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कुक पिता की बेटी बनी सिटी टॉपर, परिवार की माली हालत बनी दाखिले की राह में रोड़ा

कुक पिता की बेटी बनी सिटी टॉपर, परिवार की माली हालत बनी दाखिले की राह में रोड़ा

रांची : जैक 10वीं बोर्ड की सिटी टॉपर व स्टेट की पांचवीं टॉपर सीमाब जरीन को 11वीं में दाखिले में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. परिवार की माली हालत उसके दाखिले की राह का रोड़ा बन गयी है. शहर के निजी स्कूलों ने जैक बोर्ड विद्यार्थी के लिए एडमिशन प्रक्रिया समाप्त कह कर वापस कर दिया है. सीमाब जरीन को 10वीं में कुल 485 (97 प्रतिशत) अंक मिले हैं. उसके पिता शाहिद इकबाल कुक का काम करते हैं. उनकी माली हालत ठीक नहीं है. पिता कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण चार माह से पेशे से जुड़ा काम नहीं हो रहा है. इससे कुल 11 लोगों के परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है. इस परिस्थिति में बेटी के एडमिशन के लिए 50 हजार रुपये से अधिक जुटाना संभव नहीं है.

स्कूल के प्राचार्यों ने एडमिशन की गारंटी ली है, पर एडमिशन के समय जमा होनेवाली फीस माफ नहीं करना चाहते हैं. नहीं मिला एडमिशन फॉर्मडोरंडा परसटोली की निवासी सीमाब जरीन कहती है कि 11वीं में दाखिले के लिए डीपीएस, जेवीएम श्यामली और संत जेवियर्स स्कूल डोरंडा गयी थी. इन स्कूलों में 11वीं में आवेदन प्रक्रिया रिजल्ट से पूर्व ही पूरी कर लेने की बात कही गयी. ऐसे में छात्रा ने घर के समीप स्कूलाें में आवेदन करना चाहा. स्कूल पहुंचने के बाद छात्रा को जैक बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए एडमिशन प्रक्रिया बंद हो जाने की जानकारी दी गयी. सीमाब कहती है कि परिवार की माली हालत ठीक न होने की वजह से वह अन्य संस्थानों में आवेदन करने से चूक गयी है.

नि:शुल्क संस्थानों में कर सकी आवेदनसीमाब ने बताया कि 11वीं में दाखिला मिल सके, इसके लिए वैसे ही स्कूल व कॉलेज का चयन किया, जहां आवेदन नि:शुल्क है. ऐसे में केंद्रीय विद्यालय हिनू, जामिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आवेदन कर चुकी हैं. सीमाब को गणित में 100 में 100 अंकसीमाब जरीन ने जैक की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 97 फीसदी अंक हासिल कर सिटी टॉपर बनने का गौरव हासिल किया. सीमाब ने साइंस में 98, हिन्दी में 96, एसएसटी में 98, इंग्लिश में 92, मैथ्स में 100 और अतिरिक्त विषय आइटी में 93 अंक हासिल किये हैं.

अपने अंक से संतुष्ट सीमाब कहती है कि 11वीं में साइंस (पीसीबी) लेकर पढ़ना चाहती है, ताकि भविष्य में मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बन सकूं. सीमाब नवंबर 2019 में गुवाहाटी में होनेवाले नेशनल साइंस सेमिनार में झारखंड का नेतृत्व कर चुकी है. इंजीनियरिंग की डिग्री के बावजूद बहनों को नौकरी नहींपरिवार में सीमाब से बड़ी चार बहनें और एक भाई है. बड़े भाई आरिज हसन और बड़ी बहन शफक इकबाल ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली है. डिग्री हाेने के बावजूद दोनों बेरोजगार है. सबसे बड़ी बहन गुनचल इकबाल ने एसआर प्रबंधन की पढ़ाई पूरी की है. कोविड-19 की वजह से कॉलेज की प्लेसमेंट प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. क्या कहना है प्राचार्यों कास्कूल में अंक के आधार पर एडमिशन ले सकते हैं.

एडमिशन के समय छात्रा को 51 हजार 600 रुपये एडमिशन फीस के रूप में जमा करनी होगी. इसमें किसी तरह की छूट नहीं दी जायेगी. स्कूल खुलने के बाद स्कॉलरशिप के माध्यम से आधी फीस माफ करा दी जायेगी. – समरजीत जाना, प्राचार्य, जेवीएम श्यामलीआवेदन प्रक्रिया खत्म हो जाने की वजह से स्कूल से फॉर्म नहीं दिया गया. छह दिन पहले ही साइंस (पीसीबी) में सीट फुल हो चुकी है. छात्रा को रिजल्ट के तुरंत बाद एडमिशन की प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए था. – फादर संजय केरकेट्टा, प्राचार्य, संत जेवियर्स स्कूल, डोरंडा जैक बोर्ड की टॉपर छात्रा के एडमिशन की बात मुझ तक नहीं आयी है. एडमिशन प्रक्रिया बंद हो जाने की वजह से उसे फॉर्म नहीं मिला होगा. जहां तक बात एडमिशन फीस की है, तो एडमिशन के दौरान इस पर बात की जायेगी. – डॉ राम सिंह, प्राचार्य, डीपीएस

Post by : Pritish Sahay

Prabhat Khabar News Desk
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