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झारखंड में ऐसे मन रहा है छठ महापर्व, बाजारों की बढ़ी रौनक, देखें PHOTOS

Updated at : 18 Nov 2023 5:10 PM (IST)
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झारखंड में ऐसे मन रहा है छठ महापर्व, बाजारों की बढ़ी रौनक, देखें PHOTOS

छठ महापर्व बिहार-झारखंड का महत्वपूर्ण त्योहार है. हर वर्ग के लोग श्रद्धा से इस प्रकृति पर्व की तैयारी करते हैं. स्वच्छता का इसमें खास महत्व है. झारखंड में इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है. बाजारों की रौनक बढ़ गई है. छठव्रती खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू कर देंगी. तस्वीरों में देखें तैयारी.

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छठ महापर्व कभी झारखंड-बिहार का लोक पर्व हुआ करता था. आज यह पूरी दुनिया में पहुंच गया है. छठ महापर्व ने राष्ट्रीय पर्व का रूप ले लिया है. गांव से लेकर शहर और महानगर तक में लोग महापर्व मनाते हैं. झारखंड की राजधानी रांची भी छठ महापर्व के लिए तैयार है. नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय इस महापर्व की शुरुआत हो जाती है.

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नहाय-खाय के अगले दिन खरना होता है. उस दिन खीर-पूड़ी का प्रसाद बनता है और श्रद्धालुओं में इसका वितरण किया जाता है. खरना के दिन से ही छठ महापर्व के लिए फल-फूल की खरीदारी शुरू हो जाती है. खरना के दिन ही ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं पिसवाने का विधान है.

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खरना के दिन शाम को छठव्रती सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करतीं हैं, इसके बाद अन्य लोगों में प्रसाद का वितरण किया जाता है. इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है. अगले दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. उसके अगले दिन सुबह में उगते भगवान भास्कर को अर्घ्य के साथ छठ महापर्व का समापन होता है.

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छठ महापर्व में तरह-तरह के फलों से सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसलिए फलों की काफी बिक्री होती है. रांची के धुर्वा स्थित शालीमार बाजार में फलों का बाजार सज गया है. जिनके घरों में छठ पूजा होती है, वे लोग खरीदारी के लिए बाजार पहुंचने लगे हैं.

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नारियल एक ऐसा फल है, जिसकी लगभग हर पूजा में जरूरत पड़ती है. छठ में भी नारियल का विशेष महत्व होता है. झारखंड में नारियल की खेती नहीं होती. इसलिए दक्षिण के राज्यों के विशेष तौर से नारियल मंगवाये जाते हैं. इसके बाद यह खुदरा बाजार में पहुंचता है.

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छठ में गेहूं से लेकर फल और सूप-दउरा तक सब नया होना चाहिए. इसलिए सूप और दउरा की खरीदारी के लिए भी अभी से छठ करने वाले लोग बाजार आने लगे हैं. खरना और उसके अगले दिन बाजार में इन सामानों की खरीदारी करने वालों की भीड़ उमड़ती है.

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छठ पूजा में कई छोटी-छोटी चीजों की भी जरूरत पड़ती है. इसका भी बाजार सज गया है. इसमें माला, सिंदूर औरअन्य चीजें होतीं हैं. हवन की सामग्री भी इन्हीं दुकानों में बिक रहीं हैं.

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अलग-अलग जगहों से ईख भी बाजार में पहुंच गए हैं. एक दिन पहले तक ट्रकों से ईख रांची पहुंचे. इसके बाद चारों ओर बाजारों में इसे भेजा गया. छठ के दोनों दिन यानी शाम और सुबह के अर्घ्य के दौरान ईख की जरूरत पड़ती है.

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छठव्रतियों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन भी अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर रहा है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद छठ घाटों पर जाकर वहां की साफ-सफाई और व्यवस्था का जायजा लिया. अफसरों को निर्देश दिया कि छठव्रतियों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए.

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छठ महापर्व में महिला व्रती एक-दूसरे को सिंदूर लगातीं हैं. सिंदूर नाक से लेकर सिर तक लगाया जाता है. इसका अपना महत्व है. नहाय-खाय का दिन हो या खरना का. हर दिन नाक से सिर तक सिंदूर का विधान है. छठव्रती प्रसाद लेने आने वाली महिलाओं को भी ऐसे ही सिंदूर लगातीं हैं. उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ महापर्व का समापन होता है. इस वर्ष 19 नवंबर को शाम का अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि 20 नवंबर को सुबह के अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन होगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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