Jharkhand: अक्तूबर से एक डॉक्टर के भरोसे ही रह जायेगा होटवार जेल अस्पताल

Updated at : 27 Aug 2022 12:47 PM (IST)
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Jharkhand: अक्तूबर से एक डॉक्टर के भरोसे ही रह जायेगा होटवार जेल अस्पताल

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में लंबे इंतजार के बाद भी खाली डॉक्टरों के 11 पद पर नियुक्ति नहीं हो रही है. फिलहाल, दो डॉक्टर जेल अस्पताल की व्यवस्था संभाल रहे हैं. उनमें से एक अगले माह के अंत तक रिटायर होने वाले हैं.

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अजय दयाल/बिपिन सिंह, रांची

Birsa Munda Central Jail News: बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में लंबे इंतजार के बाद भी खाली डॉक्टरों के 11 पद पर नियुक्ति नहीं हो रही है. फिलहाल, दो डॉक्टर जेल अस्पताल की व्यवस्था संभाल रहे हैं. उनमें से एक अगले माह के अंत तक रिटायर होने वाले हैं. इसके बाद जेल में बंद करीब 3500 सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों के इलाज पर संकट खड़ा हो जायेगा. इधर, जेल अधीक्षक हामिद अख्तर ने 12 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिख कर जेल अस्पताल में तत्काल डॉक्टर की नियुक्ति की मांग की है.

अब तक थे पांच डॉक्टर

जानकारी के अनुसार, होटवार जेल की शुरुआत से ही वहां पांच डॉक्टर पूरा जेल अस्पताल संभाल रहे थे. इनमें से एक डॉक्टर दिसंबर 2020 में सेवानिवृत्त हो गये. चार डॉक्टरों में से दो चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हरिश्चंद्र और डॉ सत्येंद्र गृह विभाग के आदेश पर जुलाई 2022 में वापस सदर अस्पताल रांची बुला लिया गया. फिलहाल, सेवारत दो में एक डॉक्टर इस साल सितंबर में सेवानिवृत्त हो जायेंगे. उसके बाद बिरसा मुंडा जेल एक डॉक्टर के भरोसे रहा जायेगा. जेल प्रशासन के अनुसार, यहां डॉक्टरों के कुल 11 पद सृजित हैं. इस मामले में मानवाधिकार आयोग भी समय-समय पर सुधारात्मक उपायों का सुझाव दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जेल में नियमों का पालन किया जा रहा है.

वेबसाइट देख कर रिम्स गये तो शायद नहीं मिलेंगे डॉक्टर

अगर आप रिम्स की वेबसाइट देख कर यहां किसी विशेष डॉक्टर से इलाज कराने पहुंचें, तो हो सकता है कि वह डॉक्टर आपको न मिलें. ऐसा इसलिए, क्योंकि रिम्स की वेबसाइट पर जो ओपीडी शेड्यूल अपलोड है, उसे करीब छह महीने से अपडेट नहीं किया गया है. फिलहाल ऐसा ही हो रहा है. वेबसाइट पर ओपीडी शेड्यूल अपडेट नहीं होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दूसरे जिलों से आनेवाले मरीजों को हो रही है. इनमें कई ऐसे मरीज हैं, जो लंबे समय से रिम्स के किस एक ही विशेषज्ञ से परामर्श ले रहे हैं. ऐसे लोग डॉक्टर बदलना नहीं चाह रहे हैं. ऐसे मरीज जब वेबसाइट पर शेड्यूल देख कर ओपीडी में पहुंच रहे हैं, तो उन्हें पता चल रहा है कि उनके डॉक्टर का ओपीडी का दिन बदल गया है. ओपीडी में बैठे डॉक्टर उन्हें पुरानी पर्ची लेकर संबंधित डॉक्टर के पास इंडोर (विभाग के वार्ड) में जाने को कहते हैं. लेकिन, वहां जाने पर मरीज को ओपीडी दिन आने को कहा जा रहा है.

ओपीडी शेड्यूल में ऐसी-ऐसी गलतियां

रिम्स की वेबसाइट पर कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) और शिशु विभाग का पुराना ओपीडी शेड्यूल दिख रहा है. सीटीवीएस के विभागाध्यक्ष डॉ विनीत महाजन करीब चार माह से विभाग में सेवा दे रहे हैं, लेकिन उनका नाम अब तक ओपीडी शेड्यूल में नहीं है. वहीं, शिशु विभाग में सेवानिवृत्त हो चुकी डॉ मिन्नी रानी अखौरी का नाम अब भी ओपीडी शेड्यूल में दिख रहा है.

क्या कहते हैं

वेबसाइट पर गलत ओपीडी शेड्यूल की जानकारी मिली है. संबंधित अधिकारी को इसे सुधारने को कहा गया है. एक-दो दिन में ओपीडी शेड्यूल सुधार कर अपलोड कर दिया जायेगा.

– डॉ हिरेंद्र बिरुआ, अधीक्षक, रिम्स

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