रिम्स में नियुक्तियों पर उठे सवाल पर प्रबंधन ने दिया स्पष्टीकरण

Author Praveen
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रिम्स में नियुक्तियों पर उठे सवाल पर प्रबंधन ने दिया स्पष्टीकरण

झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 27 जुलाई के आदेश का अनुपालन के अंतर्गत नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी एवं विधिसम्मत तरीके से संचालित किया गया है.

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रांची. झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 27 जुलाई के आदेश का अनुपालन के अंतर्गत नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी एवं विधिसम्मत तरीके से संचालित किया गया है. 22 फरवरी 2025 के माध्यम से गठित चयन समिति द्वारा प्रमाण पत्रों की गहन जांच के साथ पर्सनल इंट्रैक्शन की कार्यवाही की गयी थी. उक्त बयान रिम्स प्रबंधन की ओर से मंगलवार को प्रकाशित खबरों के संदर्भ में जारी किया गया है. अवमानना प्रकरण के संबंध में रिम्स द्वारा शो कॉज का उत्तर विधि पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है, जिसे स्वास्थ्य विभाग के विधि अनुभाग द्वारा भी देखा जा सकता है. रिम्स प्रबंधन ने समय-समय पर आयोजित नियुक्ति प्रक्रियाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि विभिन्न पदों पर अलग-अलग समय पर 234 नियुक्तियां की गयीं है. इस मामले में वर्तमान निदेशक को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है. संस्थान के प्रशासनिक विभाग का कहना है कि चयन व भर्ती की प्रक्रिया कई वर्षों से संस्थान स्तर पर लंबित रही है, न कि निदेशक स्तर पर. न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उस वक्त के निदेशकों द्वारा भी आवश्यक कदम उठाये गये थे. हालांकि, विभिन्न अपरिहार्य कारणों से प्रक्रिया में विलंब या स्थगित करना पड़ा था.

चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की भर्ती में प्रोसड्यिूरल लेप्स संभव

रिम्स प्रबंधन का कहना है कि चिकित्सकों को अतिरिक्त कार्यभार देते हुए उन्हें नियुक्ति समिति में शामिल किया गया था. इस लिहाज से प्रोसड्यिूरल लेप्स अथवा गैर इरादतन अनदेखी की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता. हालांकि, जानकारी दी गयी कि झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की भर्ती पूरी कर ली गयी है. इस पूरी प्रक्रिया को संस्थान द्वारा सीमित मानव संसाधनों की घोर कमी के बावजूद चिकित्सकों को अतिरिक्त कार्यभार देते हुए संपन्न कराया गया है. झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार इसकी जांच के लिए निदेशक द्वारा अपर निदेशक (प्रशासन) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था. रिम्स प्रबंधन ने बताया कि इसकी जांच लगभग पूर्ण हो चुकी है. समिति की अनुशंसा पर यदि यह प्रमाणित होता है कि किसी भी सदस्य द्वारा जानबूझकर अनियमितता या पक्षपात किया गया है, तो संबंधित व्यक्तियों पर नियम संगत कठोर कार्रवाई की जायेगी.

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