आदिवासी समाज में जतरा का है सामाजिक व धार्मिक महत्व

Updated at : 09 Oct 2025 10:02 PM (IST)
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आदिवासी समाज में जतरा का है सामाजिक व धार्मिक महत्व

राज्य का दो दिवसीय मुड़मा जतरा मेला गुरुवार को शांतिपूर्वक संपन्न हो गया

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प्रतिनिधि, मांडर.

राज्य का दो दिवसीय मुड़मा जतरा मेला गुरुवार को शांतिपूर्वक संपन्न हो गया. जतरा के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की व जेएससीए के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा के साथ जतरा स्थल में स्थित शक्ति खूंटा की पूजा-अर्चना की. राज्य की सुख शांति का आशीर्वाद मांगा. मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि आदिवासी समाज में जतरा का सामाजिक और धार्मिक महत्व है. जतरा में आदिवासी समाज के लोग अपने सामाजिक और धार्मिक विचारों का आदान-प्रदान करते हैं. मुड़मा जतरा मेला में देश व विदेश के हजारों लोग शामिल होकर साक्षी बने हैं. हमें इसे और भव्य करने की आवश्यकता है. मुड़मा जतरा के लिए आवश्यकता के अनुसार जमीन का अधिग्रहण करना होगा. जतरा स्थल में शक्ति खूंटा आदिवासियों का तीर्थस्थल भी है. इसके लिए बगैर किसी क्लेश व विवाद के हम इसकी जमीन के अधिग्रहण के लिए आगे बढ़ेंगे. कहा कि पिछले 25 वर्षों में धार्मिक, सामाजिक, वैचारिक व राजनीतिक चेतना आयी है. कृषि मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की ने कहा कि मुड़मा जतरा मेला का देश-विदेश में भी नाम है. हमारी जिम्मेवारी है कि यह आगे और भी भव्य रूप से आयोजित हो. समारोह में जेएससीए के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव ने सालोंसाल से मुड़मा जतरा मेला के सफल आयोजन के लिए सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा व राजी पाड़हा जतरा संचालन समिति की टीम को बधाई दी. कहा कि मुड़मा जतरा मेला आदिवासी समाज की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है. इसे हम सभी को मिल कर आगे बढ़ाने का प्रयास करना होगा. समारोह में राजी पाड़हा प्रार्थना सभा के विद्यासागर केरकेट्टा ने स्वागत भाषण व संचालन रवि तिग्गा ने किया. अतिथियों का सरना गमछा व पौधा देकर सम्मानित किया गया.

नगाड़े की थाप पर थिरकते जतरा स्थल पहुंचे लोग :

40 पाड़हा के खोड़हा अपने परंपरागत पाड़हा निशान काठ के हाथी, घोड़े, मगरमच्छ, बाघ, चीता, मछली, टोपहर, झंडे, कंड़सा व रम्पा-चम्पा के साथ मांदर व नगाड़े की थाप पर थिरकते जतरा स्थल पर पहुंचे. सभी ने जतरा स्थल पर स्थित शक्ति खूंटा की परिक्रमा की. ऐसी मान्यता है कि जतरा में 40 पाड़हा के खोड़हा के साथ तमाम गांव के देवी-देवता शामिल होते हैं और जतरा स्थल पर स्थित शक्ति स्थल की परिक्रमा करते हैं. जतरा में नेपाल, भूटान, बांग्ला देश, असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार समेत कई पाड़हा के पाड़हा राजा लकड़ी के हाथी, घोड़ा, व ऊंट पर सवार होकर अपने खोड़हा के साथ जतरा में शामिल हुए.

जतरा में उपस्थित लोग :

जतरा में भगवान बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा, राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा के मणिलाल केरकेट्टा, विद्यासागर केरकेट्टा, जतरू उरांव, जतरा संचालन समिति के जगराम उरांव, अनिल उरांव, रंथू उरांव, करमा उरांव, पाड़हा दिवान भौवा उरांव, शिव उरांव, कमले किस्पोट्टा, सुशीला तिर्की, विष्णुदेव उरांव, उदय उरांव, मनोज उरांव, रंथू उरांव, विश्वनाथ तिर्की, ममता उरांव, सुदामा उरांव, अजय वर्मा, अनुराग लकड़ा सहित अन्य मौजूद थे.

राज्य का ऐतिहासिक मुड़मा जतरा शांतिपूर्वक संपन्न

मुड़मा जतरा मेला समारोह में आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहाB

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