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लोकसभा चुनाव में सीपीएम, सीपीआई, बीएसपी और एआईएमआईएम को NOTA से भी कम वोट

Updated at : 07 Jun 2024 8:56 AM (IST)
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lok sabha election

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लोकसभा चुनाव में झारखंड में 4 पार्टियों को नोटा से भी कम वोट मिले. जी हां, सीपीएम, सीपीआई, बीएसपी और एआईएमआईएम ऐसी पार्टियां हैं, जिन्हें NOTA से भी कम मत मिले.

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लोकसभा चुनाव में झारखंड से किस्मत आजमाने वाली 4 पार्टियों को नोटा (NOTA) से भी कम वोट मिले हैं. इन पार्टियों के नाम हैं- सीपीएम, सीपीआई, बीएसपी और एआईएमआईएम. इन पार्टियों को 1 फीसदी से भी कम वोट मिले हैं. इनमें 3 ऐसी पार्टियों पार्टियां हैं, जिन्हें 0.5 फीसदी वोट भी नहीं मिले.

लोकसभा चुनाव में 1,94,026 लोगों ने दबाया NOTA

झारखंड में 1,94,026 मतदाताओं ने NOTA दबाया. झारखंड में बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवार थे, जिनको नोटा से कम वोट मिले. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी को 1,57,667 वोट मिले हैं. इन 4 पार्टियों में बसपा को सबसे ज्यादा वोट मिला है. उसे कुल 0.92 फीसदी वोट मिले हैं, जो एक फीसदी से कम है.

नोटा से कम वोट पाने वाली पार्टियों में बसपा सबसे ऊपर

सीपीएम, सीपीआई, बीएसपी और एआईएमआईएम में तुलना करेंगे, तो सीपीआई दूसरे नंबर पर रही. उसे 0.31 फीसदी यानी 52,572 वोट मिले हैं. तीसरे नंबर पर सीपीएम रही. उसे सीपीआई से भी कम 0.22 प्रतिशत यानी 37,191 वोट मिले. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को झारखंड में सबसे कम 7,854 वोट मिले.

रांची से चुनाव लड़ने वाले 27 प्रत्याशियों में 23 को नोटा से कम वोट

सिर्फ रांची लोकसभा सीट की बात करें, तो यहां 27 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे थे. उनमें से 23 को नोटा से कम वोट मिले हैं. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कोडरमा में सबसे ज्यादा 42,152 लोगों ने नोटा का बटन दबाया जबकि गोड्डा में सबसे कम 4,361 लोगों ने इस विकल्प को चुना.

झारखंड की 14 लोकसभा सीट पर 4 चरणों में हुई वोटिंग

ज्ञात हो कि झारखंड में 14 लोकसभा सीट हैं. उन सीटों पर चार चरणों में 13 मई, 20 मई, 25 मई और 1 जून को वोटिंग हुई थी. चार चरणों में झारखंड की सभी 14 लोकसभा सीटों पर कुल 66.19 फीसदी मतदान हुआ. पहले चरण में 66.01 फीसदी, दूसरे चरण में 63.21 फीसदी, तीसरे चरण में 65.40 फीसदी और चौथे ‍एवं अंतिम चरण में 70.88 फीसदी वोटिंग हुई.

किस लोकसभा क्षेत्र में कितने लोगों ने नोटा का बटन दबाया

क्रम सं.लोकसभा क्षेत्र का नामकितने NOTA वोट पड़े
1.कोडरमा42152
2.पलामू24343
3.सिंहभूम23982
4.खूंटी21919
5.राजमहल18217
6.लोहरदगा11384
7.चतरा8511
8.रांची8153
9.जमशेदपुर7326
10.हजारीबाग7200
11.गिरिडीह6044
12.धनबाद7354
13.दुमका4526
14.गोड्डा4361

रांची में 23 प्रत्याशियों को NOTA से भी कम वोट

रांची लोकसभा सीट पर 8,153 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था. यह वोट चुनाव लड़ रहे 23 प्रत्याशियों को मिले वोट से ज्यादा हैं. जिन प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले, उनकी सूची इस प्रकार है.

  • निपू सिंह
  • धनंजय भगत
  • श्याम बिहारी प्रजापति
  • मनोज कुमार
  • रामहरि गोप
  • अंजनी पांडेय
  • सर्वेश्वरी साहु
  • हरिनाथ साहू
  • हेमंती देवी
  • रंजना गिरी
  • वीरेंद्र नाथ मांझी
  • धर्मेंद्र तिवारी
  • प्रवीण कच्छप
  • प्रवीण चंद्र महतो
  • संतोष कुमार जायसवाल
  • पंकज रवि
  • बिनोद उरांव
  • मनोरंजन भट्टाचार्य
  • एनुल अंसारी
  • मिंटू पासवान
  • कोलेश्वर महतो
  • कामेश्वर साव
  • अर्शद अयूब

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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