सीयूजे के क्षमता निर्माण कार्यक्रम में बोले प्रो बीएन पांडा, रिसर्च के बाद बेहद जरूरी है प्रभावी रिपोर्टिंग

Updated at : 19 May 2023 8:46 PM (IST)
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सीयूजे के क्षमता निर्माण कार्यक्रम में बोले प्रो बीएन पांडा, रिसर्च के बाद बेहद जरूरी है प्रभावी रिपोर्टिंग

प्रो अरविंद चंद्र पांडेय (डीन, प्राकृतिक स्कूल संसाधन प्रबंधन) ने 'एक अच्छे शोध की तैयारी प्रस्ताव और रिपोर्ट’ विषय पर जानकारी दी. अनुसंधान प्रस्ताव एक दस्तावेज है जिसका उपयोग एक शोध परियोजना का प्रस्ताव करने के लिए किया जाता है.

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रांची: झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के ‘कार्यक्रम और विस्तार सेल’ द्वारा आयोजित ‘अभ्यास में अनुसंधान (अंतःविषय)’ नामक दो साप्ताहिक ‘क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ का ऑनलाइन आयोजन किया जा रहा है. आज शुक्रवार को दसवां दिन था. कार्यक्रम के पहले सत्र में डॉ. किशोर चंद्र सत्पथी ( मुख्य लाइब्रेरियन एवं प्रभारी, पी.सी.एम. संग्रहालय और पुरालेख, आई.एस.आई., कोलकाता ) ने ‘अनुक्रमण एजेंसियां और प्रभाव मैट्रिक्स: एक्सेसिंग रिसर्च प्रभाव, एच-इंडेक्स और परे ‘ विषय पर चर्चा की. अनुसंधान मेट्रिक्स, साइटेशन और एच-इंडेक्स के बारे में जानकारी दी. रिसर्च मेट्रिक्स, वैज्ञानिक और विद्वतापूर्ण अनुसंधान आउटपुट और उनके प्रभाव का मात्रात्मक विश्लेषण है. जर्नल की गुणवत्ता जांचने के लिए कुछ मेट्रिक्स टूल हैं जैसे – गूगल स्कॉलर, स्कोपस, वेब ऑफ साइंस, माइक्रोसॉफ्ट एकेडमिक आदि.

दूसरे सत्र में प्रो अरविंद चंद्र पांडेय (डीन, प्राकृतिक स्कूल संसाधन प्रबंधन, प्रोफेसर, विभाग भू सूचना विज्ञान, मध्य झारखंड विश्वविद्यालय) ने ‘एक अच्छे शोध की तैयारी प्रस्ताव और रिपोर्ट’ विषय पर जानकारी दी. अनुसंधान प्रस्ताव एक दस्तावेज है जिसका उपयोग एक शोध परियोजना का प्रस्ताव करने के लिए किया जाता है और इसे आमतौर पर वित्त पोषण एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थान या अन्य संबंधित संस्थानों को प्रस्तुत किया जाता है. उन्होंने एक शोध प्रस्ताव के लिए कुछ युक्तियां सुझाईं जैसे-शोध प्रश्न को परिभाषित करना, साहित्य समीक्षा करना, शोध पद्धति को परिभाषित करना, समयरेखा प्रदान करना और अपेक्षित परिणामों को परिभाषित करना.

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तीसरे सत्र में प्रो. बी एन पांडा (अनुसंधान के डीन, आर.आई.ई., एन.सी.ई.आर.टी, भुवनेश्वर) ने ‘विभिन्न की रिपोर्टिंग शैलियां अनुसंधान के प्रकार- थीसिस, परियोजना रिपोर्ट और अन्य’ विषय पर गहन व विस्तृत चर्चा की. उन्होंने बताया कि अनुसंधान करने के बाद प्रभावी रिपोर्टिंग की आवश्यकता होती है अन्यथा इसका कोई अर्थ नहीं रह जाता है. अनुसंधान की एक प्रभावी रिपोर्टिंग शैली लिखने के कुछ चरण इस प्रकार हैं:- शोध परिणामों का प्रसार, नीति के बारे में सूचित करना, अग्रिम ज्ञान प्रदान करना, पठनीयता में सुधार करना, प्रमुख सूचनाओं को उजागर करना और स्पष्टता को बढ़ाना. इसके अलावा उन्होंने विभिन्न प्रकार के शोधों की प्रभावी रिपोर्टिंग शैली के तत्वों जैसे- वस्तुनिष्ठता, स्पष्टता, संरचना, दृश्य सहायक, स्वर, उद्धरण और संदर्भ के बारे में चर्चा की.

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चौथे व अंतिम सत्र में डॉ किशोर चंद्र सत्पथी (मुख्य लाइब्रेरियन एवं प्रभारी, पीसीएम संग्रहालय और पुरालेख, आई.एस.आई, कोलकाता) ने ‘अनुसंधान डेटाबेस और अनुसंधान का उपयोग करना नेटवर्किंग साइट्स (डेटा बेस: जेएसटीओआर, पीक्यूडीटी ओपन, एरिक, बेस, टेलर और फ्रांसिस ऑनलाइन, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय प्रेस, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, विली, एल्सेवियर/साइंस डायरेक्ट, स्प्रिंगर,सोधगंगा और अन्य; शोध करना नेटवर्क साइट्स: रिसर्चगेट, शिक्षाविद, Google विद्वान, ORCID आईडी और अन्य ) की विस्तृत जानकारी दी. पूरे सत्र का संचालन सुमन कल्याण पंजा (सहायक प्राध्यापक) व पूरे सत्र का मार्गदर्शन प्रो तपन कुमार बसंतिया (कार्यक्रम के नोडल समन्वयक) किया.

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