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Ranchi news : झारखंड विधानसभा चुनाव : दूसरे चरण की इन 10 हॉट सीटों पर रहेगी सबकी नजर

Updated at : 17 Nov 2024 8:08 PM (IST)
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राज्य में दूसरे चरण के चुनाव में संताल और कोयलांचल की ज्यादातर सीटों पर चुनाव होना है. कुछ सीटें उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर की भी हैं

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रांची.

राज्य में दूसरे चरण के चुनाव में संताल और कोयलांचल की ज्यादातर सीटों पर चुनाव होना है. कुछ सीटें उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर की भी हैं. 20 नवंबर को होने वाले चुनाव में दो पूर्व मुख्यमंत्री चुनावी मैदान में हैं. वहीं, एक पूर्व उपमुख्यमंत्री के साथ कई पूर्व और वर्तमान मंत्री मैदान में हैं. दूसरे चरण पर सबकी नजरें टिकी हैं. दूसरे चरण में 38 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा. वैसे तो 38 सीटों पर सबकी नजर है, लेकिन 10 हॉट सीटों पर लोगों की विशेष नजर होगी. ये सीटें सरकार बनाने का रास्ता तय करेगी. प्रभात खबर के सतीश सिंह और मनोज सिंह ने इन सीटों पर तैयार की है रिपोर्ट.

बोरियो : झामुमो और भाजपा में है टक्कर

संताल परगना की बोरियो विधानसभा सीट पर सबकी नजर है. इस बार झामुमो के बागी लोबिन हेम्ब्रम भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं. लोबिन के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को यहां जीत की उम्मीद है. ज्ञात हो कि वर्ष 2005 और 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ताला मरांडी इस सीट से जीते थे. इस बार भाजपा ने झामुमो के टिकट से 2019 में जीते लोबिन हेम्ब्रम को प्रत्याशी बनाया है. वहीं, झामुमो ने धनंजय सोरेन पर विश्वास जताया है. धनंजय को झामुमो के कैडर वोट पर भरोसा है.

बरहेट : हेमंत की टक्कर आजसू से आये गमेलियल से

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तीसरी बार इस सीट से चुनावी मैदान में हैं. दो बार पर चुनाव जीत चुके हैं. पिछली बार दुमका और बरहेट दोनों सीट से चुनाव जीते थे. बाद में दुमका सीट छोड़ दी थी. श्री सोरेन विकास के एजेंडे के साथ मैदान में हैं. वहीं, भाजपा ने आजसू से आये गमेलियल हेम्ब्रम को प्रत्याशी बनाया है. गमेलियल को 2019 के चुनाव में सिर्फ 2600 वोट मिले थे. पिछले चुनाव में भाजपा ने साइमन माल्टो को टिकट दिया था. साइमन को 48 हजार से अधिक मत मिले थे. साइमन टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर झामुमो के साथ हो लिये हैं.

जामताड़ा : इरफान को चुनौती दे रहीं सीता सोरेन

भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन को जामताड़ा से चुनावी मैदान में उतारा है. इससे यह सीट हॉट हो गयी है. सीता सोरेन कांग्रेस के इरफान अंसारी को चुनौती दे रही हैं. वह इरफान अंसारी की हैट्रिक रोकने का प्रयास कर रही हैं. वहीं, इरफान की ओर से सीता सोरेन पर की गयी टिप्पणी ने यहां के चुनावी मिजाज को गर्म कर दिया है. मुस्लिम बहुल वाली इस सीट पर आदिवासी और सामान्य वोटरों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है. ज्ञात हो कि सीता सोरेन पिछला विधानसभा चुनाव जामा से जीती थीं.

नाला : विधानसभा अध्यक्ष को टक्कर देंगे माधव चंद्र महतो

इस सीट से झामुमो की ओर से विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो चुनावी मैदान में हैं. वहीं, भाजपा ने माधव चंद्र महतो को प्रत्याशी बनाया है. माधव चंद्र महतो पिछली बार आजसू के टिकट पर चुनाव लड़े थे. 16 हजार से अधिक मत मिले थे. 2019 में आजसू और भाजपा अलग-अलग लड़ी थी. भाजपा को करीब 57 हजार मत मिले थे. श्री महतो इस बार भाजपा के साथ-साथ आजसू का एकमुश्त वोट मिलने की उम्मीद है. वहीं, श्री महतो संवैधानिक पद पर रहते हुए जनता के बीच रहने तथा काम करने को लेकर मैदान में हैं.

