा रही है. शहर अंचल में पटना निवासी रिपुंजय प्रसाद सिंह ने जाली हुकूमनामा से हासिल कर लिया. यह गंभीर मामला है और आदिवासी को मिटाने की साजिश है. श्री हेंब्रम ने इसी तरह संताल परगना में एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर जमीन खरीद-बिक्री के मामले की जानकारी दी.
पहले बन चुकी है विधानसभा कमेटी
सीएनटी-एसपीटी एक्ट के उल्लंघन के मामले की सरकार ने पहले भी जांच करायी है. झामुमो नेता स्टीफन मरांडी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था. कमेटी ने राज्यभर से लोगों की शिकायत मांगी थी. विधानसभा कमेटी ने अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है.
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