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World Bamboo Day 2022: बांस से जुड़े उद्योग को मजबूती दे रहीं दुमका की महिलाएं

Updated at : 17 Sep 2022 11:21 PM (IST)
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World Bamboo Day 2022: बांस से जुड़े उद्योग को मजबूती दे रहीं दुमका की महिलाएं

World Bamboo Day 2022: दुमका में किसानों को बांस की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि चाकुलिया के मानुषमुड़िया में झारक्राफ्ट की ओर से स्थापित किये गये बंबू ट्रीटमेंट प्लांट, जिसे बंबू सीजनिंग प्लांट भी कहते हैं, को जल्द से जल्द चालू करने की कोशिश की जा रही है.

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World Bamboo Day 2022: बांस से जुड़े उद्योग को झारखंड की उपराजधानी दुमका की महिलाएं मजबूती दे रही हैं. इसाफ दुमका (ESAF Dumka) के प्लांट में बड़े पैमाने पर महिलाएं काम करती हैं. ये बांस से जुड़े उत्पाद तैयार करती हैं और बड़ी-बड़ी कंपनियां इसकी बिक्री करती हैं. विदेशों में भी इन उत्पादों को भेजा जाता है.

किसानों को बांस की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा इसाफ

इसाफ रांची के मैनेजर जयवंत होरो ने बताया कि दुमका में किसानों को बांस की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि चाकुलिया के मानुषमुड़िया में झारक्राफ्ट की ओर से स्थापित किये गये बंबू ट्रीटमेंट प्लांट, जिसे बंबू सीजनिंग प्लांट भी कहते हैं, को जल्द से जल्द चालू करने की कोशिश की जा रही है.

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चाकुलिया में बड़े पैमाने पर बांस लगाते हैं किसान

जयवंत होरो बताते हैं कि चाकुलिया में बड़े पैमाने पर किसान बांस लगाते हैं. किसान वहां अनाज या सब्जी की खेती नहीं करते, अपनी जमीन पर बांस लगाते हैं. ओड़िशा और पश्चिम बंगाल को यहां से बांस की सप्लाई की जाती है. उन्होंने बताया कि झारक्राफ्ट से बंबू सीजनिंग प्लांट का हैंडओवर लेने के कुछ ही दिनों बाद लॉकडाउन लग गया और इसकी वजह से काम लगभग ठप हो गया.

चाकुलिया में दो गांव के 60 लोगों को दी गयी थी ट्रेनिंग

इसाफ के मैनेजर ने बताया कि मानुषमुड़िया के आसपास के दो-तीन गांव के लोगों को उनकी ओर से वर्क ऑर्डर दिया जाता था. 25-30 लोगों को ये ऑर्डर मिलते थे. उनकी संस्था ने दो गांवों में शिल्पकारों की ट्रेनिंग भी करवायी. 30-30 के ग्रुप में. यानी 60 लोगों को बांस से अलग-अलग उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी गयी.

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बांस से बनते हैं होम डिकोर और फर्नीचर

इसाफ चाहता था कि मानुषमुड़िया प्लांट में ज्यादा से ज्यादा काम हो, ताकि आसपास के अधिक से अधिक लोगों को बांस के उत्पाद से जोड़ा जा सके. उन्हें रोजगार मिल सके. लेकिन, ऐसा हो न सका. उन्होंने बताया कि लाउंड्री बिन, डस्ट बिन, बंबू सोफा, ड्रेसिंग टेबल, फर्नीचर, होम डेकोर, फ्लावर वास, ऑफिस एसेसरीज, लाइफ स्टाइल से जुड़े उत्पाद उनकी संस्था बनाती है. यहां तक कि होम डिकोर और फर्नीचर भी बांस से बनने लगे थे.

दुमका में है IKEA का प्लांट

उन्होंने बताया कि होम डिकोर और फर्नीचर की सबसे बड़ी कंपनी आईकिया (IKEA) के जरिये अपने उत्पाद की सप्लाई करते थे. दुमका में आईकिया का प्लांट है. करीब 300 कुशल महिला कारीगर दुमका के जामा ब्लॉक में आकर काम करती हैं. वर्ष 2019 में दुमका में बंबू कॉन्क्लेव (Bamboo Conclave) भी हुआ था.

ग्रामीण कारीगरों को दिया जाता है वर्क ऑर्डर

उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में भी इसाफ की ओर से वर्क ऑर्डर दिया जाता है. कारीगरों से उत्पाद खरीदते हैं. उसमें वैल्यू एडीशन करते हैं और उसके बाद मार्केट में उसकी सप्लाई करते हैं. उन्होंने कहा कि दुमका में कुशल कारीगर भी हैं और बांस भी उपलब्ध है. वे किसानों को बांस लगाने की ट्रेनिंग भी देते हैं. दुमका में एक नर्सरी विकसित की गयी है, जहां से किसानों को बांस के पौधे दिये जाते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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