Diwali 2025: रांची से बनारस तक जगमगाएंगे गोबर से बने दीये, अस्सी घाट से लेकर फिरायालाल चौक तक फैलेगी रोशनी

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गोबर से दीया तैयार करती महिलाएं

Diwali 2025: रांची की दिवाली इस बार कुछ खास होने वाली है. मिट्टी के साथ-साथ गाय के गोबर से बने दीये से पूरा शहर जगमगा उठेगा. यही नहीं, रांची में तैयार गोबर के दीये से बनारस के अस्सी घाट भी गुलजार होंगे. राजधानी रांची के कांके स्थित सुकुरहुटू गौशाला न्यास, अरसंडे और धुर्वा के सीठियो में गोबर से इकोफ्रेंडली दीये तैयार किए जा रहे हैं. इस काम में करीब 90 से 100 ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं. केवल सुकुरहुटू प्लांट में एक दिन में 7000 दीये तैयार किए जा रहे हैं. दिवाली में केवल सुकुरहुटू प्लांट को दो से तीन लाख दीये की डिमांड मिली है.

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Diwali 2025: रांची के रोशन सिंह और सोनाली मेहता ने 5 साल पहले गाय के गोबर से प्रोडक्ट बनाने की शुरुआत की थी. कोरोना काल में दोनों के दिमाग में गौसेवा के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने का विचार आया. शुरुआत में उन्होंने महिलाओं को गोबर से प्रोडक्ट्स तैयार करने की ट्रेनिंग दी. आज सभी महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर घर बैठे अच्छी कमाई कर रही हैं.

महिलाओं को एक दिन में 400 रुपये से अधिक की हो रही कमाई

रोशन सिंह और सोनाली मेहता ने बताया, ”गोबर के दीये बनाकर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं. गांव की गरीब महिलाएं एक दिन में 400 से अधिक की कमाई कर रही हैं. सुकुरहुटू में 20, अरसंडे में 30 और धुर्वा में 30 से 40 महिलाएं काम कर रही हैं.” सोनाली मेहता ने बताया, “वैसी महिलाओं को हमने जोड़ने का काम किया है, जो बाहर जाकर काम करना चाहती हैं. लेकिन, घर और बच्चों की जिम्मेदारी की वजह से बाहर नहीं निकल पाती हैं. इसमें अधिक समय देने की जरूरत नहीं पड़ती है. महिलाएं आसानी से खाली समय में इस काम को कर अपनी कमाई कर सकती हैं और कर रही हैं.”

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दिवाली के दीये तैयार करती महिलाएं

बनारस से 2 लाख दीये की डिमांड

रांची के बने गोबर के दीये की डिमांड उत्तर प्रदेश के बनारस में भी है. सोनाली और रोशन सिंह की कंपनी को बनारस से करीब 2 लाख दीयों की डिमांड आई है. रोशन सिंह ने बताया, ”देश के अलग-अलग हिस्सों से भी उन्हें डिमांड मिल रही है.”

रांची की करीब 200 महिलाओं को दिया गया प्रशिक्षण

सोनाली बताती हैं, “सितंबर 2023 में गोबर क्राफ्ट का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद गौसेवा आयोग की ओर से हम लोगों ने केवल रांची में 200 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया. 10 अलग-अलग ब्लॉक में हमने 20-20 महिलाओं को प्रशिक्षित किया है. गौसेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन की पहल है कि आने वाले दिनों में झारखंड के सभी जिलों में करीब साढ़े पांच हजार महिलाओं को गोबर से बने प्रोडक्ट्स तैयार करने की ट्रेनिंग दी जाएगी.

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गोबर से बने दीये

मार्केट में गोबर के दीये की अच्छी डिमांड

गोबर से बने दीये की मार्केट में अच्छी डिमांड है. दिवाली में इसकी मांग बढ़ जाती है, लेकिन साल भर दीये की मांग बाजार में रहती है. इसलिए पूरे साल प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं.

गोबर से कौन-कौन से प्रोडक्ट हो रहे तैयार

गोबर से बने दीयों के साथ-साथ सुकुरहुटू, अरसंडे और धुर्वा में कई प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं. गोबर से भगवान की मूर्ति तैयार की जा रही है. इसके अलावा, अलग-अलग साइज के दीये, की रिंग, सजावट के सामान और राखियां तैयार की जा रही हैं.

गोबर के दीये कैसे हो रहे तैयार

गोबर से दीये तैयार करने के लिए प्लांट में मिक्सिंग और पीसने वाली मशीन लगाई गई है. सबसे पहले गोबर के उपले (गोइठा) को पहले मशीन में डालकर पाउडर बनाया जाता है. फिर उसे मिक्सिंग मशीन में डालकर अच्छे से मिलाया जाता है. मिक्सिंग मशीन में चिकनी मिट्टी और कच्चे गोबर को डाला जाता है. मिक्सिंग होने के बाद महिलाएं सांचे में डालकर प्रेशर मशीन के सहारे दीये तैयार किए जाते हैं.

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गोबर से दीये तैयार करती महिलाएं

मछली पालन में भी उपयोगी होते हैं गोबर के दीये

रोशन सिंह और सोनाली मेहता ने बताया, मिट्टी के दीये को आग में पकाना पड़ता और इस्तेमाल के बाद उन्हें दोबारा मिट्टी में नहीं मिलाया जा सकता है. लेकिन गोबर के बने दीये खाद का काम करेगा. नदी में प्रवाहित करने के बाद मछलियों का खाना बन जाएगा.

गोबर के बने प्रोडक्ट को मिट्टी में डालने से निकल आएंगे पौधे

रोशन सिंह और सोनाली मेहता ने बताया, ”गोबर के बने दीये या अन्य प्रोडक्ट की खासियत है कि इन्हें मिट्टी में डालने पर इससे तीन-चार पौधे भी निकल आएंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रोडक्ट तैयार करते समय इसमें पौधों के बीज भी डाल दिए जाते हैं. इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा.”

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गोबर से तैयार दीये

गोबर के दीये को आग में पकाने की जरूरत नहीं

रोशन सिंह और सोनाली मेहता ने बताया, ”गोबर के दीये को आग में पकाने की जरूरत नहीं है. एक से दो दिनों में हवा और धूप में सूखकर तैयार हो जाते हैं.”

एक दीये की कीमत 3 से 10 रुपये

गोबर से बने दीये की कीमत 3 से 10 रुपये हैं. छोटे की कीमत 3 रुपये और बड़े आकार के दीये की कीमत 10 रुपये तक हैं. हालांकि, अधिक मात्रा में लेने पर रांची गौशाला या सुकुरहुटू प्लांट में संपर्क करना पड़ेगा.

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सोनाली मेहता

ऑनलाइन भी लिए जा सकते हैं गोबर के दीये

सोनाली और रोशन ने बताया, ”गोबर से बने प्रोडक्ट जल्द ऑनलाइन भी उपलब्ध होंगे. इसके लिए वो अपनी खुद की वेबसाइट तैयार करा रहे हैं. वेबसाइट लॉन्च होने के बाद लोग ऑनलाइन भी प्रोडक्ट खरीद पाएंगे.”

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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