रांची में सरना झंडागड़ी के साथ तेज हुई सरहुल की तैयारियां

Published by :Shaurya Punj
Published at :16 Mar 2026 9:55 AM (IST)
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Sarhul 2026

सरना झंडागड़ी आरंभ

Sarhul 2026: रांची में सरहुल महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं. फांसी टुंगरी में सरना झंडागड़ी और प्रार्थना सभा के साथ प्रकृति पूजा की परंपरा निभाते हुए सुख-समृद्धि की कामना की गई.

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Sarhul 2026: झारखंड की राजधानी रांची में सरहुल महोत्सव को लेकर तैयारियां अब तेज हो गई हैं. इस अवसर पर केंद्रीय सरना समिति के नेतृत्व में फांसी टुंगरी स्थित पहाड़ी मंदिर परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरना झंडागड़ी और प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सरना धर्म के अनुयायी शामिल हुए और ढोल-नगाड़ों के साथ पूजा-अर्चना की गई. इस वर्ष सरहुल पर्व 21 मार्च, शनिवार को मनाया जाएगा.

पारंपरिक रीति से गाड़ा गया सरना झंडा

कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिकों ने किया. इस दौरान पाहन द्वारा पहाड़ की चोटी पर सरना झंडा गाड़कर प्रकृति और समस्त जीव जगत की खुशहाली की कामना की गई. पूजा में मानव जाति, पशु-पक्षी, वनस्पति, पेड़-पौधे, नदी-नाले और पहाड़-पर्वत में रहने वाले सभी जीवों के सुख, शांति और स्वास्थ्य की प्रार्थना की गई.

पूर्वजों की परंपरा से जुड़ा है स्थल

अजय तिकों ने बताया कि फांसी टुंगरी आदिवासी समाज के पूर्वजों का पवित्र पूजा स्थल रहा है. पहले यहां स्वर्गीय बुधवा पाहन पूजा किया करते थे. आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सरना धर्मावलंबी यहां एकत्र होकर प्रकृति पूजा की परंपरा निभाते हैं.

सरहुल पर्व को लेकर दिया गया संदेश

कार्यक्रम में सिरमटोली पहनाई अनिता हंस, अजय कच्छप और नीरज मुंडा ने समाज के लोगों से अपील की कि सरहुल के दौरान अपने घरों में सरना झंडा लगाएं और पर्व के समय नशा-पान से दूर रहें. सरना समिति के पदाधिकारी खाना उरांव ने भी कहा कि आदिवासी समाज को अपने पारंपरिक पर्व-त्योहार और रीति-रिवाजों को उसी स्वरूप में बनाए रखना चाहिए.

ये भी पढ़ें: झारखंड का प्रसिद्ध सरहुल पर्व इस दिन, साल वृक्ष की पूजा से जुड़ी अनोखी मान्यता

प्रकृति और संस्कृति का पर्व

राजीव पड़हा सरना प्रार्थना सभा के अध्यक्ष नीरज मुंडा ने बताया कि फांसी टुंगरी में सरना झंडागड़ी की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है. कार्यक्रम के दौरान वार्ड 29 के पार्षद सुनील यादव ने सरना धर्मावलंबियों का स्वागत माला पहनाकर किया.

सरहुल पर्व आदिवासी संस्कृति में प्रकृति पूजा और सामूहिक एकता का प्रतीक माना जाता है. इस पर्व के माध्यम से समाज प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और सम्मान व्यक्त करता है.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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