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1973 से झारखंड में अधिकारी थे रेंजर, अब हो जायेंगे कर्मचारी, JPSC ने नियुक्ति करने से किया इनकार

झारखंज वन विभाग के अधिकारी अब कर्मचारी कहलाएंगे, क्योंकि जेपीएससी ने ग्रेड पे कम होने की वजह से नियुक्ति करने से इनकार कर दिया है. जबकि वन क्षेत्र पदाधिकारी 1973 से अधिकारी (गजटेड) संवर्ग में हैं.

Jharkhand News रांची: वन विभाग में कार्यरत वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) को अब कर्मचारी बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. वन क्षेत्र पदाधिकारी 1973 से अधिकारी (गजटेड) संवर्ग में हैं. वन विभाग ने इन्हें कर्मचारी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. वन विभाग की विशेष सचिव शैलजा सिंह के इस प्रस्ताव पर विभाग के अपर मुख्य सचिव का अनुमोदन मिल गया है. इस पर विभागीय मंत्री सह मुख्यमंत्री के विचार के लिए भेजा गया है.

प्रस्ताव में जिक्र किया गया है कि बिहार सरकार के गजट प्रकाशन 1973 द्वारा वन क्षेत्र पदाधिकारियों के पद को राजपत्रित घोषित किया गया है. 2018 में झारखंड में रेंजर की नियुक्ति के लिए वन क्षेत्र पदाधिकारी सेवा (नियुक्ति, प्रोन्नति एवं अन्य सेवा शर्त) नियमावली गठित की गयी. इसके आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गयी थी. लेकिन जेपीएससी ने ग्रेड पे 4200 होने के कारण नियुक्ति करने से इनकार कर दिया. कहा कि इस ग्रेड पे वाले की नियुक्ति कर्मचारी चयन आयोग माध्यम से हो सकती है. इसके आलोक में विभाग ने रेंजर को अराजपत्रित की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव दिया है.

पूर्व सचिव ने माना था राज्य सेवा का अधिकारी :

वन विभाग के पूर्व सचिव इंदू शेखर चतुर्वेदी ने रेंजरों को राज्य वन सेवा का अधिकारी माना था. 1989 में संयुक्त बिहार के समय रेंजरों की बहाली बिहार लोक सेवा आयोग से हुई थी. इनकी सेवा के लिए पांडेय समिति गठित की गयी थी. कमेटी ने रेंजर का वेतनमान 6500 से 10500 रुपये करने की अनुशंसा की है.

पूर्व में तय नियमावली के अतिरिक्त प्रावधान किया गया है कि रेंजर की अनिवार्य योग्यता के साथ-साथ अभ्यर्थी को झारखंड से मैट्रिक या इंटर पास करना अनिवार्य होगा.

हट जायेंगे डीडीओ से :

रेंजर अभी कई जिलों में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के पद पर भी काम कर रहे हैं. अराजपत्रित होते ही रेंजर निकासी और व्ययन पदाधिकारी नहीं रहेंगे.

कर्मचारी बनाने का विरोध किया संघ ने

वन क्षेत्र पदाधिकारी संघ और झारखंड राज्य वन विकास निगम वन क्षेत्र पदाधिकारी संघ ने रेंजर को अधिकारी से कर्मचारी बनाने का विरोध किया है. संघ के महामंत्री दिग्विजय कुमार सिंह और प्रिंस ने कहा है कि वन क्षेत्र पदाधिकारी की नियुक्ति अब तक राज्य सेवा आयोग से होती आयी है. वन विभाग और वित्त विभाग की गलत नीति के कारण ग्रेड पे 4200 कर दिया गया है. इसे बढ़ाया जाना चाहिए. वन क्षेत्र पदाधिकारी को अराजपत्रित करने का प्रस्ताव अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है.

Posted By: Sameer Oraon

Prabhat Khabar News Desk
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