बारिश का डर, तैयारी अधूरी

Author Praveen
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बारिश का डर, तैयारी अधूरी

रांची शहर की गलियों में इन दिनों एक बेचैनी सी दौड़ रही है. मॉनसून बस दरवाजे पर दस्तक देने को है और लोगों के मन में पिछले साल की तस्वीरें फिर से ताजा होने लगी हैं.

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रांची. रांची शहर की गलियों में इन दिनों एक बेचैनी सी दौड़ रही है. मॉनसून बस दरवाजे पर दस्तक देने को है और लोगों के मन में पिछले साल की तस्वीरें फिर से ताजा होने लगी हैं. गली-गली भरा पानी, घरों में घुसा गंदा नाला और कई दिन तक ठप पड़ी जिंदगी. शहर को इस दुहराव से बचाने के लिए रांची नगर निगम ने सफाई अभियान तेज कर दिया है. 400 मजदूर, आठ जेसीबी, 100 ट्रैक्टर और दो सुपर शकर मशीनों की मदद से हर दिन नालों की सफाई हो रही है. बीते 15 दिन में करीब 900 टन गाद हर रोज निकालकर झिरी डंपिंग यार्ड में डंप किया जा रहा है. लेकिन अब भी शहर के कई इलाके ऐसे हैं. जहां नालों की सफाई पूरी तरह से नहीं हुई है. ऐसे में एक बार फिर से बारिश में इन क्षेत्रों के जलमग्न होने की संभावना है.

बांधगाड़ी की चिंता वैसी ही है जैसे हर साल

बांधगाड़ी के लोग जानते हैं कि उनकी मुश्किलें कब शुरू होंगी, जैसे ही पहली झमाझम बारिश होगी. पिछले साल तो हालात इतने बिगड़े कि एनडीआरएफ को बुलाना पड़ा. इस साल भी नाले के ऊपर अतिक्रमण जस का तस है. सफाई अधूरी है. स्थानीय लोग जानते हैं कि अब केवल इंतजार है बारिश की पहली बौछार का.

स्टेशन रोड : जहां होटल की गंदगी बहा दी जाती है नाले में

स्टेशन रोड की भी कहानी कुछ अलग नहीं है. सरकारी बस स्टैंड के पास नाली पूरी तरह जाम है. इतना कि नाले का गंदा पानी अब सड़क पर बहने लगा है. आसपास के होटलों से निकलने वाला कचरा सीधा इसी नाले में फेंका जाता है. अगर अभी भी सफाई नहीं हुई, तो सड़क तालाब बन जायेगी.

सिर्फ मशीन नहीं, मेहनत की भी जरूरत

नगर निगम की जेसीबी हर गली में नहीं जा सकती. इसलिए उप प्रशासक रवींद्र कुमार ने निर्देश दिया है कि जहां मशीन नहीं पहुंच सकती, वहां मैनुअल सफाई हो. स्लैब से ढंके नालों में सुपर शकर मशीनें लगायी जायें. हर गलियों की अपनी जरूरत है और हर जरूरत का अलग समाधान भी.

खुले नालों के लिए चेतावनी जरूरी

बारिश के मौसम में कई बार सड़क और नाली के बीच का फर्क मिट जाता है. ऐसे में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है. इसी वजह से नगर निगम ने सुपरवाइजरों को निर्देश दिया है कि खुले और खतरनाक नालों की घेराबंदी की जाये. साथ ही नोटिस बोर्ड या बैनर लगाकर चेतावनी दी जाये.

क्या इस बार हालात बेहतर होंगे?

नगर निगम सफाई कर रहा है, लोग उम्मीद कर रहे हैं. लेकिन सफाई की रफ्तार और मोहल्लों की हालत देखकर एक डर बार-बार दस्तक देता है, कहीं इस बार भी हम बारिश के आगे हार न जायें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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