ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण मामले में झारखंड पिछड़ा, मिला 26वां स्थान, जानें क्या है इसकी वजह

नीति आयोग के स्टेट एनर्जी एंड क्लाइमेट इंडेक्स-राउंड की रैंकिंग में झारखंड को 26वां स्थान मिला है, कुल छह पारा मीटर पर इसकी गणना की गयी है. इस मामले में गुजरात पहले स्थान पर है. जबकि छोटे राज्यों की श्रेणी में गोवा पहले स्थान पर है
रांची: झारखंड को ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण प्रयास के मामले में पूरे देश में 26वां स्थान मिला है. नीति आयोग के स्टेट एनर्जी एंड क्लाइमेट इंडेक्स-राउंड एक (एसइसीआइ) की गणना में यह नतीजा निकला है. बड़े राज्यों की श्रेणी में 16वां स्थान मिला है. नीति आयोग ने राज्यों में ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किये गये प्रयासों का अध्ययन कराया है. कुल छह पारा मीटर पर 27 इंडिकेटर तैयार किये गये और इसकी गणना कर राज्यों की रिपोर्ट तैयार की गयी है.
पहले स्थान पर गुजरात है. भौगोलिक व क्षेत्रफल के आधार पर राज्यों की श्रेणी तय की गयी है. बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात, केरल और पंजाब को पहले तीन स्थान में रखा गया है. छोटे राज्यों की श्रेणी में गोवा पहले स्थान पर है. केंद्रशासित प्रदेशों की अलग श्रेणी रखी गयी थी. इसमें चंडीगढ़ और दिल्ली क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर हैं.
ऊर्जा की पहुंच, सामर्थ्य और भरोसा के मामले में तय इंडिकेटर में झारखंड की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. आज भी प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में झारखंड की रेटिंग मात्र 6.3 ही है.
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि झारखंड में 2019-20 के दौरान क्लीन एनर्जी की दिशा में कमजोर प्रयास हुआ है. क्लीन कुकिंग फ्यूल आपूर्ति में झारखंड को 5.5 अंक मिला है. इस दौरान गैर पारंपरिक ऊर्जा के क्षेत्र में किये गये प्रयासों में शून्य अंक मिला है. सीएनजी गाड़ियों की संख्या में वृद्धि के मामले में 33.7 अंक मिला है.
झारखंड में पर्यावरण स्थिरता के लिए तय इंडिकेटर की स्थिति भी अच्छी नहीं है. जीएसडीपी में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले इंडिकेटर में झारखंड को 41.7 अंक मिला है.
नीति आयोग ने पाया है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बहुत ही कम नये प्रयास हुए हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में मात्र 11.9 अंक मिला है. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन के मामले में 16 अंक मिला है.
झारखंड में डीबीटी ट्रांसफर के साथ-साथ टीओडी ) और टीओयू (टाइम ऑफ यूज) टैरिफ के उपयोग के मामले में शून्य रेटिंग की गयी है. रेगुलेटरी परिसंपत्ति मामले में झारखंड की रेटिंग शत-प्रतिशत रही है. टैरिफ की जटिलता दूर करने में झारखंड की रेटिंग 95.7 है. ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस के मामले में झारखंड की रेटिंग 67.8 है.
Posted By: Sameer Oraon
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By Prabhat Khabar News Desk
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