पंचायतों व नगर निकायों को सरकारी विभागों ने कितना अधिकार दिया : वित्त आयोग

Updated at : 30 May 2024 11:56 PM (IST)
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झारखंड में पंचायती राज अधिनियम के तहत कितने अधिकार पंचायतों को दिये गये हैं, यह सवाल झारखंड राज्य वित्त आयोग ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से पूछा है.

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रांची. झारखंड में पंचायती राज अधिनियम के तहत कितने अधिकार पंचायतों को दिये गये हैं, यह सवाल झारखंड राज्य वित्त आयोग ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से पूछा है. आयोग द्वारा सभी विभागों को पत्र लिखकर पूछा गया है कि 73वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत पंचायतों को कुल 29 अधिकार दिये जाने हैं. इनमें कितने अधिकार विभाग द्वारा दे दिये गये हैं और कितने नहीं दिये गये हैं. नहीं दिये जाने के पीछे वजह क्या है. इसी तरह 74 संविधान संशोधन विधेयक के तहत नगर निकायों को दिये जाने वाले अधिकारों के बाबत भी जानकारी मांगी गयी है.

ये अधिकार पंचायतों को दिये जाने हैं

73वें संविधान संशोधन विधेयक के 11वीं अनुसूची में कुल 29 विषय शामिल किये गये हैं. जिसकी बाबत जानकारी मांगी गयी गयी है कि पंचायतों को कितना अधिकार दिया गया है. इनमें कृषि (कृषि विस्तार शामिल), भूमि विकास, भूमि सुधार कार्यान्वयन, चकबंदी और भूमि संरक्षण, लघु सिंचाई, जल प्रबंधन और जल-विभाजक क्षेत्र का विकास, पशुपालन, डेयरी उद्योग और कुक्कुट पालन, मत्स्य उद्योग, सामाजिक वानिकी और फार्म वानिकी, लघु वन उपज, लघु उद्योग जिसके अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी शामिल हैं. खादी, ग्राम उद्योग एवं कुटीर उद्योग, ग्रामीण आवासन, पेयजल, ईंधन और चारा, सड़कें, पुलिया, पुल, फेरी, जलमार्ग और अन्य संचार साधन, ग्रामीण विद्युतीकरण, जिसके अंतर्गत विद्युत का वितरण शामिल है, अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम, शिक्षा, जिसके अंतर्गत प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय भी हैं. तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा, प्रौढ़ और अनौपचारिक शिक्षा, पुस्तकालय, सांस्कृतिक क्रियाकलाप, बाजार और मेले, स्वास्थ्य और स्वच्छता (अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और औषधालय), परिवार कल्याण, महिला और बाल विकास, समाज कल्याण (दिव्यांग और मानसिक रूप से मंद व्यक्तियों का कल्याण), दुर्बल वर्गों का तथा विशेष कर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का कल्याण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सामुदायिक संपत्तियों की देख-रेख.

नगर निकायों को जो अधिकार दिये जाने हैं

संविधान के 74वें संशोधन के अनुच्छेद 12 के तहत नगर निकायों को कार्य करने के लिए कई अधिकार दिये गये हैं. ये अधिकार राज्य सरकार द्वारा नगर निकायों को दिये जाने हैं. इनमें मुख्यत: 1.नगर नियोजन सहित शहरी नियोजन, 2. भूमि उपयोग एवं भवन निर्माण का विनियमन, 3. आर्थिक एवं सामाजिक विकास की योजना बनाना, 4. सड़कें और पुल, 5. घरेलू, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए जल आपूर्ति, 6. सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, 7. अग्निशमन सेवाएं. 8. शहरी वानिकी, पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी पहलुओं को बढ़ावा देना, 9. विकलांगों और मानसिक रूप से विकलांगों सहित समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा करना, 10. मलिन बस्ती सुधार और उन्नयन, 11. शहरी गरीबी उन्मूलन, 12. शहरी सुख-सुविधाओं और सुविधाओं जैसे पार्क, उद्यान, खेल के मैदान का प्रावधान, 13. सांस्कृतिक, शैक्षिक और सौंदर्य संबंधी पहलुओं को बढ़ावा देना, 14. कब्रिस्तान और श्मशान भूमि; शवदाह गृह, श्मशान भूमि और विद्युत शवदाह गृह, 15. पशुपालन केंद्र, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण, 16. जन्म और मृत्यु के पंजीकरण सहित जीवन संबंधी आंकड़े, 17. सार्वजनिक सुविधाएं जिनमें स्ट्रीट लाइटिंग, पार्किंग स्थल, बस स्टॉप और सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं. तथा 18. बूचड़खानों और चर्मशोधन कारखानों का विनियमन शामिल है.

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