झारखंड के आयुष्मान कार्ड लाभुकों का बनेगा डिजिटल हेल्थ आईडी, 31 अगस्त तक पूरा होगा एकीकरण

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रांची में बैठक करते राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ सुनील बरनवाल.

झारखंड में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल स्वास्थ्य मिशन को मजबूत करने के लिए 31 अगस्त तक डेटा एकीकरण का लक्ष्य रखा गया है. बुजुर्गों के लिए वय वंदना डिजिटल कार्ड और 14 अंकों की डिजिटल हेल्थ आईडी पर भी जोर दिया गया है.

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Digital Health ID: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ सुनील बरनवाल ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन परिसर, झारखंड में केंद्र प्रायोजित स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में राज्य में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति, पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने को लेकर विस्तार से समीक्षा की गयी. बैठक में विशेष रूप से आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल स्वास्थ्य मिशन की प्रगति पर चर्चा हुई.

आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य योजना पर फोकस

समीक्षा के दौरान आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत पात्र लाभुकों की पहचान और उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ उपलब्ध कराने की स्थिति की जानकारी ली गयी. अधिकारियों से जिलावार प्रगति की जानकारी लेते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि योजनाओं के दायरे में आने वाले पात्र लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक सुगम बनाने पर भी बैठक में जोर दिया गया.

बुजुर्गों के लिए वय वंदना डिजिटल कार्ड

बैठक में 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को चिन्हित कर उनके वय वंदना डिजिटल कार्ड बनाने की प्रगति की भी जानकारी ली गयी. अधिकारियों को पात्र बुजुर्गों की पहचान कर कार्ड निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया. इसका उद्देश्य पात्र वरिष्ठ नागरिकों को संबंधित स्वास्थ्य सुविधा और योजना का लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है.

14 अंकों की डिजिटल हेल्थ ID

बैठक में डिजिटल हेल्थ ID के महत्व पर भी चर्चा की गयी. 14 अंकों की डिजिटल हेल्थ ID में डॉक्टर की पर्ची और जांच रिपोर्ट को ऑनलाइन सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की सुविधा मिलती है. आयुष्मान भारत डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में पात्र लोगों की पहचान और डिजिटल कार्ड निर्माण की प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया गया.

स्वास्थ्य कर्मियों के कार्ड बनाने का निर्देश

सभी जिलों में पात्र लाभुकों की पहचान करने के साथ-साथ आशा कार्यकर्ताओं, सहिया, सेविका और सहायिकाओं के भी डिजिटल आयुष्मान कार्ड बनाने को कहा गया. बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संबंधित कर्मियों और पात्र लाभुकों को डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लायी जाए. इसके लिए जिलास्तर पर निगरानी और समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया.

24 जिलों के अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ नेहा अरोड़ा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक डॉ पंकज अरोड़ा, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह, डॉ शैलेश यादव और एनएचएम के प्रबंध निदेशक डॉ शशि प्रकाश झा समेत कई अधिकारी मौजूद थे. राज्य मिशन निदेशक डिजिटल स्वास्थ्य मिशन दिनेश यादव के अलावा सभी 24 जिलों के सिविल सर्जन, जिला नोडल पदाधिकारी, परियोजना समन्वयक और राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई के अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया.

31 अगस्त तक डेटा एकीकरण

राज्य के सभी अस्पतालों को एचइएम 2.0 के तहत सभी पात्र निजी अस्पतालों का डेटा स्थानांतरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और सी-डैक की संयुक्त टीम को 31 अगस्त तक इस एकीकरण की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है. इस कदम का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित डेटा को निर्धारित डिजिटल व्यवस्था के साथ जोड़ना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी का प्रबंधन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सके.

OTP नहीं मिले तो फेस ऑथेंटिकेशन

बैठक में मोबाइल पर वन टाइम पासवर्ड यानी OTP नहीं मिलने की स्थिति में चेहरे की पहचान के माध्यम का उपयोग करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया. इसका उद्देश्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को बाधित होने से बचाना है. संबंधित डिजिटल व्यवस्था में वैकल्पिक पहचान माध्यम का उपयोग कर लाभुकों और स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गयी.

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दवा दुकानों को भी जोड़ा जाएगा

सभी दवा दुकानों को भी स्वास्थ्य संस्थान पंजीकरण से जोड़ने का निर्देश दिया गया है. इस मामले में राज्य फार्मेसी परिषद, औषधि निरीक्षक और औषधि निदेशालय को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके जरिए दवा दुकानों को भी निर्धारित स्वास्थ्य संस्थान पंजीकरण व्यवस्था के दायरे में लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जाएगी. बैठक में डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को व्यापक बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय पर भी जोर दिया गया.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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