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सामाजिक नवजागरण के अग्रदूत थे संविधान निर्माता डॉ भीम राव आंबेडकर, झारखंड ने जयंती पर ऐसे किया याद

Updated at : 14 Apr 2024 5:33 PM (IST)
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डॉ भीम राव आंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित करतीं कल्पना सोरेन समेत अन्य

डॉ भीम राव आंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित करतीं कल्पना सोरेन समेत अन्य

संविधान निर्माता डॉ भीम राव आंबेडकर की जयंती पर झारखंड में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इस मौके पर लोगों ने कहा कि वे सामाजिक नवजागरण के अग्रदूत थे.

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रांची: डॉ भीम राव आंबेडकर की जयंती पर झारखंड ने उन्हें याद किया और श्रद्धासुमन अर्पित किया. झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेत्री कल्पना सोरेन ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. झारखंड कांग्रेस ने उनकी जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें याद किया. राष्ट्रीय जनता दल की ओर से भी कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी. संविधान निर्माता को उनके अमूल्य योगदान के लिए लोगों ने याद किया. विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर द्वारा डोरंडा स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया.

हमारी ताकत है संविधान


कल्पना सोरेन ने कहा कि संविधान हमारी ताकत है. संविधान हमारा स्वाभिमान है. देश को संविधान रूपी महान ग्रंथ देने वाले संविधान निर्माता, सामाजिक समता और सामाजिक न्याय के पुरोधा, भारत रत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती पर शत-शत नमन. सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने लिखा है कि यह संविधान और हमारे वीर पुरुखों के संघर्ष की ताकत है कि हम तानाशाही ताकतों के सामने न कभी झुके हैं, न कभी झुकेंगे. तानाशाही ताकतों की आंखों में आंखें डालकर न्याय की लड़ाई लड़े हैं, लड़ेंगे.

सामाजिक नवजागरण के अग्रदूत थे डॉ भीम राव आंबेडकर


झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीम राव आंबेडकर की जयंती रांची के कांग्रेस भवन स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय मनायी गयी. इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ आंबेडकर को सामाजिक नवजागरण का अग्रदूत बताते हुए उनके जीवनी पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन सदियों से शोषितों-दलितों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए समर्पित था. वे समाज में व्याप्त रूढ़िवादी एवं विषमता को समाप्त करने के लिए जीवन-पर्यंत संघर्ष करते रहे. बाबा साहब एक सुलझे हुए राजनीतिज्ञ थे. उन्होंने अपने पीछे संविधान के रूप में एक अमूल्य विरासत छोड़ दी है.

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समान अधिकार के लिए किया शंखनाद


वक्ताओं ने कहा कि जब तक व्यक्ति सुरक्षित और समृद्ध नहीं होगा, तब तक कोई समाज और देश का विकास नहीं कर सकता. वक्ताओं ने कहा कि जब तक ऊंच-नीच का भेदभाव, सामाजिक एवं आर्थिक विषमताओं के विरूद्ध जनता के संघर्ष का बिगुल बजेगा, डॉ आंबेडकर का नाम आदर के साथ लिया जायेगा. उन्होंनें महिला और कमजोर वर्गों के समान अधिकार के लिए शंखनाद किया. इस अवसर पर प्रदेश संगठन महासचिव अमूल्य नीरज खलखो, मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी, प्रवक्ता सोनाल शांति, निरंजन पासवान, केदार पासवान, सहदेव राम, राजू राम, जगरनाथ साहू, विशिष्ट लाल पासवान, रमेश पाण्डेय, रंजीत बाउरी, भूषण कुमार सहित काफी संख्या में कांग्रेसजनों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए.

देश बचाना है तो बाबा साहब के संविधान पर चलना होगा


भारतीय संविधान के सृजनकर्ता, महान कानूनविद, असंख्य शोषितों-पीड़ितों के मुक्तिदाता, सामाजिक न्याय के प्रणेता, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती राष्ट्रीय जनता दल के रांची स्थित प्रदेश कार्यालय में मनायी गयी और बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष अनीता यादव, महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष रानी कुमारी, सुधीर गोपी, अजय यादव, महावीर सिंह, विवेक, रामकुमार यादव, मैनेजर यादव इत्यादि मौजूद थे.

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सदैव याद किए जाएंगे बाबा साहेब


बाबा साहेब की जयंती पर बाबा साहब द्वारा देश और समाज के लिए किए गए कार्यों को याद किया गया. उपाध्यक्ष अनीता यादव ने कहा कि बाबा साहब नहीं होते तो महिलाओं की स्थिति दयनीय होती. दलितों, अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और महिलाओं के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव याद किए जाएंगे. संविधान की वजह से ही आज सभी को अधिकार प्राप्त है.

डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक समानता एवं समरसता के थे प्रणेता


बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती पर विश्व हिंदू परिषद रांची महानगर द्वारा महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी के नेतृत्व में डोरंडा स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया. इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित विश्व हिंदू परिषद के झारखंड प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने डॉ अंबेडकर को सामाजिक समानता एवं समरसता का प्रणेता बताते हुए कहा कि समाज के वंचित वर्ग एवं महिलाओं के उत्थान में उनका अभूतपूर्व योगदान रहा है. कालांतर में विदेशी आक्रांताओं के सैकड़ो वर्ष के शासनकाल द्वारा हिंदू समाज में छुआछूत ,जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता आदि विकृतियों आई थीं उससे वे अवश्य दुखी थे, परंतु हिंदू धर्म या फिर हिंदू देवी देवताओं के प्रति उनके हृदय में अपार सम्मान था. उन्होंने इस्लाम अथवा ईसाई धर्म न अपना कर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली, जो सनातन धर्म का ही एक अंग है. यह बात आज संपूर्ण हिंदू समाज को समझने की आवश्यकता है. उनके द्वारा दिखाए मार्ग पर चलकर समाज से जातिगत भेदभाव मिटाते हुए एक संगठित राष्ट्र की परिकल्पना साकार होगी. मौके पर रांची विभाग प्रचार प्रसार प्रमुख अमर प्रसाद, रवि शंकर राय, विश्वरंजन, पप्पू वर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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