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GEL कलीसिया के 178 वर्षों का सफर आज पूरा, चार लूथेरन गोस्सनर मिशनरी ने ऐसे की थी इसकी शुरुआत

जीएल चर्च के धर्मगुरु जुएल लकड़ा (13 सितंबर 1894-आठ अक्तूबर 1974) एक धर्म सेवक होने के साथ एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे. वे जीइएल चर्च के अध्यक्ष व प्रमुख अध्यक्ष रहे.

मनोज लकड़ा, रांची :

गोस्सनर इवांजेलिकल लूथेरन कलीसिया की स्थापना के 178 साल दो नवंबर को पूरे हो रहे हैं. जर्मनी से बर्मा जा रहे चार लूथेरन गोस्सनर मिशनरी जब रास्ते में कोलकाता में रुके थे, तब उन्होंने वहां की सड़कों पर छोटानागपुर के आदिवासियों को कुली का काम करते देखा. पूछने पर पता चला कि छोटानागपुर में जमींदारों की प्रताड़ना, बेगारी कराने और जमीन लूट से त्रस्त होकर वे काम की तलाश में कोलकाता आये थे. परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि उन मिशनरियों का बर्मा जाना टल गया और ऐसे में उन्होंने छोटानागपुर आने का निर्णय लिया. ये चारों मिशनरी दो नवंबर 1845 को रांची पहुंचे. वे छोटानागपुर आनेवाले किसी भी चर्च के पहले मिशनरी थे. इसके 178 साल बीत चुके हैं. इस चर्च ने इस क्षेत्र के आदिवासियों के लिए क्या किया, यह देखना रोचक होगा.

जीइएल चर्च छाेटानागपुर व असम 128 स्कूल कर रहे संचालित :

रांची में जीइएल चर्च गोस्सनर कॉलेज, बेथेसदा वीमेंस टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, बेथेसदा प्राइमरी टीचर्स एजुकेशन कॉलेज, बेथेसदा वीमेंस इंटरमीडिएट कॉलेज, बेथेसदा वीमेंस कॉलेज का संचालन कर रहा है, तो जीइएल चर्च छाेटानागपुर व असम द्वारा 128 स्कूल चलाये जा रहे हैं. बेथेसदा स्कूल पूरे छोटानागपुर का पहला स्कूल है, जहां बालिकाओं को पढ़ने का अवसर मिला. स्कूल की शुरुआत एक दिसंबर 1852 को हुई थी. इसके अतिरिक्त कई अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और समाज सेवा संस्थाएं भी चलायी जा रही हैं. चर्च से जुड़े कई लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखायी है.

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धर्मगुरु और कुशल राजनीतिज्ञ थे जुएल लकड़ा :

जीएल चर्च के धर्मगुरु जुएल लकड़ा (13 सितंबर 1894-आठ अक्तूबर 1974) एक धर्म सेवक होने के साथ एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे. वे जीइएल चर्च के अध्यक्ष व प्रमुख अध्यक्ष रहे. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 17 अप्रैल 1963 को उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था. अविभाजित बिहार में वर्ष 1957 में विधान परिषद के सदस्य मनोनीत किये गये. छोटानागपुर के आदिवासियों के शैक्षणिक व आर्थिक विकास के लिए आवाज बुलंद की. अपनी सेवानिवृत्ति के बाद 1969 में स्व इंदिरा गांधी के कहने पर यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के निदेशक मंडली में शामिल हुए. रांची विवि के सीनेट सदस्य भी रहे.

डॉ निर्मल मिंज ने आदिवासी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करायी :

बिशप (स्व) डॉ निर्मल मिंज हमेशा आदिवासियों की भाषा के पक्षधर रहे. गोस्सनर कॉलेज, रांची के संस्थापक प्राचार्य के रूप में सर्वप्रथम जनजातीय भाषाओं के अध्ययन व अध्यापन की औपचारिक शुरुआत की थी.

