आंदोलनकारियों के झारखंड बंद का मिलाजुला असर, जानें किन जिलों की क्या थी स्थिति

Published by : Sameer Oraon Updated At : 11 Sep 2024 2:51 PM

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आंदोलनकारियों द्वारा आहूत झारखंड बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला है. बोकारो, गुमला और पलामू के इलाकों में सड़क जाम कर दिया गया. वहीं कई जिलों में आम दिनों की तरह ही स्थिति सामान्य रही.

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रांची : झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने बुधवार को झारखंड बंद (Jharkhand Bandh) अह्वान किया था. जिसका मिला जुला असर देखने को मिला है. कई जिलों में इसका कोई असर देखने को नहीं मिला तो वहीं कहीं कहीं पर इसका हल्का प्रभाव देखने को मिला. बोकारो, गुमला पलामू के कई इलाकों में सड़क जाम कर दिया गया. जिससे राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. कुछ समय के लिए वाहनों का परिचालन थम गया.

बोकारो और गुमला के इन इलाकों में रहा सड़क जाम

बोकारो के चास जोधाडीह मोड़ और जैनामोड़ फोरलेन समेत कई स्थानों पर आंदोलनकारियों ने सड़क जाम कर दिया. सुबह 6 बजे से वे सड़कों पर जाकर बैठ गये. वहीं, गुमला के झारखंड और छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर स्थित माझाटोली गांव व पालकोट, बसिया, और भरनो नेशनल हाईवे को दोपहर एक बजे तक जाम कर दिया गया था. सभी आंदोलनकारी सुबह में ही अपने पारंपरिक हथियार लेकर सड़कों पर उतर आए. जबकि खूंटी में इसका बहुत ज्यादा असर देखने को नहीं मिला. सभी दुकानें आम दिनों की तरह खुली रही. वाहनों की आवाजाही भी सामान्य दिनों की तरह रही.

बोकारो में बंद का क्या असर रहा

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के सदस्यों ने बोकारो के चास जोधाडीह मोड़ चौक पर सुबह छह बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक जाम रखा. आंदोलनकारियों ने ढोल नगाड़े के साथ राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान जमकर जारेबाजी की. मोर्चा के सदस्यों ने आवश्यक सेवाओं को छोड़कर चास में मौजूद सभी दुकानों को बंद कराया. दोपहर तक मेडिकल, दूध व फल – सब्जी का दुकान छोड़कर ज्यादातर दुकान भी बंद रहा. जोधाडीह मोड़ चौक जाम होने के कारण धनबाद, चंदनकियारी व पुरुलिया मुख्य पथ पर भारी वाहनों की लंबी कतार लग गई.

पलामू के किस इलाके में आंदोलनकारियों ने किया सड़क जाम

पलामू के रेड़मा चौक पर कुछ देर आंदोलनकारियों ने सुबह में सड़क जाम कर दिया. जिससे कुछ देर तक वाहनों का परिचान ठप हो गया. बाद में पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और सड़क जाम कर रहे लोगों को थाने ले आई. वहीं, लातेहार की बता करें तो वहां बंद कोई भी असर देखने को नहीं मिला. आम दिनों की तरह दुकानें व सड़कें गुलजार रही. गिरिडीह में भी यही स्थिति देखने को मिली.

किस वजह से बुलाया गया था बंद

झारखंड बंद का आह्वान करने वाले लोगों का कहना था कि अलग राज्य करने अहम भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों को आज भी सम्मान सहित अन्य मांगों को लेकर जूझना पड़ रहा है. सूबे में झारखंड मुक्ति मोर्चा का ही शासन है. कई बार घोषणाएं तो की जाती है, लेकिन उस पर अमल अब तक नहीं हुआ है. आंदोलनकारियों की मांग है कि उन्हें 50 हजार रुपये मासिक पेंशन देने समेत आश्रितों को सरकारी नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ-साथ मेडिकल, यात्रा सहित मूलभूत सुविधाएं मुहैया करायी जाए.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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