18.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन : रंग लाई डॉ भारती कश्यप की मुहिम, एनएचएम का पार्टनर बनेगा वूमेन डॉक्टर विंग

भारत में महिलाओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर है, जबकि इसका इलाज बेहद आसान है. वर्ष 2023 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच झारखंड में सबसे ज्यादा सर्वाइकल कैंसर की संदिग्ध मरीज मिलीं.

झारखंड सरकार ने वूमेन डॉक्टर विंग को सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) का आधिकारिक पार्टनर बनाने का फैसला किया है. गुरुवार (23 नवंबर) को झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव अरुण सिंह की अध्यक्षता में कार्सिनोमा सर्विक्स की स्क्रीनिंग से संबंधित समीक्षा बैठक हुई. इसमें राज्य के सभी सिविल सर्जन, सरकारी स्त्री रोग विशेषज्ञों के अलावा सभी जिलों के अस्पताल प्रबंधन और उपाधीक्षक ऑनलाइन जुड़े थे. इस बैठक के बाद सचिव ने आदेश दिया कि एक सप्ताह के भीतर वूमेन डॉक्टर विंग को सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान में एनएचएम का आधिकारिक पार्टनर बनाया जाए. वूमेन डॉक्टर विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ भारती कश्यप ने कहा है कि एनएचएम का यह अभियान लगातार चलता रहेगा. उन्होंने कहा कि झारखंड मॉडल की सफलता की पूरे देश में चर्चा है. इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जाना चाहिए, ताकि सर्वाइकल प्री कैंसर के मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके. भारत में महिलाओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर है, जबकि इसका इलाज बेहद आसानी से हो सकता है. उन्होंने कहा कि इस मॉडल को और जो आंकड़े हमारे पास हैं, उसे हमने आईएमए हेड क्वार्टर के साथ भी साझा किया है.

2021 में बना था झारखंड मॉडल

डॉ भारती कश्यप ने बताया कि वर्ष 2021 में झारखंड मॉडल बना था. तब हमें 2,70,684 प्रजनन क्षमता वाली ऐसी महिलाओं की स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनमें सर्वाइकल कैंसर के लक्षण हैं या जो हाई रिस्क कैटेगरी में आती हैं. दो साल सात महीने में हमने 2,81,199 प्रजनन क्षमता वाली चिह्नित महिलाओं की जांच की. वर्ष 2023 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच सबसे ज्यादा सर्वाइकल कैंसर की संदिग्ध मरीज मिलीं. लोहरदगा में 63, देवघर में 46, खूंटी में 44, रांची में 39, हजारीबाग में 32, बोकारो में 25, पूर्वी सिंहभूम में 25, धनबाद में 22, पाकुड़ में 17 और गोड्डा 16 मरीज मिलीं.

12 सरकारी अस्पतालों में सर्वाइकल कैंसर की जांच एवं इलाज संभव

राज्य के 12 सरकारी अस्पतालों में सर्वाइकल कैंसर की जांच और इलाज की मशीन भी लगाई गई है. पिछले सात महीने में रिम्स ने टाटा ट्रस्ट आउटरीच और टाटा ट्रस्ट कियोस्क की सहायता से 10,274 स्क्रीनिंग हुई है. आज की बैठक में डॉ भारती कश्यप के कार्यों की सराहना की गई. सचिव ने सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के लिए राज्य में चलाए जा रहे महीने के 48 महिला स्वास्थ्य शिविरों के अलावा 264 ब्लॉक के लिए हर महीने 264 महिला स्वास्थ्य शिविर लगाने का भी आदेश दिया, जिसमें सदर अस्पताल से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को कैंप में भेजे जाने का प्रस्ताव दिया गया है. यह भी कहा कि सर्वाइकल कैंसर की संदिग्ध को कैंप में लाने वालों को प्रति मरीज 50 रुपए मानदेय भी दिया जाए.

Also Read: देवघर व जामताड़ा में 1188 महिलाओं की जांच, 29 को प्री-सर्वाइकल कैंसर, 60 फीसदी के जननांग में सूजन

क्या है झारखंड मॉडल?

सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए झारखंड की वूमेन डॉक्टर्स विंग ने देश की शीर्ष कैंसर स्त्री रोग विशेषज्ञों से लंबे विचार-विमर्श के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन नीति 90-70-90 के तीसरे भाग को चुना. इसकी वजह से कम संसाधन में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में काफी सफलता मिली. इसके तहत 90 प्रतिशत गर्भाशय ग्रीवा की सूजन वाली महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई, फिर उनका इलाज किया गया. इस मॉडल में राज्य के सभी जिलों में प्रजनन क्षमता वाली 6 फीसदी महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग अनिवार्य हो. हाई रिस्क वाली जिन महिलाओं में जननांग संबंधी सूजन के लक्षण हैं उनके गर्भाशय ग्रीवा की सूजन की 100 फीसदी स्क्रीनिंग कर सकते हैं.

Undefined
सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन : रंग लाई डॉ भारती कश्यप की मुहिम, एनएचएम का पार्टनर बनेगा वूमेन डॉक्टर विंग 3

क्या है विश्व स्वास्थ्य संगठन का 90-70-90

इससे इतर दो और व्यवस्था है, जिसको अपनाना भारत जैसे देश में संभव नहीं है. पहले चरण के 90 फीसदी की बात करें, तो प्रजनन क्षमता वाली 90 फीसदी महिलाओं का वैक्सीनेशन कर दिया जाए. यह झारखंड जैसे राज्य में संभव नहीं है. अगर दूसरे चरण को अपनाएंगे, तो प्रजनन क्षमता वाली 70 फीसदी महिलाओं की अत्याधुनिक मशीन से जांच करानी होगी. झारखंड में 22.5 फीसदी महिलाएं इस श्रेणी में आतीं हैं. उन सभी की जांच कर पाना संभव नहीं है, क्योंकि यह जांच काफी महंगी है. झारखंड मॉडल ने तीसरे चरण को अपनाया, क्योंकि कैंसर रोग विशेषज्ञों ने सलाह दी कि हाई रिस्क कैटेगरी वाली वैसी छह महिलाओं की जांच की जाए, जिनमें ल्यूकोरिया के लक्षण हों, ब्लीडिंग की समस्या हो, 18 साल से कम उम्र में उनकी शादी हो गई हो. इसके अलावा उन महिलाओं की भी जांच की जाए, जो सिगरेट पीती हैं, जिनमें इम्यूनो डेफिसिएंसी है. अगर इस मॉडल पर काम करते हैं, तो सर्वाइकल कैंसर की पहचान भी हो जाएगी और उनका इलाज भी हो जाएगा. डॉ भारती कश्यप ने इसका बीड़ा उठाया और झारखंड सरकार के साथ मिलकर सभी 24 जिलों में कैंप लगाए और दो साल सात महीने में 2,81,199 महिलाओं की जांच करके एक मिसाल कायम की.

Also Read: झारखंड में 74.9 % महिलाएं कर रही हैं सेनेटरी पैड का उपयोग, फिर भी सर्वाइकल कैंसर के केसेस सबसे ज्यादा

ढाई साल में मिले सर्वाइकल प्री कैंसर के 1033 मरीज

बता दें कि इस अवधि में झारखंड में सर्वाइकल प्री कैंसर के कुल 1,033 संदिग्ध मरीज मिली. सिर्फ सात महीने में 441 संदिग्ध मरीज मिलीं हैं. इस अभियान की खास बात यह रही कि जांच के साथ-साथ संदिग्ध मरीजों का इलाज भी ऑन द स्पॉट हो गया. ऐसी मुहिम चलाने वाला झारखंड देश का पहला और एकमात्र राज्य बन गया है. अपर मुख्य सचिव ने इस अभियान की गहन जानकारी लेने के बाद वूमेन डॉक्टर्स विंग को एनएचएम का पार्टनर बनाने का निर्देश दिया. साथ ही यह भी कहा कि अब सभी 264 प्रखंडों में सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए ऐसे शिविर लगाए जाएंगे.

Also Read: झारखंड में 40 फीसदी मरीज ओरल कैंसर की चपेट में, मृत्यु दर 30 फीसदी के करीब

Disclaimer: हमारी खबरें जनसामान्य के लिए हितकारी हैं. लेकिन दवा या किसी मेडिकल सलाह को डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें.

Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel