झारखंड में बच्चों को नहीं मिल रही कोवोवैक्स की दूसरी डोज, अभिभावक लगा रहे टीकाकरण केंद्रों का चक्कर

Updated at : 26 Aug 2022 9:19 AM (IST)
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झारखंड में बच्चों को नहीं मिल रही कोवोवैक्स की दूसरी डोज, अभिभावक लगा रहे टीकाकरण केंद्रों का चक्कर

कोरोना से बचाव के लिए अपने बच्चों को कोवोवैक्स की पहली डोज लगवाने वाले कई अभिभावक अब मुश्किल में फंस गये हैं. दूसरी डोज का समय पूरा होने पर जब वे निजी टीकाकरण केंद्र में टीका लेने पहुंच रहे हैं, तो उन्हें बताया जा रहा है कि वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं है. वैक्सीन कब आयेगा यह भी पता नहीं है.

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Ranchi news: कोरोना से बचाव के लिए अपने बच्चों को कोवोवैक्स की पहली डोज लगवाने वाले कई अभिभावक अब मुश्किल में फंस गये हैं. दूसरी डोज का समय पूरा होने पर जब वे निजी टीकाकरण केंद्र में टीका लेने पहुंच रहे हैं, तो उन्हें बताया जा रहा है कि वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं है. वैक्सीन कब आयेगा यह भी पता नहीं है. अभिभावक जब सरकारी टीकाकरण केंद्र पर पहुंचते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि कोवोवैक्स केवल निजी टीकाकरण केंद्र पर ही मिल सकता है. गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 से 17 वर्ष तक के बच्चों के लिए सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार कोवोवैक्स का टीका देने की अनुमति दी है.

आदेश की अनदेखी करने पर कानूनी कार्रवाई

जानकारों ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने जैसे ही टीका देने की अनुमति दी, राज्य के कई निजी टीकाकरण केंद्रों को यह वैक्सीन उपलब्ध करा दी गयी. वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि केंद्र सरकार ने टीका को अनुमति देते समय ही स्पष्ट कर दिया था कि जो भी निजी टीकाकरण केंद्र कोवोवैक्स का टीका उपलब्ध करायेंगे, उन्हें दोनों डोज उपलब्ध करानी होगी. आदेश की अनदेखी करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी.

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सरकारी व्यवस्था पर रखें भरोसा

सरकारी व्यवस्था में 18 प्लस के लिए कोविशील्ड, कोवैक्सीन और बच्चों के लिए कोर्वीवैक्स का टीका उपलब्ध है. निजी टीकाकरण केंद्रों में कोवोवैक्स लग रहा है. इसके दोनों डोज देने की जिम्मेदारी निजी सेंटर की है. सरकारी व्यवस्था पर लोगों को ज्यादा भरोसा दिखाना चाहिए.

सरकार की गाइडलाइन जरूरी

टीके की सभी डोज एक ही कंपनी की हो तो सबसे बेहतर. लेकिन टीका उपलब्ध नहीं है, तब मरीज हित में बदलाव किया जा सकता है. कंपनी बदलने के लिए सरकार की कोई गाइडलाइन जब तक नहीं आती है, तबतक तो इससे परहेज करना चाहिए.

रिपोर्ट: राजीव पांडेय, रांची

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