होटवार जेल रांची के अस्पताल में मरीजों को पानी जैसा मिलता है दूध, ठंड में नहीं मिलता कंबल

Updated at : 27 Dec 2023 4:49 AM (IST)
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होटवार जेल रांची के अस्पताल में मरीजों को पानी जैसा मिलता है दूध, ठंड में नहीं मिलता कंबल

कैदियों ने बताया है कि ठंड में उन्हें आवश्यकता अनुसार कंबल भी नहीं दिया जाता है, जिससे कई कैदी बीमार होकर असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं.

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रांची : होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा रांची में जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं. जेल प्रशासन कैदियों को उनके अधिकार के अनुसार खाना के साथ कई सुविधाएं नहीं देता है. कैदियों ने जेल में हो रही कई अनियमिताओं के संबंध में जानकारी दी है. जेल के अस्पताल में रहने वाले बीमार कैदियों को डॉक्टर दवा के साथ दूध पीने की हिदायत देते हैं, लेकिन उन्हें जो दूध दिया जाता है उसमें 75 प्रतिशत पानी मिला होता है. ऐसे में कैदी ठीक हाेने की बजाय और बीमार हो जाते हैं.

जब कैदी गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं, तो उन्हें रिम्स में भर्ती कर दिया जाता है. वहां कई कैदी ठीक हो जाते हैं जबकि कई गंभीर कैदियों की मौत हो जाती है. इन बातों की जानकारी उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा के नेतृत्व में औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को मिली. 200 कैदियों से बातचीत के दौरान उक्त सारी बातें सामने आयी. कैदियों ने बताया है कि ठंड में उन्हें आवश्यकता अनुसार कंबल भी नहीं दिया जाता है, जिससे कई कैदी बीमार होकर असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं.

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कैदियों को भेजे गये पैसोंं की होती है बंदरबांट

कैदियोंं ने उपायुक्त की टीम को बताया कि उनके परिजन जब उन्हें पैसा भेजते हैं, तो उस पैसे का 15 प्रतिशत जेलकर्मी रख लेते है़ं परिजनों द्वारा दिये गये पैसों का 10 प्रतिशत गेट पर तथा पांच प्रतिशत अंदर कक्षपाल को देना होता है. जैसे किसी कैदी के परिजन उन्हें 1000 रुपये भेजते हैं, तो उनके पास 850 रुपये ही पहुंचता है. कैदियों ने यह भी बताया कि कैंटीन में हर दिन शाम को अलग-अलग तरह का नाश्ता बनाया जाता है. कैंटीन के सामानों की कीमत भी बाजार से अधिक होती है.

पिछले 10 वर्षों से एक ही ठेकेदार जेल में सप्लाई कर रहे हैं खाद्य सामग्री

कैदियोंं ने अधिकारियोंं को बताया कि जेल में एक ही ठेकेदार वर्षों से खाद्य सामग्री सप्लाई कर रहे हैं. इस कारण यहां घटिया खाद्य सामग्री मिलती है. कैदियों ने बताया कि चावल के साथ जो दाल दिया जाता है, वह शायद कोई जानवर भी नहीं खाना चाहेगा. दाल में पानी की मात्रा इतनी अधिक होती है कि उसमें दाल की तलाश करनी पड़ती है. यह सारी जानकारी मिलने पर उपायुक्त की टीम अचंभित रह गयी.

10 रुपये में मिलता है पांच-छह रुपये का अखबार

कई कैदियोंं को प्रतिदिन अखबार पढ़ने की आदत होती है. कक्षपाल उन्हें अखबार उपलब्ध कराते हैं. उसकी कीमत पांच और छह रुपये हाेती है. लेकिन उन कैदियों से अखबार का 10 रुपये लिया जाता है. यह सारी जानकारी जेलर व अधीक्षक को भी है, लेकिन वे लोग इसकी अनदेखी कर देते हैं

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