ranchi news : 11 साल बाद भी झारखंड का वैक्सीन लैब अधूरा, पशुओं का वैक्सीनेशन केंद्र सरकार के भरोसे

Updated at : 28 Jul 2025 1:06 AM (IST)
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ranchi news  : 11 साल बाद भी झारखंड का वैक्सीन लैब अधूरा, पशुओं का वैक्सीनेशन केंद्र सरकार के भरोसे

पशुपालन विभाग का अत्याधुनिक वैक्सीन लैब(जीएमपी) का निर्माण कार्य पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है. इस लैब में हर साल गलाघोंटू, एंथ्रेक्स, स्वाइन फ्लू, रानीखेत जैसी विभिन्न बीमारियों के एक करोड़ वैक्सीन का निर्माण होना था.

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रांची. पशुपालन विभाग का अत्याधुनिक वैक्सीन लैब(जीएमपी) का निर्माण कार्य पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है. इस लैब में हर साल गलाघोंटू, एंथ्रेक्स, स्वाइन फ्लू, रानीखेत जैसी विभिन्न बीमारियों के एक करोड़ वैक्सीन का निर्माण होना था. इसके लिए पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान में आधा दर्जन से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना भी की गयी है. हालांकि, 11 साल बाद भी यह लैब अधूरा ही है. ऐसे में हर साल करोड़ों रुपये का वैक्सीन भारत सरकार से आ रहा है. यह हाल तब है, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लेकर विभागीय मंत्री तक इसको पूरा करने का निर्देश दे चुके हैं. मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने 25 मई 2022 को इसका दौरा कर इसे जल्द पूरा करने का निर्देश भी दिया था.

गौरतलब है कि कांके स्थित पशु स्वास्थ्य उत्पादन संस्थान(एलआरएस) परिसर में पशुपालन विभाग का अत्याधुनिक वैक्सीन लैब निर्माणाधीन है. विभाग के पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक के कार्यकाल में 2012 में इसके निर्माण के लिए राज्यादेश निकाला गया था. वहीं, 2014 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था. इसकी शुरुआती लागत 28 करोड़ रुपये थी. अब तक विभाग के पांच मंत्री बन चुके हैं. सभी ने अपने-अपने स्तर से इस लैब को पूरा करने का निर्देश दिया है. अपने-अपने कार्यकाल में विभागीय मंत्री रणधीर सिंह और बादल भी निरीक्षण कर चुके थे. इसी साल फरवरी में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी इसका निरीक्षण किया था. उन्होंने भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ भी इस मुद्दे पर बात भी की है. इधर, धीरे-धीरे लैब की निर्माण लागत बढ़ती ही जा रही है. वहीं, अनदेखी की वजह से निर्माणाधीन भवन में दरारें पड़ने लगी हैं और यहां रखे कई सामान भी बर्बाद होने लगे हैं.

उच्चस्तरीय टीम कर चुकी है जांच

पशुपालन विभाग ने इसके लिए एक उच्चस्तरीय टीम गठित की थी. विभाग के निर्देश पर इसके उपयोगिता की जांच एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) ने भी की थी. एनडीडीबी इस लैब की उपयोगिता पर पहले ही सवाल उठा चुका है. इसकी तकनीक पुरानी होने की बात कही गयी थी. पूर्व में लैब की तकनीकी पहलु को देखते हुए विभाग ने एक सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय लिया था. सलाहकार यहां उत्पादित होनेवाली वैक्सीन के लिए जरूरी तकनीकी काम करायेगा. लैब के संचालन से पहले कई प्रकार के प्रमाण पत्र की जरूरत होती है. झारखंड में पशुपालन विभाग के वैज्ञानिकों को वैक्सीन उत्पादन करने की प्रक्रिया की जानकारी भी सलाहकार देगा. इसके बाद ही यह शुरू हो पायेगा.

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