दुमका : शिबू सोरेन को हराने वाले सुनील से बसंत की टक्कर

दुमका विधानसभा सीट से पिछली बार हेमंत सोरेन झामुमो प्रत्याशी के रूप में जीते थे. बाद में श्री सोरेन ने यह सीट छोड़ दी थी. उसके बाद हुए उपचुनाव में हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन जीते थे. पहली बार हेमंत सोरेन ने भाजपा प्रत्याशी लुईस मरांडी को हराया था. वहीं, उपचुनाव में बसंत सोरेन ने भी श्रीमती मरांडी को ही हराया था. इस बार भाजपा ने श्रीमती मरांडी का टिकट यहां से काट दिया है. उनकी जगह सुनील सोरेन को प्रत्याशी बनाया है. श्री सोरेन दुमका संसदीय चुनाव में पूर्व में शिबू सोरेन को हरा चुके हैं.

बगोदर : माले के गढ़ में सेंधमारी की तैयारी

बगोदर माले का गढ़ माना जाता है. यहां पिछले 24 वर्षों में माले को छोड़ सिर्फ एक बार ही दूसरे दल का प्रत्याशी चुनाव जीता है. 2014 में भाजपा के नागेंद्र महतो ने माले के विनोद सिंह को हराया था. वर्ष 2000 में माले के टिकट से महेंद्र सिंह विधायक बने थे. नक्सलियों द्वारा इनकी हत्या किये जाने के बाद इनके बेटे विनोद सिंह ने विरासत संभाली. लगातार दो टर्म 2005 व 2009 में विनोद सिंह माले से विधायक बने. इसके बाद फिर 2019 में विनोद सिंह माले के टिकट से चुनाव जीते. इस बार भी भाजपा के नागेंद्र महतो को यहां से उतारा है. वहीं, इस बार जेएलकेएम ने यहां से मो सलीम को मैदान में उतारा है.

धनवार : बाबूलाल मरांडी को टक्कर देंगे इंडिया गठबंधन के दो प्रत्याशी

धनवार से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की प्रतिष्ठा दांव पर है. पिछले चुनाव में श्री मरांडी झाविमो के टिकट से चुनाव जीते थे. इस सीट पर इंडिया गठबंधन की ओर से दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. झामुमो ने निजामुद्दीन और माले ने राजकुमार यादव को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं, शनिवार को यहां से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े निरंजन राय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है. अब इस सीट पर इंडिया गठबंधन के फैसले पर सबकी नजर टिकी हुई है.

गांडेय : झामुमो-भाजपा में सीधी टक्कर, कल्पना पर नजर

गांडेय विधानसभा सीट से इस बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन चुनाव मैदान में हैं. झामुमो ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है. वहीं, इनके खिलाफ भाजपा ने मुनिया देवी को मैदान में उतारा है. वर्ष 2000 से इस सीट पर इंडिया गठबंधन की पकड़ रही है. सिर्फ एक बार वर्ष 2014 में भाजपा से जय प्रकाश वर्मा चुनाव जीते हैं. वर्ष 2000 व 2005 में झामुमो के टिकट से सालखन सोरेन चुनाव जीते. 2019 में सरफराज अहमद झामुमो के टिकट पर विधायक बने थे. लेकिन, कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद झामुमो से चुनाव लड़ कर कल्पना सोरेन विधायक बनीं.

डुमरी : इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार

डुमरी से मंत्री बेबी देवी की प्रतिष्ठा दांव पर है. झामुमो ने इन्हें एक बार फिर से प्रत्याशी बनाया है. वहीं एनडीए में शामिल आजसू ने यहां से यशोदा देवी को चुनाव मैदान में उतारा है. जेएलकेएम के अध्यक्ष जयराम महतो के चुनाव मैदान में उतरने से यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार नजर आ रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में डुमरी विधानसभा में जयराम महतो ने बढ़त हासिल की थी. ऐसे में उन पर भी निगाहें टिकी हुई है. वर्ष 2000 के चुनाव को छोड़ दें तो इस सीट पर हमेशा झामुमो का कब्जा रहा है.

सिल्ली : सुदेश व अमित में टक्कर, देवेंद्र बना रहे कोण

सिल्ली सीट से आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो मैदान में हैं. ऐसे में इस सीट से पार्टी के साथ-साथ उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है. यहां से एक बार फिर झामुमो ने अमित महतो को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं जेएलकेएम की ओर से देवेंद्र महतो के खड़ा होने से अलग कोण बन रहा है. हालांकि, इस सीट पर सुदेश महतो की पकड़ रही है. क्षेत्र में कराये गये विकास कार्यों के एजेंडे साथ चुनावी मैदान में हैं. वर्ष 2000 से लेकर 2009 तक सुदेश महतो इस सीट से चुनाव जीतते रहे. 2014 में झामुमो से चुनाव लड़ कर अमित महतो विधायक बने थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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