चर्च में कुडुख में धर्मविधि चलायी और कुडुख भाषा के गीत की परंपरा शुरू की. बाइबल का कुडुख में अनुवाद कराया. बिशप निर्मल मिंज की पहल पर 1980 में इंडियन काउंसिल ऑफ इंडिजिनस एंड ट्राइबल पीपुल की स्थापना हुई, जिसने संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर आदिवासियों की बात रखी. 1980 में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) से जुड़े. 1980 में ही एनडब्ल्यूजीइएल चर्च के बिशप बने.

भारतीय सांख्यिकी सेवा में झारखंड से पहली अधिकारी बनीं प्रवीण होरो :

प्रवीण होरो भारतीय सांख्यिकी सेवा (आइएसएस) में झारखंड की पहली अधिकारी बनीं. हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के महानिदेशक (डीजी) के रूप में सेवानिवृत्त हुई हैं. उन्होंने गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आइआइएम, लखनऊ, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (एएससीआइ) हैदराबाद, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑस्ट्रेलिया, काहिरा डेमोग्राफिक सेंटर, मिस्र आदि में विशेष प्रशिक्षण भी लिया है.

ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित हैं हॉकी टीम की पूर्व कप्तान सुमराय टेटे :

सुमराय टेटे भारत की महिला राष्ट्रीय हॉकी टीम की सदस्य रही हैं. लेफ्ट हाफ की तेजतर्रार खिलाड़ी सुमराय अपने बेहतरीन खेल के दम पर 1996 में भारतीय सीनियर टीम में शामिल हुईं. उन्हें वर्ष 2017 में प्रतिष्ठित ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

वे उस टीम की सदस्य थीं, जिसने मैनचेस्टर 2002 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था. उनकी यात्रा 2006 में थमी. उस समय भारतीय टीम की कप्तान थीं. 2006 में ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित कॉम्नवेल्थ गेम्स में रजत पदक हासिल किया था. उन्होंने भारतीय सीनियर महिला टीम के साथ-साथ इंडियन रेलवे टीम को भी प्रशिक्षण दिया है.

रूपा रानी तिर्की ने लॉन बॉल में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया :

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में लॉन बॉल में भारत को गोल्ड मेडल दिलानेवाली टीम में शामिल रूपा रानी तिर्की राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेल चुकी हैं. वे बास्केटबॉल भी खेलती थीं. संत अन्ना स्कूल रांची से पढ़ाई की है. गोस्सनर कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है. अभी खेल विभाग में कार्यरत हैं. ब्लू रिबन इवेंट, 2023 विश्व बाॅल चैंपियनशिप में प्रतिनिधित्व करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय टीम ने चुना. एशिया पैसिफिक बाॅल चैंपियनशिप में तीन पदक जीते. 2023 में कुआलालंपुर में 14वीं एशियाई लॉन बाॅल चैंपियनशिप में चौथा स्वर्ण पदक हासिल किया.

आकाशवाणी रांची से पहला नागपुरी कार्यक्रम प्रस्तुत किया :

नवीन मुंडू 91 वर्ष के हैं और डिबडीह में रहते हैं. उन्होंने बताया कि वे आकाशवाणी रांची से नागपुरी भाषा में प्रसारित पहले कार्यक्रम देहाती दुनिया का हिस्सा थे. इस कार्यक्रम में उनके साथ जूलियस तिग्गा, एसेंसिया खेस (जीइएल चर्च के सदस्य) और किशोर सिंह भी रहते थे. नवीन मुंडू ने ऑल इंडिया रेडियो में स्टाफ आर्टिस्ट के रूप में रांची में 1957 से 1960 तक काम किया. आइबी में इंटेलिजेंस ऑफिसर रहे. इंडियन कंफेडरेशन ऑफ इंडिजिनस एंड ट्राइबल पीपुल के संस्थापक सदस्य थे. जीइएल चर्च की जोवाना मिंज भी आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए कार्यक्रम तैयार करती थीं. वे मेकन में सेक्शन ऑफिसर थीं.

Prabhat Khabar News Desk
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